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ब्लॉगः भयंकर बारिश, सूखा, बाढ़...आने वाले दो दशकों में ग्लोबल वार्मिंग के साथ जलवायु खतरों का सामना करेगी दुनिया

By निरंकार सिंह | Updated: September 1, 2022 16:02 IST

संयुक्त राष्ट्र ने सोमवार को इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज रिपोर्ट जारी की जिसमें कहा गया है कि 3.6 बिलियन लोग जलवायु परिवर्तन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं। जलवायु परिवर्तन के प्रमुख कारण के रूप में मानव-प्रेरित कार्रवाई की पहचान करने वाली रिपोर्ट में कहा गया है कि यह प्रकृति में खतरनाक और व्यापक व्यवधान पैदा कर रहा है और दुनिया भर के अरबों लोगों के जीवन को प्रभावित कर रहा है।

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आज दुनिया में जगह-जगह बाढ़, सूखा, जंगल की आग, कटिबंधीय क्षेत्रों में तूफान आदि की तीव्रता और आवृत्ति बढ़ने का कारण खत्म होते जंगलों और जीवाश्म ईंधन के जलने से निकलने वाली ग्रीनहाउस गैसों की वायुमंडल में बढ़ती मात्रा है। इसमें कोई शक नहीं कि ग्रीष्म लहर भी ग्लोबल वार्मिंग का एक प्रत्यक्ष प्रभाव है। यूरोप के ठंडे मुल्कों में रिकॉर्ड गर्मी के बाद चीन भी अभूतपूर्व गर्मी और सूखे के दौर से गुजर रहा है। इन दिनों भारत और उसके आसपास के देशों में कहीं भयंकर बारिश तो कहीं कम वर्षा से सूखे का भारी संकट है। पाकिस्तान भीषण बाढ़ की चपेट में है। आधे से ज्यादा पाकिस्तान अभी पानी में है और बड़ी संख्या में लोग बेघर हो गए हैं। इस साल उत्तर भारत में भीषण गर्मी और लू के प्रकोप के बीच यूरोप में प्रचंड गर्मी पड़ने की खबरें सामने आईं।

बताया जा रहा है कि इस साल चीन में 61 साल की सबसे भयंकर गर्मी पड़ी है। गर्मी के साथ ही चीन के लोग बिजली की कमी और भारी सूखे का भी सामना कर रहे हैं। तेजी से बढ़ते तापमान को देखते हुए लोगों को घरों में ही रहने की सलाह दी गई है। चीन के 165 शहरों के लिए हीट वॉर्निंग का रेड अलर्ट जारी किया गया है।

चीन में बारिश न होने की वजह से कई इलाकों में भयंकर सूखा पड़ गया है। यहां जुलाई में पिछले साल की तुलना में 40 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जो 1961 के बाद से जुलाई महीने में सबसे कम बारिश का रिकॉर्ड है। चीन की सबसे लंबी और वहां की लाइफलाइन कहलाने वाली यांग्त्जी नदी लगभग सूख चुकी है। तिब्बत के पठारों से निकलकर 4 हजार मील की लंबी यात्रा के बाद यह नदी शंघाई के पास पूर्वी चीन सागर में गिरती है। यह चीन के सबसे उपजाऊ इलाके को सींचती है। यांग्त्जी नदी चीन के 40 करोड़ लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराती है। लेकिन इस बार सूखे से इसकी मुख्य धारा में पानी का फ्लो पिछले 5 सालों के औसत से 50 प्रतिशत से भी कम रह गया है। 

मौसम पर जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव पर शीर्ष विशेषज्ञों की राय है कि ग्रीष्म लहर ग्लोबल वार्मिंग का सीधा और स्पष्ट पैमाना बन गया है। संयुक्त राष्ट्र के एक पैनल इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) ने भी पाया था कि मानव-प्रेरित जलवायु परिवर्तन प्रकृति में खतरनाक और व्यापक व्यवधान पैदा कर रहा है और दुनिया भर के अरबों लोगों के जीवन को प्रभावित कर रहा है। पैनल ने अपनी इस साल की रिपोर्ट में कहा कि चरम मौसम की घटनाओं से लाखों लोगों को भोजन और पानी की गंभीर असुरक्षा का सामना करना पड़ा है, खासकर अफ्रीका, एशिया, मध्य और दक्षिण अमेरिका में, छोटे द्वीपों पर और आर्कटिक में। संयुक्त राष्ट्र ने सोमवार को इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज रिपोर्ट जारी की जिसमें कहा गया है कि 3.6 बिलियन लोग जलवायु परिवर्तन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं। जलवायु परिवर्तन के प्रमुख कारण के रूप में मानव-प्रेरित कार्रवाई की पहचान करने वाली रिपोर्ट में कहा गया है कि यह प्रकृति में खतरनाक और व्यापक व्यवधान पैदा कर रहा है और दुनिया भर के अरबों लोगों के जीवन को प्रभावित कर रहा है।

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि दुनिया अगले दो दशकों में 1.5 डिग्री सेल्सियस की ग्लोबल वार्मिंग के साथ कई अपरिहार्य जलवायु खतरों का सामना करेगी। इस बढ़ते तापमान के कुछ परिणाम अपरिवर्तनीय होंगे। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि बढ़ी हुई हीटवेव, सूखा और बाढ़ पहले से ही पौधों और जानवरों की सहनशीलता की सीमा से अधिक है, जिससे पेड़ों और मूंगों जैसी प्रजातियों में बड़े पैमाने पर मृत्यु दर बढ़ रही है। इन चरम मौसम की घटनाओं ने लाखों लोगों की विशेष रूप से अफ्रीका, एशिया, मध्य और दक्षिण अमेरिका, छोटे द्वीपों और आर्कटिक में तीव्र भोजन और पानी की असुरक्षा को उजागर किया है।

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