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प्रमोद भार्गव का ब्लॉगः घुसपैठियों को वापस भेजना जरूरी

By लोकमत समाचार हिंदी ब्यूरो | Updated: October 5, 2018 21:24 IST

सात रोहिंग्याओं को गुरुवार को प्रत्यर्पित कर म्यांमार भेज दिया गया

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प्रमोद भार्गव असम में अवैध रूप से रह रहे सात रोहिंग्या घुसपैठियों की वापसी का सिलसिला सरकार का स्वागतयोग्य कदम है। सात रोहिंग्याओं को गुरुवार को प्रत्यर्पित कर म्यांमार भेज दिया गया। हालांकि यह संख्या बहुत कम है, क्योंकि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग के अनुसार ही 14,000 रोहिंग्या भारत में रह रहे हैं। जबकि इनके अनधिकृत तौर से रहने की संख्या करीब 40,000 है। 

फिलहाल जिन सात अवैध आव्रजकों को वापस भेजा जाएगा, वे असम के सिलचर जिले के एक बंदीगृह में रह रहे हैं। इन्हें मणिपुर में मोरेह सीमा की पोस्ट पर म्यांमार प्रशासन को सौंपा जाएगा। इन घुसपैठियों को म्यांमार के राजनयिकों का काउंसलर एक्सेस दिया गया था। इसी के जरिये इनकी सही पहचान कर घर वापसी हो रही है। इनकी म्यांमार के नागरिक होने की पुष्टि तब हुई, जब रखाइन राज्य का उनका प्रामाणिक पता मिला।    

भारत में गैरकानूनी ढंग से घुसे रोहिंग्या किस हद तक खतरनाक साबित हो रहे हैं, इसका खुलासा अनेक रिपोर्टो में हो चुका है, बावजूद भारत के कथित मानवाधिकारवादी इनके बचाव में बार-बार आगे आ जाते हैं। देश में करीब 40,000 रोहिंग्या रह रहे हैं, जो सुरक्षा में सेंध लगाने का काम कर रहे हैं। इनमें से कई आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त हैं। इनके पाकिस्तान और आतंकी संगठन आईएस से भी संपर्क हैं। ये संगठन देश में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं।  

गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू ने संसद में जानकारी दी थी कि सभी राज्यों को रोहिंग्या समेत सभी अवैध शरणार्थियों को वापस भेजने का निर्देश दिया गया है। सुरक्षा खतरों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। आशंका जताई गई है कि जम्मू के बाद सबसे ज्यादा रोहिंग्या शरणार्थी हैदराबाद में रहते हैं। केंद्र व राज्य सरकारें जम्मू-कश्मीर में रह रहे म्यांमार के 15,000 रोहिंग्या की पहचान कर उन्हें अपने देश वापस भेजने के तरीके तलाश रही हैं।

रोहिंग्या ज्यादातर जम्मू और साम्बा जिलों में हैं। इसी तरह आंध्र प्रदेश की राजधानी हैदराबाद में 3800 रोहिंग्या के रहने की पहचान हुई है। ये लोग म्यांमार से भारत-बांग्लादेश सीमा, भारत-म्यांमार सीमा या फिर बंगाल की खाड़ी पार करके अवैध तरीके से भारत आए हैं। आंध्र प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के अलावा असम, प। बंगाल, केरल और उत्तर प्रदेश में कुल मिलाकर लगभग 40,000 रोहिंग्या भारत में रह रहे हैं। 

टॅग्स :रोहिंग्या मुसलमान
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