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जयंतीलाल भंडारी का ब्लॉग: नया बजट छोटे उद्योगों में जान फूंकने वाला हो

By डॉ जयंती लाल भण्डारी | Updated: January 23, 2020 10:33 IST

पिछले बजट में कैपिटल गेन से स्टार्टअप में निवेश करने पर आयकर छूट दी गई थी. कैपिटल गेन से एमएसएमई में निवेश करने पर भी आयकर छूट दी जाए. चूंकि छोटी और मझोली औद्योगिक-कारोबारी इकाइयां देश की अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा हैं, अतएव आर्थिक सुस्ती के दौर में बड़े उद्योगों की तरह इस क्षेत्र के लिए भी कारोबार सुगमता जरूरी है.

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इन दिनों देश के सूक्ष्म, छोटे और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) से संबद्ध उद्यमियों की निगाहें 1 फरवरी 2020 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले वित्त वर्ष 2020-21 के नए बजट की ओर लगी हुई है. इन्हें नए बजट से उम्मीद है कि इस समय जो एमएसएमई मांग में सुस्ती और कर्ज न मिल पाने से नकदी के संकट के दौर से गुजर रहा है, उसे नए बजट से नई जान मिल सकेगी.

गौरतलब है कि पिछले दिनों देश के छोटे और मध्यम उद्योगों से संबंधित उद्यमियों ने वित्त मंत्री के साथ बजट पूर्व बैठक में इस क्षेत्र को मुश्किलों से बचाने के लिए कई जरूरी अपेक्षाएं प्रस्तुत की हैं. कहा गया है कि एमएसएमई द्वारा दी जाने वाली पेशेवर सेवाओं पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की दर 5 फीसदी की जाए, यह अभी 18 फीसदी है. इस समय एमएसएमई में बैंकों का एनपीए 70,000 करोड़ रुपए है, इसे वर्ष 2022 तक नियमित लोन माना जाए. मुश्किलों से घिरे छोटे व मध्यम उद्योगों को राहत देने के लिए  बैंकों द्वारा एमएसएमई से वसूले जाने वाले सभी तरह के सर्विस चार्ज पूरी तरह माफ किए जाएं. जब एक एमएसएमई दूसरे एमएसएमई से कारोबार करे तो सर्विस चार्ज 5 फीसदी ही होना चाहिए, यह अभी 12 फीसदी है. एमएसएमई सेक्टर में काम करने वाले लोगों के लिए एक अलग पेंशन फंड बनाना चाहिए.

नए बजट के परिप्रेक्ष्य में एमएसएमई उद्यमियों ने वित्त मंत्री से मांग की है कि इस सेक्टर के लिए बैंकों द्वारा दिए जाने वाले कोलेटरल-फ्री लोन की जो सीमा दो करोड़ रु. है उसे बढ़ाया जाए. सूक्ष्म इकाइयों के लिए इसे बढ़ाकर 5 करोड़ रु., लघु उद्यम के लिए 15 करोड़ रु. और मध्यम आकार के उद्यम के लिए 25 करोड़ रु. किया जाए. एमएसएमई के शेयरों में खरीद-फरोख्त के लिए 20,000 करोड़ रु. का इन्वेस्टमेंट फंड बनाया जाए.

इसी तरह वित्त मंत्री से मांग की गई है कि सरकार ने कंपनियों के लिए आयकर की दरों में जो कटौती की घोषणा की है, इसका फायदा प्रोप्राइटरी या पार्टनरशिप फर्म के तौर पर रजिस्टर्ड एमएसएमई को भी दिया जाए. चूंकि यह क्षेत्र बड़ी संख्या में रोजगार पैदा करता है इसलिए इसे वित्तीय लाभ के अलावा रोजगार सृजन पर टैक्स में छूट दी जाए. पिछले बजट में कैपिटल गेन से स्टार्टअप में निवेश करने पर आयकर छूट दी गई थी. कैपिटल गेन से एमएसएमई में निवेश करने पर भी आयकर छूट दी जाए. चूंकि छोटी और मझोली औद्योगिक-कारोबारी इकाइयां देश की अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा हैं, अतएव आर्थिक सुस्ती के दौर में बड़े उद्योगों की तरह इस क्षेत्र के लिए भी कारोबार सुगमता जरूरी है. हम आशा करें कि वित्त मंत्री वर्ष 2020-21 के नए बजट में सूक्ष्म, छोटी और मझोली इकाइयों में नई जान फूंकने हेतु आवश्यक कदम उठाएंगी.

टॅग्स :बजट २०२०-२१मोदी सरकारनिर्मला सीतारमण
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