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ब्लॉग: पड़ोसियों से भारत के बेहतर रिश्तों के प्रयास में चीन डालता रहा है अड़ंगा

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: September 9, 2022 10:36 IST

चीन हमेशा से पड़ोसी देशों से भारत के संबंध बिगाड़ने के लिए सैनिक सहायता वाला हथियार अपनाता रहा है, ताकि उन देशों के जरिये भारतीय सीमावर्ती इलाकों में अलगाववादी हिंसा भड़काई जाए.

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बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना जब दिल्ली आई हुई थीं, उस समय भारत के सेना प्रमुख नेपाल के दौरे पर थे. यह इसी हफ्ते की घटना है. गत अगस्त में नेपाल के विदेशमंत्री नारायण खड़का चीन गए हुए थे. एक साल पहले शेर बहादुर देउवा के नेपाल का प्रधानमंत्री बनने के बाद नेपाल का वो पहला उच्चस्तरीय चीन दौरा था. 

शेर बहादुर देउवा स्वयं 1 अप्रैल 2022 को भारत पहुंच गए. उन्होंने न केवल आपसी द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर भारतीय नेताओें से बात की, बल्कि भाजपा के दिल्ली स्थित राष्ट्रीय मुख्यालय भी गए. उसको लेकर कम्युनिस्ट प्रभाव वाले नेपाल में खलबली मच गई. नेपाल में असंतुष्ट कम्युनिस्ट पार्टी विपक्ष में है. उपप्रधानमंत्री रह चुके विपक्षी नेता भीम रावल ने उसको लेकर बवाल मचाया. 

काठमांडू से रिपोर्ट मिली कि कम्युनिस्ट नेताओं ने सवाल उठा दिया कि शेर बहादुर देउवा नेपाल के प्रधानमंत्री की हैसियत से भारत गए या नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में. यहां तक कि देउवा की अपनी सरकार और पार्टी में भी विवाद हुआ. नेपाली विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार आम तौर पर कोई प्रधानमंत्री जब भारत के प्रधानमंत्री के न्यौते पर जाते हैं तो प्रोटोकॉल की औपचारिकता में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, उपराष्ट्रपति और मंत्रियों, राजनीतिकों से मिलते हैं. 

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आमंत्रण पर शेर बहादुर देउवा भारत आए और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा के बुलावे पर उनके पार्टी मुख्यालय गए. नेपाल में चीन के समर्थन से कम्युनिस्ट ताकतवर हैं, सभी जानते हैं. उसके बावजूद नेपाल के प्रधानमंत्री ने भारत सरकार के साथ-साथ सत्ताधारी दल से भी निकटता स्थापित की.

शेख हसीना ने दिल्ली में कदम रखते ही कहा कि अगर भारत और चीन के बीच कोई समस्या है तो ‘मैं उसमें नहीं पड़ना चाहती, मैं अपने देश का विकास चाहती हूं.’ चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने गत हफ्ते बांग्लादेश पहुंचकर खुद को ‘बांग्लादेश का सबसे विश्वसनीय लंबी अवधि वाला सामरिक साझीदार’ बताया. लेकिन बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने दो दिन बाद ‘फाइनेंशियल टाइम्स’(लंदन) को बताया कि ढाका और बीजिंग का रिश्ता सिर्फ चीन से कर्ज लेने तक सीमित है.

शेख हसीना ने अपने स्वागत में सबसे पहले कहा - ‘भारत सबसे ज्यादा भरोसेमंद और सहयोगी पड़ोसी है.’ भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा - ‘हमारी पड़ोसी पहले’ वाली नीति के अंतर्गत नेपाल सबसे महत्वपूर्ण भागीदार है.’

नेपाल के बाद अपने दूसरे पड़ोसी भूटान के प्रति भी भारत सजग है, ताकि चीन का भूटान को अपने करीब लाने का प्रयास कमजोर हो. 29 अप्रैल को विदेशमंत्री एस. जयशंकर थिंपू गए और हिमाचल में चीन के मुहाने पर स्थित रक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण भूटान से नैतिक तथा भावनात्मक करीबी स्थापित की.

विगत कुछ वर्षों में भारत ने पड़ोसी देशों के साथ रिश्ते मजबूत करने में चीन को पछाड़ने में सफलता हासिल की है. दुनिया की एक प्रभावशाली सैनिक और आर्थिक महाशक्ति के रूप में उभरे भारत को ‘पड़ोसी पहले’ की विदेश नीति में कामयाबी मिल रही है. इसका मूल कारण है, पास-पड़ोस में अस्थिरता और राजनीतिक उथल-पुथल पैदा न करने का भारत का परंपरागत सिद्धांत, जो दूसरी महाशक्ति चीन से मेल नहीं खाता. इतना ही नहीं, रिश्ते में खटास के बावजूद भारत हमेशा सहायता का हाथ बढ़ाए रखता है.

चीन हमेशा से पड़ोसी देशों से भारत के संबंध बिगाड़ने के लिए सैनिक सहायता वाला हथियार अपनाता रहा है, ताकि उन देशों के जरिये भारतीय सीमावर्ती इलाकों में अलगाववादी हिंसा भड़काई जाए. भारत की पूर्वोत्तर सीमा म्यांमार और चीन से लगी है, जिसका दूसरा छोर बांग्लादेश से सटा है. 1971 में भारत की सहायता से पाकिस्तानी कब्जे से मुक्त होने के बाद आजाद बांग्लादेश का उदय हुआ. आज बांग्लादेश में भारत के सहयोग से राजनीतिक स्थिरता है.

भारत के लिए चीन की वजह से म्यांमार सिरदर्द बना हुआ है. बंगाल की खाड़ी से लगे म्यांमार के रास्ते चीन पूर्वोत्तर में नगा और अन्य उग्रवादियों को उकसाता है. कम्युनिस्ट सैनिक तानाशाही के चंगुल में फंसे म्यांमार में चीन लोकतंत्र कायम नहीं रहने देता. इसके बावजूद म्यांमार ने भारत से नजदीकी कायम रखी है. म्यांमार के समर्थन में दूसरा कम्युनिस्ट देश रूस हाल में सामने आया है. म्यांमार के रास्ते भारत को अपने समुद्री पड़ोसी आसियान (दक्षिण पूर्व एशियाई देश) देशों में चीन को शिकस्त देने में आसानी हुई है, जहां चीन का दशकों से दबदबा रहा है. 

भारत-म्यांमार-थाईलैंड हाईवे परियोजना में बांग्लादेश भी साझीदार बनना चाहता है. समुद्री पड़ोसी श्रीलंका को भी भारत ने इस बीच चीन के पसोपेश से मुक्त किया है. निकटतम पड़ोसियों के साथ बंगाल की खाड़ी में भारत की बिम्सटेक (बहुक्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयेाग के लिए बंगाल की खाड़ी पहल) भी चीन के लिए बड़ी चुनौती है. इस संगठन में श्रीलंका, म्यांमार, बांग्लादेश, थाईलैंड आदि देश हैं.

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