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ब्लॉग: सेना में नेतृत्व को युवा बनाने की पहल, बदलाव के आसार काफी मजबूत

By लोकमत समाचार हिंदी ब्यूरो | Updated: July 19, 2018 01:28 IST

इस समय जो परिस्थिति है उसके अनुसार सेना और पुलिस/आईएएस के अधिकारियों में मतभेद की इस खाई को पाटने की अनेक कोशिश की गई हैं लेकिन मनमुटाव यथावत बना रहता है. इसका सीधा-सीधा असर काम में दिखता है.

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सारंग थत्ते

भारतीय सेना में बदलाव बड़े पैमाने पर होने के आसार काफी मजबूत दिखाई दे रहे हैं. स्वतंत्नता के बाद से कई बार अलग-अलग समितियों ने देश के रक्षा ढांचे को सुदृढ़ बनाने और फौज को युवा रखने के कई तरीके अपनाए हैं. दिसंबर 2004 में अजय विक्रम सिंह के अधीन बनाई गई समिति ने सेना में यूनिट कमांडर का सेवाकाल कम करते हुए थल सेना में मेजर और लेफ्टिनेंट कर्नल रैंक के अधिकारियों को बेहतर प्रमोशन के द्वार खोले थे. इसी के अंतर्गत नौसेना और वायुसेना में भी समकक्ष बदलाव लाए गए थे. इस रिपोर्ट के तहत बटालियन और ब्रिगेड कमांडर की उम्र में कटौती की गई थी, जिससे युद्ध के परिप्रेक्ष्य में युवा अधिकारियों को आगे बढ़ने का मौका दिया गया था. इस बदलाव में 26 वर्ष के सेवाकाल में कर्नल रैंक के अधिकारी एक यूनिट की कमान संभालेंगे और लेफ्टिनेंट कर्नल के पद (जो यूनिट में सेकेंड इन  कमांड होते हैं) पद पर 13 साल की सर्विस में ओहदा संभाल सकेंगे. इससे पूर्व यह सीमा 18 वर्ष थी. इस समिति की सिफारिशों से लगभग 750 लेफ्टिनेंट कर्नल तब कर्नल के ओहदे पर पदोन्नति पा सके थे. मेजर रैंक पर इस कमेटी की अनुशंसा के अनुसार 6 साल ही लगने थे जबकि इससे पूर्व 10 साल का समय लगता था.

अब 14 वर्षो के अंतराल के बाद थल सेना में नई सोच ने जन्म लिया है. ब्रिगेडियर रैंक को समाप्त करने का मन सेना बना रही है. सेना के आधिकारिक पत्न में इसका खुलासा किया गया है और विभिन्न मुख्यालयों से इस बाबत विचार मंगाए जा रहे हैं. मकसद इस बदलाव का वही है, सेना को युवा कमान अधिकारी देना! सेना की युद्ध में इस्तेमाल होने वाली सबसे छोटी इकाई है ब्रिगेड, जिसका मुखिया एक ब्रिगेडियर होता है. तीन या ज्यादा ब्रिगेड से बनती है एक डिवीजन जिसकी कमान मेजर जनरल के कंधे पर होती है और तीन डिवीजन से बनती है एक कोर जो युद्ध में सबसे बड़ी इकाई मानी जाती है.

कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल रैंक का अधिकारी होता है तथा जरूरत के मुताबिक हमने तीन या चार कोर को मिलाकर उन पर कमान करने के लिए कमांड हेडक्वॉर्टर तैयार किए हैं. इस समय भारतीय सेना में 14 कोर, 49 डिवीजन और 240 से ज्यादा ब्रिगेड मौजूद हैं. 6 प्रादेशिक कमांड और एक प्रशिक्षण कमांड मौजूद है. कहने का मकसद यह है कि सेना की इकाइयों के बलबूते पर जंग लड़ी जाती है और उसे कमान करने वाले अपने ओहदे, स्टार प्लेट एवं कंधे पर मौजूद सितारों और शेर/तलवार से जाने जाते हैं.      

सरकार ने सेना को अपने ढांचे को चुस्त-दुरुस्त बनाने की कवायद करने का हुक्म दिया था. इस बाबत कुछ निर्णय लिए जा चुके हैं और कुछ पर अमल भी हो चुका है. सेना के वेतन एवं भत्ताें पर इस वित्तीय वर्ष के अंत तक लगभग 81 हजार करोड़ रुपए का खर्च आने की उम्मीद है, पेंशन के मद में 96 हजार करोड़ रु पए दिए गए हैं जबकि आधुनिकीकरण के लिए सिर्फ 26688 करोड़ रुपए हैं.

थल सेना में 42,000 अधिकारी और 12 लाख सैनिक मौजूद हैं. इस समय कुल नौ रैंक सेना में हैं जिन्हें कम करते हुए ब्रिगेडियर रैंक को समाप्त किए जाने की अनुशंसा है. इस विचार-विमर्श का नतीजा और उसका क्रियान्वयन आने वाले साल में होने की गुंजाइश है. सेना और उसके समकक्ष आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की पदोन्नति की प्रक्रिया बड़ी तेजी से होती है और लगभग सभी आईएएस ज्वाइंट सेक्रे टरी के ओहदे को हासिल कर लेते हैं, जो सेना के मेजर जनरल रैंक के समकक्ष माना जाता है. पुलिस विभाग में इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस का ओहदा ज्वाइंट सेक्रेटरी के बराबर दिए जाने से वे ब्रिगेडियर रैंक से ऊपर माने जाते हैं. इसका सीधा-सीधा असर उनके वेतन और भत्ताें में देखा जा सकता है, जो ब्रिगेडियर रैंक के वेतन से ज्यादा है. ज्वाइंट सेक्रेटरी बनने के लिए आईएएस अधिकारी को महज 18 वर्ष लगते हैं, जबकि सेना के अधिकारी को मेजर जनरल रैंक पाने में फिलहाल 32 से 33 साल लगते हैं! सेना में 100 अधिकारियों में से महज 5 या 6 मेजर जनरल रैंक तक पहुंच पाते हैं, जबकि आईएएस में 100 में 80 ज्वाइंट सेक्रे टरी बन जाते हैं (मेजर जनरल रैंक के समकक्ष). इस समय जो परिस्थिति है उसके अनुसार सेना और पुलिस/आईएएस के अधिकारियों में मतभेद की इस खाई को पाटने की अनेक कोशिश की गई हैं लेकिन मनमुटाव यथावत बना रहता है. इसका सीधा-सीधा असर काम में दिखता है.

अब सेना के कर्नल को योग्यता के अनुसार ब्रिगेडियर रैंक पर पदोन्नति न देते हुए सीधे मेजर जनरल रैंक पर 26 वर्ष की सेवा में पदोन्नत किया जाएगा. सेना प्रमुख की इस सोच से सेना में मौजूद कर्नल रैंक के अधिकारियों को पदोन्नति पर आईएएस के समकक्ष वेतनमान और ओहदा दिए जाने का प्रावधान नजर आता है तथा इससे आपसी मनमुटाव दूर होगा. 

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