ड्रोन और रडार तकनीक में नवाचार का मौका, वायुसेना ने मेहर बाबा प्रतियोगिता के तीसरे संस्करण के लिए पंजीकरण किया आरंभ
By फहीम ख़ान | Updated: April 24, 2026 17:45 IST2026-04-24T17:45:40+5:302026-04-24T17:45:55+5:30
प्रतियोगिता का विषय इस बार ड्रोन आधारित निगरानी रडारों के लिए सहयोग रखा गया है. इसका मकसद ऐसी उन्नत तकनीक विकसित करना है, जो हवाई लक्ष्यों की पहचान, ट्रैकिंग और रियल-टाइम जानकारी देने में सक्षम हो.

ड्रोन और रडार तकनीक में नवाचार का मौका, वायुसेना ने मेहर बाबा प्रतियोगिता के तीसरे संस्करण के लिए पंजीकरण किया आरंभ
नागपुर: भारतीय वायु सेना ने मेहर बाबा प्रतियोगिता-3 (एमबीसी-3) के तीसरे संस्करण के लिए पंजीकरण प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की है. यह प्रतियोगिता स्वदेशी ड्रोन और आधुनिक निगरानी तकनीकों को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. प्रतियोगिता का विषय इस बार ड्रोन आधारित निगरानी रडारों के लिए सहयोग रखा गया है. इसका मकसद ऐसी उन्नत तकनीक विकसित करना है, जो हवाई लक्ष्यों की पहचान, ट्रैकिंग और रियल-टाइम जानकारी देने में सक्षम हो.
इसके लिए पंजीकरण 27 अप्रैल 2026 से शुरू होगा. इच्छुक प्रतिभागी आधिकारिक वेबसाइट के जरिए आवेदन कर सकते हैं. प्रतियोगिता में चुने गए प्रतिभागियों को विकास के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी, वहीं शीर्ष तीन विजेताओं को विशेष पुरस्कार भी मिलेंगे. इस प्रतियोगिता की घोषणा रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने एयरो इंडिया 2025 के दौरान की थी. एमबीसी-3 का लक्ष्य मानवरहित हवाई प्रणालियों के सहयोगी समूह (स्वार्म) के लिए एक ऐसा मॉडल तैयार करना है, जो हवाई रडार की तरह काम कर सके और केंद्रीकृत स्टेशन को सटीक जानकारी उपलब्ध कराए. इच्छुक प्रतिभागी प्रतियोगिता से संबंधित पूरी जानकारी आधिकारिक वेबसाइट https://indianairforce.nic.in/mehar_baba पर उपलब्ध 'विजन डॉक्यूमेंट' से प्राप्त कर सकते हैं.
भारतीय वायुसेना ने उद्योग, स्टार्टअप, शैक्षणिक संस्थानों और शोध संगठनों को इस पहल से जुड़ने का आह्वान किया है. इससे पहले आयोजित दो संस्करणों में आपदा राहत कार्यों के लिए स्वार्म ड्रोन और एयरक्राफ्ट सतहों पर विदेशी वस्तु पहचान तकनीक विकसित की गई थी. इस पहल के जरिए अब तक मानवरहित प्रणालियों के क्षेत्र में करीब 2000 करोड़ रुपये के ऑर्डर हासिल किए जा चुके हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यह मंच देश में रक्षा तकनीक के स्वदेशीकरण को नई गति दे रहा है.
गौरतलब है कि इस प्रतियोगिता का नाम वायुसेना के दिग्गज एयर कमोडोर मेहर सिंह के सम्मान में रखा गया है, जिन्हें ‘मेहर बाबा’ के नाम से जाना जाता था. वे भारतीय वायुसेना के पहले महावीर चक्र सम्मानित अधिकारी थे और कठिन परिस्थितियों में साहसिक उड़ानों के लिए प्रसिद्ध रहे.