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रजिया सुल्तान से रेखा गुप्ता: दिल्ली पर राज करतीं महिला शासक?, जानिए इतिहास

By विवेक शुक्ला | Updated: February 21, 2025 05:51 IST

Delhi New CM: इल्तुतमिश ने अपनी मृत्यु से पहले अपनी बेटी को अपना उत्तराधिकारी बना दिया था. उसे अपने किसी भी पुत्र में दिल्ली पर राज करने की कुव्वत नजर नहीं आती थी. 

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ठळक मुद्देरजिया सुल्तान के राज के सात सौ साल से भी अधिक समय के बाद शीला दीक्षित 1998 में दिल्ली की मुख्यमंत्री बनीं. अगर मुख्यमंत्री के रूप में शीला दीक्षित का कार्यकाल सबसे लंबा रहा तो सुषमा स्वराज का कार्यकाल दो महीने भी नहीं रहा.भाजपा आलाकमान ने साहिब सिंह वर्मा के स्थान पर सुषमा स्वराज को मुख्यमंत्री बनाया था.

Delhi New CM: रेखा गुप्ता ने गुरुवार को राजधानी के रामलीला मैदान पर जब दिल्ली के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, तब वहां से कुछ दूरी पर दिल्ली 6 की एक गली में  सन्नाटा  था. इसका नाम है बुलबुलीखाना. यहां  चारों तरफ से घिरे हुए परिसर में चिर निद्रा में लीन हैं रजिया सुल्तान. यहां की हालत को देखकर समझ आता है कि इधर अब शायद ही कोई उस रजिया सुल्तान की कब्र पर फूल चढ़ाने आता हो जिसने 1236-1240 के बीच दिल्ली पर राज किया था. इधर लगे एक शिलापट्ट पर बताया गया है कि रजिया सुल्तान दिल्ली सल्तनत में गुलाम वंश के प्रमुख शासक इल्तुतमिश की बेटी थीं. इल्तुतमिश ने अपनी मृत्यु से पहले अपनी बेटी को अपना उत्तराधिकारी बना दिया था. उसे अपने किसी भी पुत्र में दिल्ली पर राज करने की कुव्वत नजर नहीं आती थी.

बहरहाल, रजिया सुल्तान के राज के सात सौ साल से भी अधिक समय के बाद शीला दीक्षित 1998 में दिल्ली की मुख्यमंत्री बनीं. उन्होंने लगातार 15 सालों तक दिल्ली पर राज किया. इतने लंबे समय तक दिल्ली पर शायद ही किसी महिला शासक ने लगातार राज किया हो. अगर मुख्यमंत्री के रूप में शीला दीक्षित का कार्यकाल सबसे लंबा रहा तो सुषमा स्वराज का कार्यकाल दो महीने भी नहीं रहा.

वो 12 अक्तूबर 1998 से लेकर 3 दिसंबर 1998 तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं. जाहिर है कि इतने छोटे से कार्यकाल में वे कोई अहम कदम जनता के हित में नहीं उठा सकी थीं. भाजपा आलाकमान ने साहिब सिंह वर्मा के स्थान पर सुषमा स्वराज को मुख्यमंत्री बनाया था. अब साहिब सिंह वर्मा के पुत्र प्रवेश साहिब सिंह वर्मा दिल्ली की कैबिनेट में आ गए हैं.

अगर आप दिल्ली की सियासत के गुजरे दौर के पन्ने खंगालें तो पता चलेगा कि डॉ. सुशीला नैयर को अज्ञात कारणों के चलते यहां के पहले मुख्यमंत्री की कुर्सी से दूर रखा गया था. देश के पहले लोकसभा चुनाव के साथ ही दिल्ली विधानसभा का भी चुनाव 1952 में हुआ था. उसमें कांग्रेस को अभूतपूर्व विजय मिली.

सियासत और सार्वजनिक जीवन में कामकाज के लिहाज से डॉ. सुशीला नैयर के मुख्यमंत्री बनने की पूरी उम्मीद थी. पर दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री बनाए गए नांगलोई के विधायक चौधरी ब्रह्म प्रकाश. उन्होंने डॉ. सुशीला को अपना स्वास्थ्य मंत्री बनाया. तब बहुत लोगों को हैरानी हुई थी कि डॉ. सुशीला नैयर को क्यों मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया.

खैर, अरविंद केजरीवाल के अचानक इस्तीफा देने के बाद आतिशी पिछले साल 17 सितंबर को दिल्ली की मुख्यमंत्री बनीं. अब रेखा गुप्ता दिल्ली की चौथी मुख्यमंत्री बनी हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी के दौलत राम कॉलेज की स्टूडेंट रही रेखा गुप्ता दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ की अध्यक्ष भी रही हैं. उन्हें अब दिल्ली के मसलों को हल करना होगा.

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