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परिचित पुरुष के साथ ही लंबी यात्रा पर जाएं अफ़ग़ानी महिलाएं; तालिबान के नए फरमान का मानवाधिकार आयोग ने किया विरोध

By आजाद खान | Updated: December 27, 2021 10:33 IST

अफगानिस्तान पर अपना कब्जा करने के बाद तालिबान ने चुनाव आयोग और संसदीय मंत्रालय को भी खत्म कर दिया है।

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ठळक मुद्देतालिबान के नए फरमान का मानवाधिकार भी विरोध कर रहा है।अफगानी महिलाएं अब बिना किसी पुरुष के साथ लंबी यात्रा नहीं कर सकती है। मानवाधिकार का कहना है कि तालिबान हिजाब को लेकर अभी भी अपना मत साफ नहीं किया है।

विश्व:अफगानिस्तान में तालिबान ने अब एक और नया फरमान जारी किया है जिससे फिर से इसके खिलाफ आवाज उठने लगी है। तालिबान अधिकारियों ने रविवार को एक बयान जारी कर यह कहा है कि लंबी दूरी वाली यात्रा पर हर महिला के साथ एक पुरुष होना चाहिए, चाहे वह पुरुष महिला का घरवाला हो या उसका रिश्तेदार हो। आपको बता दें कि तालिबान ने इस साल 15 अगस्त को अफ़ग़ानिस्तान पर दोबारा क़ब्ज़ा कर लिया था और तब से वह देश को अपने हिसाब से चला रहा है। ऐसे में आए दिन तालिबान अधिकारी कुछ न कुछ नया फरमान लेकर आते रहते हैं और अपनी मनमानी से लोगों को राज करते हैं। इससे पहले तालिबान ने अफगानिस्तान के टेलीविजन चैनलों पर महिलाओं वाले प्रोग्राम भी चलाने को मना कर दिया था। 

क्या है तालिबान अधिकारियों का नया फरमान

इस पर तालिबान मंत्रालय के प्रवक्ता सादिक अकिफ मुहाजिर ने रविवार को न्यूज एजेंसी एएफपी पर एक बयान दिया है। उन्होंने बताया कि 45 मील (72 किलोमीटर) से अधिक की यात्रा करने वाली महिलाओं के साथ उनके परिवार के सदस्य या फिर रिश्तेदार साथ नहीं हैं तो उन्हें यातायात करने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सभी गाड़ी मालिकों को यह भी बता दिया गया है कि वे अपने गाड़ी में बिना हिजाब वाली महिलाओं को न बैठने दें। नई गाइडलाइंस में लोगों को यह भी चेताया गया है कि वे अपने गाड़ी में गाना बजाना और संगीत का इस्तेमाल न करें। इसके साथ ही तालिबान ने इससे पहले छात्राओं के भी स्कूल जाने पर भी रोक लगा चुका है। 

मानवाधिकार ने इन फैसलों का किया विरोध 

तालिबान मंत्रालय द्वारा जारी नए फरमान पर मानवाधिकार ने भी अपना रुख साफ किया है और इसका विरोध किया है। इस पर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का तर्क है कि हिजाब को लेकर तालिबान की व्याख्या अब तक स्पष्ट नहीं है। उनका कहना है कि हिजाब के बदले महिलाओं को एक कपड़े से ढ़कने की इजाजत दी जाती जिसे वह अपना चेहरा और पूरा शरीर ढ़क लेती। उनका यह भी कहना है कि महिलाएं पहले से ही हिजाब पहन रही हैं, ऐसे में यह नया फरमान जारी करने की जरूरत नहीं थी। 

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