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India's First Driverless Metro| Delhi Metro| Narendra Modi|ड्राइवरलेस मेट्रो

By गुणातीत ओझा | Updated: December 28, 2020 23:13 IST

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कितनी सुरक्षित है भारत की पहली ड्राइवरलेस मेट्रो ?देश को आज पहली ड्राइवरलेस मेट्रो (Driverless Metro) की सौगात मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने सोमवार को हरी झंडी दिखाकर इस एडवांस टेक्नलॉजी वाली मेट्रो को रवाना किया। देश की पहली ड्राइवरलेस मेट्रो मजेंटा लाइन और पिंक लाइन पर चलाई जाएगी। पहले चरण में यह मेट्रो मजेंटा लाइन पर जनकपुरी पश्चिम से नोएडा के बॉटनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन के बीच का सफर तय करेगी। इसके बाद साल 2021 में पिंक लाइन पर 57 किलोमीटर तक इस नई मेट्रो को चलाने की योजना है, जो मजलिस पार्क से शिव विहार तक की दूरी तय करेगी। ड्राइवरलेस ट्रेन में 2,280 यात्री एक बार में सफर कर सकते हैं। इसमें हर कोच में 380 यात्री सवार हो सकते हैं। दिल्ली मेट्रो ने पहली बार सितंबर 2017 को इसका ट्रायल शुरू किया था। ये तो बात होई गई ड्राइवरलेस मेट्रो के शुरुआत की। अब आप सोच रहे होंगे कि इस मेट्रो में सुरक्षा का कितना ख्याल रखा गया है। तो आपको बता दें कि सुरक्षा के मामले में यह मेट्रो दूसरे देश में चल रही ड्राइवरलेस मेट्रो से कम नहीं है।ड्राइवरलेस मेट्रो में सबसे पहले मैनुअल गलती की संभावना लगभग ना के बराबर हो जाती है। इस मेट्रो में ड्राइवर का काम खत्म हो जाता है और ट्रेन पूरी तरह से ऑटोमेटिक तरीके से चलती है। मगर इमरजेंसी के लिए ड्राइवर ट्रेन में ही मौजूद रहता है। इसे अटेन्डेन्ट कहा जाता है। ड्राइवरलेस मेट्रो के स्टार्ट, स्टॉप और डोर ओपन-क्लोज करने में किसी भी ड्राइवर के मौजूद रहने की जरूरत नहीं है। इमरजेंसी सर्विस समेत हर तरह के ऑपरेशन को रिमोट कंट्रोल से ऑपरेट किया जा सकता है। 50 मीटर दूर ट्रैक पर कोई वस्तु है तो इसमें ब्रेक अपने आप लग जाएगा। ड्राइवरलेस मेट्रो जिन स्टेशनों से गुजरेगी, उनके प्लेटफॉर्म पर स्क्रीन डोर लगे होंगे। सुरक्षा के लिहाज से ये स्क्रीन डोर लगाए गए हैं ताकि कोई ट्रैक पर न जा सके। यह डोर तभी खुलेंगे जब प्लेटफॉर्म पर मेट्रो ट्रेन आकर खड़ी हो जाएगी। यानी हर मामले में पहले से और ज्यादा सुरक्षित होगी यह नई मेट्रो।कम समय में तय होगा लंबा सफरदिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) के मुताबिक, ड्राइवरलेस मेट्रो एक जैसी रफ्तार से चल पाएगी। इसकी टॉप स्पीड 95 किलोमीटर प्रति घंटा होगी और यह ट्रैक पर 85 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलेगी। DMRC के मुताबिक नई मेट्रो में पावर की खपत भी कम होगी। ड्राइवरलेस मेट्रो के लिए नए वाले सिग्नल सिस्टम की वजह से दो ट्रेनों के बीच की न्यूनतम दूरी घट जाएगी जिससे फ्रीक्वेंसी अच्छी होगी। यानी एक ट्रेन के जाने के बाद दूसरी ट्रेन के लिए यात्रियों को ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। ड्राइवरलेस मेट्रो में ड्राइवर केबिन नहीं होगी तो लाजमी है कि यात्रियों के लिए जगह ज्यादा होगी। यात्री मेट्रो की जाने वाली दिशा में खड़े होकर तेज रफ्तार का आनंद भी ले सकेंगे, यानी सामने का सबकुछ साफ दिखेगा।
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