हिन्दू धर्म में मकर संक्रांति का त्योहार बेहद खास और महत्वपूर्ण माना जाता है। सूर्य के राशि परिवर्तन को ही संक्रांति कहते हैं। इस तरह साल में 12 संक्रांति आते हैं। पौष मास में जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तभी मकर संक्रांति का पर्व को मनाया जाता है। वर्तमान समय में जनवरी के चौदहवें या पन्द्रहवें दिन इसे मनाया जाता है। मकर संक्रांति के साथ एक माह से चला रहा खरमास या मलमास खत्म हो जाता है और शुभ कार्य शुरू किए जाते हैं। परंपराओं के अनुसार मकर संक्रांति पर पवित्र नदियों में स्नान करने का विशेष महत्व है। साथ ही दान आदि भी किया जाता है। इस दिन तिल का महत्व काफी खास हो जाता है। तिल का दान, और इसका सेवन शुभ माना गया है। मकर संक्रांति के दिन गुजरात में अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव भी मनाया जाता है। Read More
आज सूर्य ग्रह दोपहर 02:43 बजे धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश कर चुके हैं। इस राशि में सूर्य 13 फरवरी 2022 , रविवार को तड़के 03:41 बजे तक स्थित रहेंगे। ...
कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच जहां एक ओर हरकी पैड़ी को जिला प्रशासन ने सील कर दिया है तो वहीं देश के अन्य राज्यों से मकर संक्रांति पर श्रद्धालुओं की स्नान करते हुए तस्वीरें सामने आ रही हैं। ...
ज्योतिषीय गणना के मुताबिक, जिस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं, उसी दिन मकर संक्रांति मनाई जाती है और मकर राशि में सूर्य का गोचर 14 जनवरी, शुक्रवार को दोपहर 02:43 बजे होगा। ऐसे में मकर संक्रांति पर्व 14 जनवरी को मनाया जाएगा। ...
मकर संक्रांति हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं और सूर्य के राशि परिवर्तन को संक्रांति कहते हैं। सूर्य जिस भी राशि में जाते हैं उसी राशि के नाम से संक्रांति का नाम पड़ जाता है। ...
हाल में कोविड के मामलों तेजी से हो रही वृद्धि के मद्देनजर हरिद्वार में हर की पौडी, ऋषिकेश में त्रिवेणी तथा अन्य गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं के प्रवेश पर रोक लगा दी गयी है। ...
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य देव को आत्मा, पिता, राजा, उच्च पद-प्रतिष्ठा, मान-सम्मान आदि का कारक माना जाता है। सूर्य देव सिंह राशि के स्वामी हैं। तुला राशि में ये नीच के, तो मेष राशि में उच्च के माने जाते हैं। ...