लद्दाख एक ऊंचा पठार है जिसका अधिकतर हिस्सा 3,500 मीटर (9,800 फीट) से ऊंचा है। यह हिमालय और कराकोरम पर्वत श्रृंखला और सिन्धु नदी की ऊपरी घाटी में फैला है। करीब 33,554 वर्गमील में फैले लद्दाख में बसने लायक जगह बेहद कम है। यहां हर ओर ऊंचे-ऊंचे विशालकाय पथरीले पहाड़ और मैदान हैं। यहां के सभी धर्मों के लोगों की जनसंख्या मिलाकर 2,36,539 है। लद्दाख के पूर्वी हिस्से में लेह के आसपास रहने वाले निवासी मुख्यतः तिब्बती, बौद्ध और भारतीय हिन्दू हैं, लेकिन पश्चिम में करगिल के आसपास जनसंख्या मुख्यतः भारतीय शिया मुस्लिमों की है। तिब्बत पर कब्जे के दौरान बहुत से तिब्बती यहां आकर बस गए थे। लद्दाख को चीन, तिब्बत का हिस्सा मानता है। सिन्धु नदी लद्दाख से निकलकर ही पाकिस्तान के कराची तक बहती है। प्राचीनकाल में लद्दाख कई अहम व्यापारिक रास्तों का प्रमुख केंद्र था। Read More
भारत और चीन ने पारस्परिक रूप से 11 मार्च 2022 को चुशुल मोल्दो बैठक बिंदु के भारतीय पक्ष में कोर कमांडर स्तर की वार्ता के 15वें दौर का आयोजन करने का निर्णय लिया है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से यह जानकारी सामने आई है। ...
अधिकारियों ने बताया कि सोनामर्ग-बालटाल रोड पर इस बार 4 से 6 फीट बर्फ है और जोजिला पर यह 8 से 10 फुट है। यही कारण था कि इस बार अधिकारियों को इसे जल्द चालू करने की उम्मीद बंधी है। ...
न्योमा (लद्दाख) की ब्लॉक डेवलपमेंट चेयरपर्सन यूर्गेन चोडोन ने अपने ट्विचर हैंडल पर इससे संबंधित एक वीडियो भी साझा किया है। उन्होंने दावा किया कि 28 जनवरी को चीनी सैनिक भारतीय सीमा में घुसे थे ...
बीजेपी की पूर्व पार्षद चोडोन सिंधु नदी की एक सहायक नदी सेंगे जंगबू के तट पर स्थित गांव 'कोयल' में रहती हैं। उनका गांव भारत और चीन के बीच लद्दाख के हिमालयी क्षेत्र को विभाजित करता है। ...
8 मीटर चौड़ा पुल, पैंगोंग के उत्तरी तट पर एक चीनी सेना के फील्ड बेस के ठीक दक्षिण में स्थित है, जहां 2020 में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच गतिरोध के दौरान चीनी क्षेत्र के अस्पतालों और सैनिकों के आवास देखे गए थे। ...
जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच हुई हिंसक झड़प को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। ऑस्ट्रेलियाई अखबार 'द क्लैक्सन' की रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें चीन को हुए बड़े नुकसान को लेकर दावा किया गया है। ...
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 'भारत सरकार की विदेश नीति की वजह से चीन-पाकिस्तान करीब आ रहे हैं' वाले बयान पर गुरुवार को अमेरिका का रुख सामने आया। इस मामले पर बात करते हुए अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस का बयान सामने आया है। ...