झारखंड भारत का एक राज्य है। जो कि 15 नवम्बर 2000 में बिहार से अलग होने के बाद अस्तित्व में आया। इसकी राजधानी रॉंची है। इसके पड़ोसी राज्य बिहार, पश्चिम बंगाल और ओड़िशा है। झारखंड भारत में वनों के अनुपात में अग्रणी राज्य माना जाता है। झारखंड खनिज संपदा से भरा हुआ प्रदेश है। झारखंड के धनबाद जिले को कोयला की राजधानी कहा जाता है। झारखंड में 24 जिले हैं। औद्योगिक शहरों में धनबाद, बोकारो और जमशेदपुर है। झारखंड में 14 लोकसभा सीट और 81 विधानसभा सीट है। Read More
झारखंडः मंत्रियों की संख्या और विभागों को लेकर भी बातें फाइनल हो चुकी हैं. बताया जाता है कि कांग्रेस को मंत्रियों के तीन पद और मिल सकते हैं. इसके साथ कांग्रेस के पांच मंत्री हो जाएंगे. ...
नड्डा ने घटना की निंदा करते हुए सात निर्दोष लोगों के अपहरण और हत्या पर “गहरा दुख” व्यक्त किया। समिति के सदस्यों में जसवंतसिंह भाभोर, समीर उरांव, भारती पवार, गोमती साईं और जॉन बारला शामिल हैं, जो अलग-अलग राज्यों के आदिवासी सांसद हैं। ...
झारखंड सरकार द्वारा पत्थलगड़ी के मामलों में दर्ज मुकदमों को वापस लेने की घोषणा से कुछ पत्थलगड़ी समर्थकों का दुस्साहस बढ़ा है. इसीका नतीजा है पश्चिम सिंहभूम जिले के गुदड़ी में गत रविवार को पत्थलगड़ी समर्थकों के द्वारा पत्थलगड़ी का विरोध करने वाले गुली ...
भारतीय संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत आदिवासी संस्कृति, भाषा, जीवनशैली व उनके अधिकारों को राज्यपाल की निगरानी में संवैधानिक संरक्षण दिया गया है. इसमें रूढ़ि प्रथा एवं ग्राम सभा को परिभाषित किया गया. ...
रांची में बताया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नयी दिल्ली से जारी बयान में कहा, ‘‘इस घटना से मैं आहत हूँ।’’ मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून सबसे ऊपर है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। राज्य की पुलिस जांच कर रही है। ...
यह पहली बार देखने को मिल रहा है जब इस क्षेत्र की महिलाएं अपने घर परिवार के लोगों को आंदोलन से जोड़ते हुए प्रदर्शन को आगे बढ़ा रही है। नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के खिलाफ यह महिलाएं पिछले दो सप्ताह से अधिक समय से ...
आरोप है कि पत्थलगड़ी आंदोलन के समर्थकों ने पत्थलगड़ी का विरोध करने पर पर इनलोगों का अपहरण किया और बाद में जंगल ले जाकर इनकी बेरहमी से हत्या कर दी। मृतकों में उपमुखिया और अन्य छह ग्रामीण शामिल हैं। ...
इससे पहले भी वर्ष 2000 में नये राज्य के गठन के बाद 2014 तक पिछले कई वर्षों में 23 जनवरी को नेताजी की जयंती पर सार्वजनिक अवकाश दिया जाता रहा है। हालांकि, वर्ष 2015 से 2019 तक 23 जनवरी के दिन मिलने वाली छुट्टी बन्द हो गयी थी। ...