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शरद पूर्णिमा की रात से जुड़े हैं ये 8 विश्वास, हर किसी को जानना चाहिए

By गुलनीत कौर | Updated: October 24, 2018 14:03 IST

मान्यता है कि चंद्रलोक पितरों का निवास स्थान होता है। नवरात्रि से ठेके पहले श्राद्ध पक्ष में पितर धरती पर आते हैं और शरद पूर्णिमा की रात वापस लौट जाते हैं

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हर महीने की पूर्णिमा का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व है। लेकिन शरद पूर्णिमा को अत्यधिक महत्वपूर्ण माना गया है। शरद पूर्णिमा की रात कई धार्मिक एवं शास्त्रीय कार्य किए जाते हैं, जिनसे विभिन्न मान्यताएं जुड़ी हैं। आइए आपको बताते हैं 8 धार्मिक और सामाजिक विशवास जो इस पूर्ण चांद की रात से जुड़े हैं।

1. चांद की रोशनी में सुई-धागा

मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात चांद की रोशनी में सुई में 100 बार धागा डालने से व्यक्ति की आंखों की रोशनी बढ़ जाती है

2. जवान बनाती है ये रात

कहते हैं कि शरद पूर्णिमा की रात रावण एक विशेष साधना करता था जिससे वह हमेशा जवान रहता था। इस साधना के लिए वह पूर्णिमा की रात की रोशनी का अप्रयोग करता था

3. शरद पूर्णिमा की खीर

शरद महीने की पूर्णिमा की रात को खीर बनाकर उसे चांद की रोशनी में रखनी की प्रथा प्रचलित है। इसके पीछे मान्यता है कि चांद की रोशनी से खीर अमृत हो जाती है और इसके सेवन से सेहत अच्छी होती है

4. लक्ष्मी पूजन

एक पौराणिक कथा के मुताबिक शरद पूर्णिमा की रात ही पहली बार धन की देवी लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। इसलिए इस रात मां लक्ष्मी की पूजा करने का भी महत्व है

5. चांदनी रात का प्रभाव

कहते हैं कि शरद पूर्णिमा की रात चांद पृथ्वी के काफी करीब होता है। उसके असर से हवा में शीतलता आती है। इस रात के चांद की रोशनी और वातावरण की हवा से स्वास्थ्य अच्छा रहता है

6. धार्मिक अनुष्ठान का प्रारंभ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा के बाद से वर्षा ऋतु की समाप्ति होती है। और प्रारंभ होता है धार्मिक अनुष्ठानों को मनाने का

7. धरती पर आए पितर वापस जाते हैं

मान्यता है कि चंद्रलोक पितरों का निवास स्थान होता है। नवरात्रि से ठेके पहले श्राद्ध पक्ष में पितर धरती पर आते हैं और शरद पूर्णिमा की रात वापस लौट जाते हैं

ये भी पढ़ें: शरद पूर्णिमा के दिन राशि के अनुसार इन चीजों को करें दान, घर में आएगी लक्ष्मी

8. साधकों की रात शरद पूर्णिमा

शरद पूर्णिमा की रात साधक विभिन्न साधनाएं करते हैं। ये साधनाएं धार्मिक मान्यताओं के अलावा तंत्र विद्या से भी जुड़ी होती हैं। क्योंकि इस रात वातावरण में खास ऊर्जा का प्रवाह होता है, जिसे साधकों द्वारा उपयोग में लाया जाता है

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