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आखिर क्यों दिल्ली के मंत्री ने ‘जातिवादी प्रश्न’ को लेकर डीएसएसएसबी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की ?

By भाषा | Updated: October 14, 2018 23:45 IST

दिल्ली के मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती के लिए हुई एक परीक्षा में ‘जातीय और नारीद्वेषी प्रश्न’ पूछे जाने पर दिल्ली अधीनस्थ सेवाएं चयन बोर्ड (डीएसएसएसबी) के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

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दिल्ली के मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती के लिए हुई एक परीक्षा में ‘जातीय और नारीद्वेषी प्रश्न’ पूछे जाने पर दिल्ली अधीनस्थ सेवाएं चयन बोर्ड (डीएसएसएसबी) के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

रविवार को एक बयान में दिल्ली के अनुसूचित जाति/जनजाति मंत्री ने इस मुद्दे पर गंभीर चिंता प्रकट की और कहा कि वह मुख्य सचिव अंशु प्रकाश से डीएसएसएसबी के खिलाफ उपयुक्त कार्रवाई करने को कहेंगे।यह परीक्षा शनिवार को हुई थी।

मंत्री ने आरोप लगाया, ‘‘कथित प्रश्न कल हुई परीक्षा के हिंदी खंड में पूछा गया था। उसमें ब्राह्मणवादी समाज की जाति आधारित व्यवस्था को इंगित करते हुए चार विकल्प थे। यह बहुविकल्पीय प्रश्न था और उत्तर बहुत ही जातिवादी एवं लैंगिक असंवेदनशील तरह के थे।’’ 

बयान के अनुसार, मंत्री ने कहा कि उपराज्यपाल के तहत आने वाला सेवा विभाग डीएसएसएसबी का शासी निकाय है।उन्होंने कहा कि विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि किस वजह से उन्होंने ऐसा ‘‘घटिया’’ सवाल शामिल किया।

बयान में कहा गया है, ‘‘महिलाओं का घोर अपमान करने के साथ समुदाय की भावनाओं को स्पष्ट रूप से आहत करने वाला जाति-आधारित सवाल शामिल करना डीएसएसएसबी का संचालन कर रहे लोगों की मानसिक स्थिति को दर्शाता है।’’ मंत्री ने कहा कि वह इस मुद्दे की अंतरिम जांच की मांग करने के लिए सोमवार को मुख्य सचिव से बात करेंगे।

डीएसएसएसबी ने एक बयान में कहा कि ‘‘असावधानी से हुई गलती’’ के कारण यह ‘‘जातिवादी’’ प्रश्न पूछा गया।

बयान में कहा गया है, ‘‘यह स्पष्ट किया जाता है कि प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया अत्यधिक गोपनीय होती है और प्रश्नपत्र की सामग्री बोर्ड के अधिकारियों के साथ साझा नहीं की जाती। प्रश्नपत्र पहली बार केवल अभ्यर्थियों के समक्ष ही आता है।’’ 

इसमें कहा गया है कि समाज के किसी भी वर्ग की भावनाओं को अनजाने में आहत करने वाला ऐसा कोई भी सवाल अत्यंत खेदजनक है।डीएसएसएसबी ने कहा कि मूल्यांकन प्रक्रिया के दौरान इस सवाल का मूल्यांकन नहीं किया जाएगा। उसने कहा, ‘‘बोर्ड प्रश्नपत्र बनाने वालों को और अधिक संवेदनशील बनाने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठा रहा है और यह सुनिश्चित करने के लिए उचित कदम उठाया जा रहा है कि भविष्य में फिर ऐसी घटना ना हो।

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