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ओलंपिक में मुक्केबाजी को बनाये रखने के लिये एआईबीए बना आईबीए, संविधान में किये संशोधन

By भाषा | Updated: December 13, 2021 18:05 IST

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नयी दिल्ली, 13 दिसंबर ओलंपिक में मुक्केबाजी के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिये अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी संघ ने अपनी विशेष आभासी कांग्रेस में स्वतंत्र समूह द्वारा सुझाये गये कई महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधनों को मंजूरी देने के साथ ही आलोचनाओं के घेरे में रहे अपने रेफरी और जजों को फिर से प्रमाणित करने की प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की।

मुक्केबाजी खेल पेरिस ओलंपिक 2024 में बना रहेगा लेकिन इसे लास एंजिल्स खेल 2028 के प्रारंभिक खेलों की सूची में नहीं रखा गया है। इस खेल का भविष्य सुशासन पर निर्भर है जैसा कि अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) चाहती है।

अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी संघ को पहले एआईबीए कहा जाता था लेकिन अब इसे छोटे रूप में आईबीए कहा जाएगा।

आईबीए कांग्रेस के संवैधानिक सुधारों को मंजूरी देने से पहले आईबीए ने प्रोफेसर उलरिच हास के नेतृत्व वाले स्वतंत्र शासन सुधार समूह (जीआरजी) की एक रिपोर्ट में की गयी सिफारिशों को सर्वसम्मति से स्वीकार किया था।

आईबीए अध्यक्ष उमर क्रेमलेव ने सोमवार को वैश्विक मीडिया के साथ वर्चुअल संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘मुझे इस पद पर ठीक एक साल हो गया है। हमने एक स्थिर भविष्य के लिये तैयारियां की हैं। हम नयी ऊंचाइयों पर पहुंचने के लिए तैयार हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘आओ मुक्केबाजी के नये युग की शुरुआत करें। हमने एक नया अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी संघ बनाने के लिए अपने समृद्ध इतिहास से सर्वश्रेष्ठ अवयवों को लिया है। हम पुराने मूल्यों के साथ नये तरीके से काम करेंगे।’’

क्रेमलेव ने कहा, ‘‘कांग्रेस ने सभी सिफारिशों को मंजूरी प्रदान कर दी है। जब 30 जून 2022 को चुनाव होंगे तो हम नये चेहरे देखेंगे।’’

आईओसी ने 2019 में मुक्केबाजी संघ को निलंबित कर दिया था। उसने कार्यबल के जरिये तोक्यो ओलंपिक में मुक्केबाजी प्रतियोगिता का आयोजन किया था। उसने एआईबीए के शासन, वित्त, रेफरी और जज प्रणाली पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी।

क्रेमलेव ने जज और रेफरी प्रणाली में सुधार की अपनी प्रतिबद्धता फिर से दोहरायी और कहा कि रियो ओलंपिक 2016 के दौरान जिन अधिकारियों को हेराफेरी करने का दोषी पाया गया उन पर पूर्ण प्रतिबंध लगेगा और यहां तक कि दर्शकों के रूप में भी उनका स्वागत नहीं किया जाएगा।

उन्होंने इसके साथ ही कहा कि आईबीए की वित्तीय स्थिरता आईओसी के लिये प्रमुख मुद्दा रहा है जिसे काफी हद तक सुलझा दिया गया है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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