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कश्मीर में सबसे बड़ा सवाल: क्या पहलगाम नरसंहार से पर्यटन को हुई क्षति की भरपाई कर पाएगी कश्मीर के लिए सीधी ट्रेन?

By सुरेश एस डुग्गर | Updated: June 9, 2025 19:07 IST

श्रीनगर के एक होटल व्यवसायी अफजल जाफरी का कहना है कि हमारे लिए, ट्रेन सिर्फ परिवहन से कहीं ज्यादा है - यह एक उम्मीद है। यह हमें भारत के हृदय स्थल से फिर से जोड़ती है, खासकर पहलगाम हमले से हुए नुकसान के बाद।

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जम्मू: एक इतिहास बनाते हुए देश से कश्मीर के लिए सीधी रेल की शुरूआत हो चुकी है और इसके साथ ही एक सबसे बड़ा सवाल मुहं बाए खड़ा है कि क्या यह रेल कश्मीर के पर्यटन व्यवसाय को पहलगाम नरसंहार के कारण हुई क्षति की भरपाई कर पाएगी। फिलहाल गारंटी वाला जवाब किसी के पास नहीं है सिवाय इसके कि यह जम्मू-श्रीनगर हाईवे की दुश्वारियों से निजात जरूर दिलाएगी।

पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के कुछ ही सप्ताह बाद, जिसमें 26 नागरिक मारे गए थे और कश्मीर के पर्यटन क्षेत्र में हलचल मच गई थी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 जून को कश्मीर के लिए पहली सीधी ट्रेन को हरी झंडी दिखाई - जिससे कई लोगों को उम्मीद है कि यह क्षेत्र की यात्रा और अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा। हालांकि नई शुरू की गई ट्रेन को संभावित गेम चेंजर के रूप में देखा जा रहा है। 

यह प्रमुख शहरों से किफायती और भरोसेमंद यात्रा विकल्प प्रदान करती है - खासकर मध्यम वर्ग के परिवारों और गुजरात, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल पंजाब और दिल्ली जैसे राज्यों से आने वाले समूह पर्यटकों के लिए, जिन्हें पहले हवाई यात्रा बहुत महंगी लगती थी। श्रीनगर के एक होटल व्यवसायी अफजल जाफरी का कहना है कि हमारे लिए, ट्रेन सिर्फ परिवहन से कहीं ज्यादा है - यह एक उम्मीद है। यह हमें भारत के हृदय स्थल से फिर से जोड़ती है, खासकर पहलगाम हमले से हुए नुकसान के बाद।

वैसे यह सच है कि उधमपुर-श्रीनगर-बारामुल्ला रेलवे लाइन में लंबे समय से प्रतीक्षित मील के पत्थर ने पर्यटन हितधारकों में नई आशा जगाई है, जो इस सीजन के दौरान बड़े पैमाने पर रद्दीकरण से त्रस्त थे, जिसे रिकार्ड तोड़ने वाला सीजन माना जा रहा था। 22 अप्रैल के हमले ने संभावित टूरिस्टों में दहशत पैदा कर दी, होटल और टूर आपरेटरों ने कुछ ही दिनों में 90 परसंट तक रद्दीकरण की सूचना दी। कई लोगों को डर था कि पिछले अशांति के दौर की याद दिलाने वाली मंदी फिर से लौट आएगी।

पर्यटन विभाग के अधिकारी इस बात से सहमत हैं कि रेलवे अनिश्चितता के समय में भी पर्यटकों के प्रवाह को बनाए रखने में मदद कर सकता है। एक पर्यटन अधिकारी का कहना था कि लोग ट्रेनों को अधिक सुरक्षित और अधिक सुसंगत मानते हैं। यह लंबे समय में पर्यटन को स्थिर कर सकता है, भले ही सुरक्षा स्थिति में उतार-चढ़ाव हो। जबकि सुरक्षा विशेषज्ञों का मत था कि ट्रेन से आने वाले अधिक पर्यटकों का मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी आतंकी बयानों का मुकाबला कर सकता है। ऐसे में एक पुलिस अधिकारी कहते थे कि आतंकवाद का उद्देश्य कश्मीर को अलग-थलग करना है। श्रीनगर के लिए भरी हुई ट्रेन इसका सबसे अच्छा जवाब है।

श्रीनगर स्थित ट्रैवल एजेंट अतहर सोफी कहते थे कि मोदी जी द्वारा कश्मीर के लिए सीधी ट्रेन की शुरुआत इससे बेहतर समय पर नहीं हो सकती थी। पहलगाम की घटना के बाद, कई पर्यटक राष्ट्रीय राजमार्ग से यात्रा करने से डर रहे थे। सीधी ट्रेन सुरक्षित और अधिक सुलभ लगती है।

इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि पर्यटन कश्मीर की आर्थिक जीवनरेखाओं में से एक है, जो हजारों लोगों को रोजगार देती है - हाउसबोट मालिकों और टट्टू-वालों से लेकर हस्तशिल्प विक्रेताओं और टूर गाइड तक। गर्मियों के मौसम के चरम पर पहुंचने के साथ, रेलवे के शुभारंभ से पहले से ही सुधार के संकेत मिल रहे हैं। हितधारकों ने 6 जून के उद्घाटन के बाद से पूछताछ और बुकिंग की नई लहर की रिपोर्ट की है।

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