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तमिलनाडु: CM स्टालिन ने कहा- राज्यपाल अपना संवैधानिक कर्तव्य निभा पाने में विफल रहे, NEET विधेयक राष्ट्रपति के पास भेजना चाहिए था

By विशाल कुमार | Updated: February 5, 2022 12:47 IST

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने कहा कि जस्टिस एके राजन की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों के आधार पर आठ करोड़ लोगों की भावनाओं को प्रतिबिंबित करने के लिए विधेयक को विधानसभा में अपनाया गया था। राज्यपाल ने इसे राष्ट्रपति की सहमति के लिए भेजने की जहमत नहीं उठाई।

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ठळक मुद्देएमके स्टालिन चेराज्य सरकार द्वारा बुलाई गई एक सर्वदलीय बैठक को संबोधित कर रहे थे।स्टालिन ने कहा कि राज्यपाल ने 142 दिनों तक विधेयक को धूल खाने के लिए रखा था।राज्यपाल ने तर्क दिया है कि यह विधेयक ग्रामीण और आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों के हितों के खिलाफ है।

चेन्नई:तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने शनिवार को आरोप लगाया कि जब राज्य में नीट को खत्म करने की मांग करने वाले विधेयक की बात आई तो राज्यपाल आरएन रवि अपने उस कर्तव्य को निभा पाने में विफल रहे जो संविधान ने उन्हें सौंपी है।

चेन्नई में सचिवालय में राज्य सरकार द्वारा बुलाई गई एक सर्वदलीय बैठक को संबोधित करते हुए स्टालिन ने कहा कि राज्यपाल ने सरकार को वापस करने से पहले 142 दिनों तक विधेयक को धूल खाने के लिए रखा था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जस्टिस एके राजन की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों के आधार पर आठ करोड़ लोगों की भावनाओं को प्रतिबिंबित करने के लिए विधेयक को विधानसभा में अपनाया गया था। राज्यपाल ने इसे राष्ट्रपति की सहमति के लिए भेजने की जहमत नहीं उठाई।

स्टालिन ने कहा कि यह डीएमके सरकार का रुख था कि उच्च शिक्षा के लिए कोई प्रवेश परीक्षा नहीं होनी चाहिए और अतीत में डीएमके सरकार ने कॉलेज में व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा को समाप्त कर दिया था।

उन्होंने कहा कि 2006 में जब डीएमके सरकार ने प्रवेश परीक्षा को समाप्त करने के लिए एक विधेयक पारित किया, तो राज्यपाल और राष्ट्रपति ने 87 दिनों में इसे अपनी मंजूरी दे दी थी।

गौरतलब है कि तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि ने राज्य को राष्ट्रीय प्रवेश सह पात्रता परीक्षा (नीट) से छूट देने के प्रावधान वाला विधेयक राज्य सरकार को लौटा दिया है। 

राजभवन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि राज्यपाल ने विधेयक और इस संबंध में राज्य सरकार द्वारा गठित एक उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट विधानसभा अध्यक्ष एम. अप्पावु को लौटा दी है। उन्होंने तर्क दिया है कि यह विधेयक ग्रामीण और आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों के हितों के खिलाफ है।

स्टालिन की अध्यक्षता में तमिलनाडु में पिछले महीने हुई एक सर्वदलीय बैठक में फैसला लिया गया था कि नीट के खिलाफ साझा कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी। 

तमिलनाडु में नीट के विरोध को भावनात्मक समर्थन भी मिल रहा है, क्योंकि परीक्षा में कम अंक हासिल करने या फेल होने की आशंकाओं को लेकर राज्य में चिकित्सा पाठ्यक्रमों में दाखिले के इच्छुक कई छात्र कथित तौर पर आत्महत्या कर चुके हैं। 

राज्य में नीट को रद्द करने की तेज होती मांग के बीच पूर्ववर्ती एआईएडीएमके सरकार ने तमिलनाडु को नीट के दायरे से बाहर रखने के लिए विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित किया था। 

मई 2021 में सत्ता में आने वाली डीएमके ने भी चुनाव प्रचार में नीट से छूट दिलाने का वादा किया। भाजपा को छोड़कर तमिलनाडु में सारे राजनीतिक दल नीट के खिलाफ हैं।

टॅग्स :नीटतमिलनाडुएमके स्टालिनBJP
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