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Quota Stir: मराठा आरक्षण की मांग पर संगठन ने ठाणे में बंद का किया ऐलान, सीएम शिंदे ने आज बुलाई सर्वदलीय बैठक

By अंजली चौहान | Updated: September 11, 2023 10:02 IST

महाराष्ट्र के जालना जिले में मराठों के लिए आरक्षण की मांग को लेकर एक विरोध प्रदर्शन पिछले हफ्ते हिंसक हो गया और पुलिसकर्मियों सहित कई लोग घायल हो गए।

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ठळक मुद्देमहाराष्ट्र में सीएम शिंदे ने बुलाई सर्वदलीय बैठक मराठा आंदोलन के कारण ठाणे में बंद का ऐलान

Quota Stir: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मराठा और ओबीसी आमने-सामने आ गए हैं। मराठवाड़ा क्षेत्र के साथ-साथ राज्य के अन्य हिस्सों में मराठा आरक्षण का मुद्दा गहराता ही जा रहा है।

मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए सीएम एकनाश शिंदे ने सोमवार को सभी दलों की सर्वदलीय बैठक बुलाई है। जानकारी के मुताबिक, बैठक 'सह्याद्री गेस्ट हाउस' में होगी। 

दूसरी ओर, पिछले हफ्ते जालना में आंदोलनकारियों के खिलाफ पुलिस लाठीचार्ज की निंदा करने के लिए सोमवार को महाराष्ट्र के ठाणे शहर में एक मराठा संगठन ने बंद बुलाया है। राज्य में विपक्षी दलों के स्थानीय नेताओं ने संभाजी ब्रिगेड समर्थित सकल मराठा मोर्चा द्वारा बुलाए गए बंद को समर्थन देने की घोषणा की है।

ऐसे में मराठा समुदाय के बंद को देखते हुए पूरे शहर में पुलिसबलों की तैनाती की गई है। पुलिस तैनाती को लेकर पुलिस अधिकारी सुबह से ही स्थिति का आकलन कर रहे हैं। पुलिस ने कहा है कि चूंकि शांतिपूर्ण बंद का आह्वान किया गया है, इसलिए उन्होंने सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक तैयारियां कर ली हैं। 

हिसंक हो गया आंदोलन

जानकारी के अनुसार, 1 सितंबर को जालना जिले के अंतरवाली सारथी गांव में मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की मांग को लेकर एक आंदोलन हिंसक हो गया था, जिसमें दर्जनों पुलिस कर्मियों सहित कई लोग घायल हो गए थे।

अधिकारियों के अनुसार, पुलिस ने जालना में धुले-सोलापुर रोड पर अंतरवाली सारथी में प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े, क्योंकि उन्होंने कथित तौर पर अधिकारियों को मराठा आरक्षण के लिए भूख हड़ताल पर बैठे एक व्यक्ति को अस्पताल ले जाने से मना कर दिया था।

पुलिस ने बताया कि आंदोलन हिंसक हो गया क्योंकि कुछ लोगों ने राज्य परिवहन की बसों और निजी वाहनों को निशाना बनाया। हालांकि ग्रामीणों का दावा है कि पुलिस ने हवा में कुछ राउंड फायरिंग की, लेकिन अधिकारियों ने इसकी पुष्टि नहीं की।

मराठा कोटा कार्यकर्ता मनोज जारांगे कुनबी दर्जे की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर हैं, जिसका प्रभावी अर्थ सभी मराठों के लिए ओबीसी कोटा है।

राज्य सरकार और जारांगे के बीच अब तक कई दौर की बातचीत बेनतीजा रही है। मराठा संगठन तब से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर राज्य के विभिन्न हिस्सों में आंदोलन कर रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?

गौरतलब है कि 2018 में, महाराष्ट्र में देवेंद्र फड़नवीस के नेतृत्व वाली सरकार ने नौकरियों और उच्च शिक्षा में मराठा समुदाय को आरक्षण दिया था, हालांकि, कोटा पर महाराष्ट्र सरकार के फैसले को मई 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया था।

मई 2021 में सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की बेंच ने कहा कि मराठा समुदाय सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा नहीं है। इसने अप्रैल 2023 में एक समीक्षा याचिका भी खारिज कर दी, जिसमें कहा गया था कि कोटा देने वाला कानून असंवैधानिक था। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने कहा कि मराठा समुदाय को आरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि उनकी सरकार इस समुदाय को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध है। शिंदे ने यह भी कहा कि उनके और राज्य के दो उपमुख्यमंत्रियों के बीच कोई गलतफहमी नहीं है और वे सभी एक अच्छी टीम के रूप में काम कर रहे हैं। 

सीएम शिंदे कहा कि मेरी सरकार राज्य में मराठा समुदाय को आरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध है। हम तब तक चुप नहीं बैठेंगे जब तक समुदाय को उचित आरक्षण नहीं मिल जाता।

जब तक मराठा समुदाय को आरक्षण नहीं मिल जाता, तब तक पहले से मौजूद सरकारी योजनाएं जारी रहेंगी और मराठा समुदाय के योग्य लोगों को इसका लाभ मिलेगा।

टॅग्स :मराठा आरक्षण आंदोलनएकनाथ शिंदेमहाराष्ट्रमुंबई
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