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'बिहार और बंगाल के कुछ हिस्सों को काटकर एक अलग राज्य बनाया जाएगा': राजद विधायक रणविजय साहू ने किया दावा

By एस पी सिन्हा | Updated: March 1, 2026 16:54 IST

रणविजय साहू के दावे के बाद प्रदेश में सियासी तूफान आ गया है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि बिहार के तीन जिले और पश्चिम बंगाल के तीन जिले जिलों को काटकर नया प्रदेश बनाया जा सकता है।

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पटना: राजद विधायक रणविजय साहू के द्वारा यह दावा किए जाने पर कि बिहार के सीमांचल और बंगाल के कुछ हिस्सों को काटकर एक नया अलग राज्य बनाया जाएगा, सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। दरअसल, पिछले दिनों केंद्रीय गृह मंत्री अमित बिहार के सीमांचल के जिलों किशनगंज, अररिया और पूर्णिया जिले के तीन दिवसीय दौरे पर आए हुए थे। इस दौरान उन्होंने जिले के अधिकारियों के साथ कई मसलों पर समीक्षा बैठक की थी। लेकिन उनके दिल्ली लौटते ही रणविजय साहू ने दावा किया कि अमित शाह के द्वारा बिहार के सीमांचल और बंगाल के कुछ हिस्सों को काट कर एक नया राज्य बनाने की तैयारी की जा रही है।

ऐसे में रणविजय साहू के दावे के बाद प्रदेश में सियासी तूफान आ गया है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि बिहार के तीन जिले और पश्चिम बंगाल के तीन जिले जिलों को काटकर नया प्रदेश बनाया जा सकता है। इनमें पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर और दार्जिलिंग जिले शामिल हैं। वहीं बिहार के किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार जिलों को काटा जा सकता है। इन 6 जिलों में मुस्लिम आबादी ज्यादा है। रणविजय साहू का आरोप है कि बंगाल से ममता बनर्जी और बिहार से राष्ट्रीय जनता दल का वोट बैंक काटने की साजिश रची जा रही है। 

किशनगंज जिले में करीब 68 फीसदी मुस्लिम आबादी है। वहीं पूर्णिया जिले में मुस्लिमों की आबादी 38.46 फीसदी है। कटिहार जिले में भी मुस्लिम करीब 31.43 फीसदी है। इसी तरह पश्चिम बंगाल के दक्षिण दिनाजपुर जिले में हिंदू आबादी करीब 73.55 फीसदी है। जबकि दार्जिलिंग जिले में भी हिंदुओं की संख्या अधिक है। 

वहीं उत्तर दिनाजपुर जिले में मुस्लिम और हिंदू दोनों की संख्या करीब-करीब बराबर है। बिहार के सीमांचल जिलों किशनगंज, पूर्णिया और अररिया में पसमांदा मुस्लिम आबादी अधिक है। माना जाता है कि पसमांदा समाज जदयू को वोट करता है। पिछले साल हुए बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की प्रचंड जीत से साबित हो गया कि मुस्लिम समुदाय ने एनडीए का भरपूर साथ दिया है। 

विधानसभा चुनाव परिणाम से साबित होता है कि असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम के भी मैदान में होने के बावजूद बिहार के मुसलमानों ने नीतीश कुमार और उनकी सहयोगी भाजपा का समर्थन किया था। लेकिन सियासी गलियारे में अब यह सवाल उठाए जा रहे हैं किया मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी पार्टी राज्य के हिस्से को कटने का समर्थन करेगी? क्या ममता बनर्जी अपने राज्य के जिलों को कटने देंगी? मामला चाहे जो भी हो, लेकिन सियासी गलियारे में यह चर्चा का विषय बन गया है।

टॅग्स :बिहारआरजेडी
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