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अब A फॉर ‘एप्पल’, B से ‘बॉल’ नहीं बल्कि… यूपी के इस कॉलेज में पढ़ाया जा रहा ABCD का नया मतलब

By आजाद खान | Updated: November 6, 2022 15:34 IST

कॉलेज में इस तरह की शिक्षा देने पर जब प्रिंसिपल से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि हमारे बच्चों में भारतीय संस्कृति की पकड़ बहुत कमजोर है। ऐसे में इस तरह की शिक्षा से उनके बीच जागरूकता पैदा करने की कोशिश की जा रही है।

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ठळक मुद्देयूपी के अमीनाबाद इंटर कॉलेज में ABCD अलग ही अंदाज में पढ़ाया जा रहा है। यहां पर ‘A’ से ‘एप्पल’ के स्थान पर ‘A’ से ‘अर्जुन’, ‘B’ से ‘बॉल’ नहीं, ‘B’ से ‘बलराम’ बढ़ाया जा रहा है। कॉलेज के प्रिंसिपल की माने तो इस तरह की शिक्षा से छात्रों में भारतीय संस्कृति की पकड़ मजबूत होगी।

लखनऊ: लखनऊ के अमीनाबाद इंटर कॉलेज में बच्चों को ‘A’ से ‘एप्पल’ नहीं, बल्कि ‘A’ से ‘अर्जुन’ पढ़ाया जा रहा है। इस तरह की शिक्षा देने पर जब स्कूल के प्रिंसिपल ने पूछा गया तो उन्होंने बताया कि इस तरह की शिक्षा के पीछे बच्चों के अंदर पौराणिक और एतिहासिक ज्ञान को विकसित करने का मकसद है। 

प्रिंसिपल के अनुसार, केवल अक्षर ही नहीं बल्कि उसके बारे में फोटो और उसके संबंध में एक लाइन भी लिखी हुई है। ऐसे में कॉलेज के इस तरीके के पढ़ाने का ढंग सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। 

क्या है पूरा मामला

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, लखनऊ के अमीनाबाद में 125 साल पुराना अमीनाबाद इंटर कॉलेज में बच्चों को पौराणिक और एतिहासिक ज्ञान दिया जा रहा है। उन्हें ‘A’ से ‘एप्पल’ और  ‘B’ से ‘बॉल’ नहीं बल्कि ‘A’ से ‘अर्जुन’, ‘B’ से ‘बलराम’ और ‘C’ से ‘चाणक्य’ पढ़ाया जा रहा है।

अंग्रेजी वर्णमाला के केवल कुछ अक्षरों पर नहीं बल्कि सभी अक्षरों पर एतिहासिक और पौराणिक महापुरुषों के नाम लिखे हुए है। इस बारे में जब अमीनाबाद इंटर कॉलेज, लखनऊ के प्रिंसिपल साहेब लाल मिश्रा से पूछा गया तो इसके पीछे का मकसद बताया है। 

मिश्रा जी के अनुसार, छात्रों में ऐसा देखा गया है कि भारतीय संस्कृति में उन्हें कम जाकारी है, ऐसे में इस तरह की शिक्षा से वे अपने संस्कृति को समझ और याद रख पाएंगे। 

छात्र चाहे तो अंग्रेजी वर्णमाला की पीडीएफ भी कर सकते है डाउनलोड

मामले में बोलते हुए प्रिंसिपल साहेब लाल मिश्रा ने कहा कि अंग्रेजी वर्णमाला की पीडीएफ भी सोशल मीडिया पर मौजूद है। ऐसे में अगर कोई छात्र चाहे तो उसे डाउनलोड कर सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि इन वर्णमाला के साथ फोटो भी दिए गए है साथ ही जिसके बारे में चर्चा हो रही है उसके संबंध में एक लाइन भी वहां लिखा हुआ है। 

क्या है कॉलेज का इतिहास

आपको बता दें कि यह कॉलेज 125 साल पुराना है। ऐसे में कॉलेज के गेट पर इसकी स्थापना का वर्ष 1887 लिखा हुआ है। इस कॉलेज की रखरखाव नगर निगम करती है। वहीं अगर कुछ मीडिया रिपोर्ट को माने तो इस कॉलेज में बड़े-बड़े नेता भी पहले दौरा कर चुके है। 

टॅग्स :उत्तर प्रदेशलखनऊएजुकेशन
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