भविष्य के लिए ये कैसी पौध तैयार कर रहे हैं हम ?

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: May 19, 2026 07:34 IST2026-05-19T07:33:54+5:302026-05-19T07:34:05+5:30

जिन छात्रों का गुनाह स्पष्ट हो जाए, उन्हें कैसी सजा देनी है, यह तो कानून के हिसाब से ही तय होगा लेकिन सजा मिलनी चाहिए, यह बहुत जरूरी है.

What kind of saplings are we preparing for the future | भविष्य के लिए ये कैसी पौध तैयार कर रहे हैं हम ?

भविष्य के लिए ये कैसी पौध तैयार कर रहे हैं हम ?

इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के रामानुजन हॉस्टल में अंतिम वर्ष के छात्रों ने जिस तरह का उत्पात मचाया वह अत्यंत शर्मनाक ही कहा जाएगा. कई घंटों तक नंगा नाच किया और हॉस्टल की खिड़कियों के कांच फोड़ दिए, कुर्सियां तोड़ दीं. यहां तक कि पीने के पानी की जो टंकी छत पर रखी थी, उसे भी तोड़ दिया. ये छात्र इंजनीयरिंग अंतिम वर्ष के हैं और पढ़ाई पूरी हो जाने के उपलक्ष्य में उन्होंने इस जश्न का आयोजन किया था और जश्न उत्पात में तब्दील हो गया. जब यह उत्पात चल रहा था तब कुछ लोगों ने हॉस्टल के वार्डन को इसकी सूचना दी थी लेकिन छात्रों के हंगामे को देखते हुए किसी की हिम्मत नहीं हुई कि वह उन्हें रोके.

हंगामा कर रहे छात्र नशे में चूर थे. शायद यह मामला दब जाता क्योंकि सबकुछ रात के अंधेरे में हुआ था लेकिन कुछ विद्यार्थियों ने ही इसके वीडियो वायरल कर दिए. इसके बाद विश्वविद्यालय हरकत में आया और अब कहा जा रहा है कि जिन छात्रों ने हंगामा किया है, उन्हें चिन्हित करके प्रत्येक उत्पाती से 25 हजार रुपए की राशि दंड के रूप में वसूली जाएगी. आशय यह है कि जो नुकसान छात्रों ने किया है, उसकी भरपाई दंड की इस राशि से की जाएगी मगर सवाल यह है कि विश्वविद्यालय की इज्जत के साथ जो खिलवाड़ हुआ है, उसकी भरपाई कैसे होगी? केवल दंड की राशि वसूलने से भविष्य के लिए कोई डर भी पैदा नहीं होगा.

जरूरत तो इस बात की है कि हंगामा करने वाले छात्रों को ऐसी कड़ी सजा दी जाए कि आने वाली पीढ़ियां उसे याद रखें. कोई भी छात्र हंगामा करने से पहले सौ बार सोचे कि यदि हंगामा किया तो भविष्य खराब हो जाएगा. छात्रों को केवल इसलिए माफ नहीं किया जा सकता कि उन्होंने  यह हरकत पहली बार की है! अपराध तो अपराध होता है, वह पहली बार किया जाए या फिर दसवीं बार किया जाए.

सरकार ने सख्त नियम बना दिए कि रैगिंग नहीं होगी लेकिन क्या इसका शतप्रतिशत पालन हो रहा है? इसी तरह के उपद्रवी छात्र नियमों को तार-तार करते हैं. इसलिए यह बहुत जरूरी है कि उन्हें दंडित किया जाए. जिन छात्रों का गुनाह स्पष्ट हो जाए, उन्हें कैसी सजा देनी है, यह तो कानून के हिसाब से ही तय होगा लेकिन सजा मिलनी चाहिए, यह बहुत जरूरी है.

और जो लोग विश्वविद्यालयों का संचालन कर रहे हैं, वहां वरिष्ठ पदों पर बैठे हैं, उन्हें इस बात पर जरूर विचार करना चाहिए कि हम युवाओं की ये कैसी पौध तैयार कर रहे हैं. निश्चित रूप से उपद्रव करने वाले ये थोड़े से छात्र हमारे युवा  वर्ग का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं. इन्हें केवल उपद्रवी कहा जाना चाहिए. हमारे युवा वो हैं जो पढ़ने-लिखने में लगे हैं और विभिन्न क्षेत्रों में देश का नाम रौशन कर रहे हैं.

Web Title: What kind of saplings are we preparing for the future

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