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किसी 'तीसरे देश' में हो बातचीत, नागा समूह ने लीक की PM मोदी को लिखी चिट्ठी

By स्वाति सिंह | Updated: October 6, 2020 10:33 IST

NSCN(IM) के बयान के मुताबिक, सात महीने पहले,  संगठन के राष्ट्रीय महासचिव टी मुईवाह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था। हमने अब तक चिट्ठी को सार्वजनिक नहीं किया था क्योंकि हमें उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री मोदी सकारात्मक जवाब देंगे।

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ठळक मुद्देआईएम ने चीफ थूंगलेंग मुइवा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा था। इसमें सुझाव था कि दोनों पक्षों की बातचीत को किसी ‘तीसरे देश’ में किया जाए।

कोहिमा: सरकार के साथ शांति वार्ता कर रहे नेशनलिस्ट सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (आईएम) के चीफ थूंगलेंग मुइवा (NSCN-IM chief Th Muivah) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा था। इसमें सुझाव था कि दोनों पक्षों की बातचीत को किसी ‘तीसरे देश’ में किया जाए। उनका कहना है कि यदि "भारत में उसकी मौजूदगी का स्वागत नहीं है" तो विदेश में बातचीत की जानी चाहिए।

आठ पन्ने के "गोपनीय" पत्र में वार्ताकारों, नागालैंड के गवर्नर आरएन रवि और गृह मंत्रालय की कड़ी आलोचना करते हुए समूह ने अलग झंडे और संविधान की भी मांग की है। संगठन का कहना है कि पत्र पर प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, यह भी मांग थी कि बातचीत को सीधे तौर पर पीएम खुद करें। NSCN(IM) के बयान के मुताबिक, सात महीने पहले,  संगठन के राष्ट्रीय महासचिव टी मुईवाह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था। हमने अब तक चिट्ठी को सार्वजनिक नहीं किया था क्योंकि हमें उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री मोदी सकारात्मक जवाब देंगे। आज, NSCN (IM) ने नागा लोगों के प्रति जवाबदेह होने के कारण भारतीय प्रधानमंत्री के कार्यालय की ओर से जवाब नहीं मिलने और देरी होने के बारे में जानकारी देने के लिए पत्र जारी किया।"

टी मुईवाह ने चिट्ठी में लिखा था, "आज, हम आपके संज्ञान में गृह मंत्रालय (एमएचए) और उसकी एजेंसियों एनआईए और असम राइफल्स सहित अन्य की गतिविधियां लाना चाहते हैं, जो भी गंभीर चिंता का विषय है। जैसा की आप जानते हैं कि 22 साल से चल रही वार्ता शीर्ष स्तर से शुरू हुई थी। प्रधानमंत्री स्तर की वार्ता बिना किसी पूर्व शर्ष और भारत से बाहर किसी दूसरे देश में शुरू हुई थी। हम भारत सरकार के बुलावे पर भारत आए थे। हम पूरी तरह से हैरान और आश्चर्यचकित हैं कि दो दशक से अधिक की राजनीतिक वार्ता के बाद भी, गृह मंत्रालय और उसकी एजेंसियां का रुख निंदनीय है।"

 

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