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मोकामा विधानसभा सीटः जेल में अनंत सिंह, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने संभाली कमान, भूमिहार बनाम भूमिहार की लड़ाई?

By एस पी सिन्हा | Updated: November 3, 2025 16:41 IST

Mokama Assembly Seat: मोकामा में लड़ाई अनंत सिंह बनाम वीणा देवी की नहीं रही बल्कि अब लड़ाई ललन सिंह बनाम सूरजभान सिंह के बीच बदल गई है।

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ठळक मुद्देललन सिंह मोकामा पहुंचे और ऐलान किया कि आज से मैंने यहां की कमान संभाल ली है। 2025 के विधानसभा चुनाव में भूमिहार बनाम भूमिहार और बाहुबली बनाम बाहुबली की लड़ाई है।दुलारचंद हत्याकांड, अनंत सिंह को जेल और ललन सिंह की एंट्री से मोकामा की लड़ाई अब और दिलचस्प हो गई है।

पटनाः बिहार विधान चुनाव के बीच मोकामा विधानसभा क्षेत्र पर सियासत गर्मा गई है। दुलारचंद यादव की मौत के बाद पटना पुलिस ने अनंत सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। अनंत सिंह को 14 दिन के लिए न्यायिक हिरासत में बेऊर जेल भेज दिया गया है। अनंत सिंह के जेल जाते ही मोकामा में सियासी सरगर्मी सातवें आसमान पर पहुंच गया है। अनंत सिंह की गैरमौजूदगी में अब केंद्रीय मंत्री एवं जदयू के वरिष्ठ नेता ललन सिंह ने चुनावी कमान को संभाल लिया है। ललन सिंह आज मोकामा पहुंचे और उन्होंने ऐलान किया कि आज से मैंने यहां की कमान संभाल ली है।

उन्होंने कहा कि अनंत बाबू थे तो मेरी जिम्मेदारी कम थी, आज वो नहीं हैं तो मैंने आज से मोकामा चुनाव की कमान संभाल ली है। ललन सिंह ने जनता से अपील करते हुए कहा कि हम सभी का दायित्व है कि एक एक व्यक्ति अनंत सिंह बनकर चुनाव लड़े। उन्होंने जनता को आश्वस्त किया कि वे अब चुनावी मोर्चा खुद संभाल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कानून के राज का सम्मान करते हुए अनंत बाबू आज यहां नहीं हैं। एक बात बता दें कि ये घटना अपने आप नहीं हुई है। यह घटना कराए जाने का षड्यंत्र रचा गया है। पुलिस जांच हो रही है इस जांच में सारे षड्यंत्र का खुलासा होगा। किसी को भी जारा सा भी मनोबल को नहीं गिराना है। ललन ने कहा कि सभी को अपना मनोबल ऊंचा रखकर इस षड्यंत्र का जवाब देना है।

उन लोगों को जिन लोगों ने इस षड्यंत्र को रचा है। ललन सिंह ने कहा कि पूरा बिहार मोदी नीतीश मय है। पूरे बिहार में मोदी नीतीश जय जय है और बिहार में एक बार फिर एनडीए की सरकार बनेगी। ललन सिंह ने दावा किया कि ये घटना अपने आप नहीं हुई है कई वीडियो सामने आई है जिसे देखते ही पता चल जा रहा कि यह पूरा षड्यंत्र रचा गया था।

इस बीच सियासत के जानकारों की मानें तो मोकामा चुनाव में ललन सिंह की एंट्री तेजस्वी यादव और राजद के लिए 440 वोल्ट के झटके से कम नहीं है। ललन सिंह का यह ऐलान ही विपक्षियों के लिए कड़ा संदेश है। जानकारों की मानें तो अब मोकामा में लड़ाई अनंत सिंह बनाम वीणा देवी की नहीं रही बल्कि अब लड़ाई ललन सिंह बनाम सूरजभान सिंह के बीच बदल गई है।

अनंत सिंह के जेल जाने के बाद माना जा रहा था कि मोकामा में अब जदयू की स्थिति कमजोर हो सकती है लेकिन ललन सिंह के कमान संभालते ही अनंत सिंह की स्थिति एक बार फिर मजबूत हो गई है। मोकामा में 2025 के विधानसभा चुनाव में भूमिहार बनाम भूमिहार और बाहुबली बनाम बाहुबली की लड़ाई है।

भूमिहारों के बड़े नेता माने जाने वाले अनंत सिंह और सूरजभान सिंह आमने सामने हैं। अनंत सिंह के खिलाफ सूरजभान सिंह की पत्नी दावा ठोक रही है। दोनों बाहुबलियों के मैदान में होने से मोकामा हॉट सीट तो बनी ही हुई थी, लेकिन अब दुलारचंद हत्याकांड, अनंत सिंह को जेल और ललन सिंह की एंट्री से मोकामा की लड़ाई अब और दिलचस्प हो गई है।

मोकामा में मतदान 6 नवंबर को होना है। चुनाव प्रचार का सिलसिला मंगलवार को शाम 5 बजे थम जाएगा। बता दें कि, 30 अक्टूबर को मोकामा के बसावन चक इलाके में अनंत सिंह और जन सुराज प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी के समर्थकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। दोनों काफिले आमने-सामने आ गए थे। शुरुआत में नारेबाजी और पथराव हुआ, फिर स्थिति बेकाबू हो गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हाथापाई के दौरान गोली चली और अफरातफरी में 75 वर्षीय दुलारचंद यादव पर एक थार गाड़ी चढ़ा दी गई, जिससे उनकी मौके पर मौत हो गई। इसी घटना के बाद पुलिस ने अनंत सिंह समेत कई लोगों के खिलाफ हत्या और आचार संहिता उल्लंघन के मामले दर्ज किए। इसी मामले में अनंत सिंह पर कार्रवाई की गई है।

कोर्ट ने अनंत सिंह को 14 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। उल्लेखनीय है कि, बिहार की राजनीति में जातिगत समीकरण बहुत महत्वपूर्ण हैं। कई राजनीतिक दल अक्सर भूमिहार मतदाताओं को संगठित करने के लिए अनंत सिंह जैसे प्रभावशाली नेताओं का उपयोग करते थे।

अनंत सिंह की छवि एक स्थानीय संरक्षक (गॉडफादर या दादा) की रही है, जो अपने समर्थकों के लिए खड़े होते थे। इस छवि ने उन्हें अपने समुदाय के बीच लोकप्रियता हासिल करने में मदद की। अनंत सिंह की छवि एक 'दबंग' और 'बाहुबली' नेता की रही है, जिन्हें उनके समर्थक 'छोटे सरकार' के नाम से जानते हैं।

राजनीतिक जानकारों की मानें तो इस घटनाक्रम ने मोकामा की लड़ाई दिलचस्प तो बनाई है लेकिन रिजल्ट अनंत सिंह के पक्ष में कर गई है। तेजस्वी यादव के लिए यह एक बड़ा झटका माना जा सकता है। अनंत सिंह जेल में रहते हुए निर्दलीय चुनाव भी जीत चुके हैं।

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