लाइव न्यूज़ :

Karnataka High Court: विवाह किसी व्यक्ति के निजी जानकारी को खत्म नहीं करता, कर्नाटक उच्च न्यायालय ने कहा

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: November 28, 2023 14:04 IST

Karnataka High Court: एकल न्यायाधीश के आदेश को रद्द करते हुए न्यायमूर्ति सुनील दत्त यादव और न्यायमूर्ति विजयकुमार ए पाटिल की खंडपीठ ने कहा कि आधार अधिनियम की धारा 33 के तहत प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए, भले ही जानकारी मांगने वाली पत्नी हो।

Open in App
ठळक मुद्देउच्च न्यायालय के न्यायाधीश से कनिष्ठ किसी न्यायालय को नहीं दी गई है।एकल न्यायाधीश के आदेश में उससे नीचे के प्राधिकारी को विवरण देने का निर्देश दिया गया था।पति के आधार कार्ड में अंकित पते की जानकारी लोक सूचना अधिकारी (यूआईडीएआई) से मांगी थी।

Karnataka High Court: उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने कहा है कि विवाह किसी व्यक्ति के उसकी निजी जानकारी प्रकट करने के संबंध में प्रक्रियात्मक अधिकारों को खत्म नहीं करता।

 

एकल न्यायाधीश के आदेश को रद्द करते हुए न्यायमूर्ति सुनील दत्त यादव और न्यायमूर्ति विजयकुमार ए पाटिल की खंडपीठ ने कहा कि आधार अधिनियम की धारा 33 के तहत प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए, भले ही जानकारी मांगने वाली पत्नी हो। धारा 33 (1) के अनुसार सूचना प्रकट करने का आदेश पारित करने की शक्ति उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से कनिष्ठ किसी न्यायालय को नहीं दी गई है।

लेकिन उच्च न्यायालय ने कहा कि एकल न्यायाधीश के आदेश में उससे नीचे के प्राधिकारी को विवरण देने का निर्देश दिया गया था। खंडपीठ ने कहा, ‘‘विद्वान एकल न्यायाधीश ने सहायक महानिदेशक, केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (यूआईडीएआई) को उस व्यक्ति को नोटिस जारी करने का निर्देश देकर पूरी तरह त्रुटिपूर्ण काम किया है जिसके बारे में जानकारी मांगी गई है।

यह एक स्थापित सिद्धांत है कि यदि अधिनियम यह प्रावधान करता है कि कोई विशेष कार्य किसी विशेष तरीके से किया जाना है, तो इसे उस तरीके से किया जाना चाहिए या बिल्कुल नहीं किया जाना चाहिए।’’ उत्तर कर्नाटक के हुबली की रहने वाली महिला ने अपने पति के आधार कार्ड में अंकित पते की जानकारी लोक सूचना अधिकारी (यूआईडीएआई) से मांगी थी।

वह एक कुटुंब अदालत के माध्यम से प्रयास कर रही थी कि उसके पति को उसे गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया जाए जो फरार था। अधिकारी ने जवाब दिया कि जानकारी देने के लिए उच्च न्यायालय का आदेश जरूरी है जिसके बाद महिला ने एकल पीठ का रुख किया। एकल पीठ के आदेश को केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (यूआईडीएआई) ने चुनौती दी थी।

अदालत ने एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ दलीलों को स्वीकार कर लिया। केएस पुत्तस्वामी मामले में शीर्ष अदालत के आदेश का उल्लेख करते हुए खंडपीठ ने कहा, ‘‘आधार संख्या धारक की निजता के अधिकार में उस व्यक्ति के निजता के अधिकार की स्वायत्तता निहित है।’’ 

टॅग्स :कर्नाटकबेंगलुरु
Open in App

संबंधित खबरें

कारोबारबेंगलुरु-मुंबई एक्सप्रेस शुरू, देखिए रूट, समय और टिकट की कीमत, तुमकुरु, हुबली, बेलगावी, सांगली, कराड, सतारा, लोनांद, पुणे, लोनावला, कल्याण और ठाणे सहित 15 स्टेशनों पर रुकेगी

कारोबारमुंबई और बेंगलुरु के बीच सप्ताह में 2 दिन चलने वाली नई मेल एक्सप्रेस ट्रेन?, 17 एलएचबी कोच होंगे, जानिए टाइमटेबल और किराया

बॉलीवुड चुस्कीकन्नड़ एक्टर दिलीप राज का निधन, 48 की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से तोड़ा दम

भारतबेंगलुरु में PM मोदी के कार्यक्रम से पहले वेन्यू के पास बम की आशंका, पुलिस ने संदिग्ध को हिरासत में लिया

भारतPM Modi in Bengaluru: सावधान! आज घर से निकलने से पहले देख लें रूट मैप, ये प्रमुख सड़कें रहेंगी बंद

भारत अधिक खबरें

भारत'चंद दिनों के बलात्कार और दुष्कर्म के चंद आंकड़े दे रहा हूँ': नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने आंकड़े जारी कर सम्राट सरकार पर बोला तीखा हमला

भारतविकास प्रक्र‍िया में जनजातीय समाज को शामिल करने प्रधानमंत्री श्री मोदी ने बनाई नीतियां: मंत्री डॉ. शाह

भारतक्या बीजेपी में शामिल होंगे रेवंत रेड्डी? तेलंगाना सीएम को लेकर निज़ामाबाद के सांसद धर्मपुरी के बयान ने मचाई सनसनीखेज

भारत2020 Delhi riots case: अदालत ने बीमार माँ की देखभाल के लिए उमर खालिद को अंतरिम ज़मानत देने से किया इनकार

भारतइंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा सहित मप्र के पांच कलेक्टर फेम इंडिया-एशिया पोस्ट की सर्वश्रेष्ठ जिलाधिकारी 2026 सूची में शामिल