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Maharashtra: एसबीएल विस्फोट मामले में 5 पदाधिकारियों को बड़ा झटका, हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत देने से किया इनकार

By फहीम ख़ान | Updated: April 27, 2026 20:41 IST

अदालत ने इस गंभीर और विनाशकारी घटना को देखते हुए तथा ठोस प्राथमिक साक्ष्यों के आधार पर उन्हें अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया और उनकी याचिकाएं खारिज कर दीं.

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नागपुर: 26 बेगुनाह मजदूरों की जान लेने वाले एसबीएल एनर्जी विस्फोट मामले में आरोपी पांच पदाधिकारियों को सोमवार को बंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ से भी बड़ा झटका लगा. अदालत ने इस गंभीर और विनाशकारी घटना को देखते हुए तथा ठोस प्राथमिक साक्ष्यों के आधार पर उन्हें अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया और उनकी याचिकाएं खारिज कर दीं. यह फैसला न्यायमूर्ति रजनीश व्यास ने सुनाया.

इन पदाधिकारियों में प्रबंध निदेशक संजय चौधरी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी व निदेशक आलोक चौधरी, उपप्रबंधक (सुरक्षा) केदार अरविंद पंचपुत्रे, निदेशक आलोक राधेश्याम अवधिया और निदेशक श्रवणकुमार शामिल हैं. इससे पहले सत्र न्यायालय भी उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर चुका था, जिसके बाद उन्होंने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था. इस मामले में कलमेश्वर पुलिस ने कुल 32 आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 105, 125(अ) व (ब) और 288 के तहत एफआईआर दर्ज की है. सरकार की ओर से एडवोकेट ए.एम. घोगरे ने पक्ष रखा.

तीन पदाधिकारियों को मिली राहत

अदालत ने गैर-कार्यकारी स्वतंत्र निदेशक सत्यवती पराशर, रविंद्र पोखरना और मनोज कुमार प्रसाद को कुछ शर्तों के साथ अग्रिम जमानत दे दी. अदालत ने कहा कि ये स्वतंत्र निदेशक हैं और इनके खिलाफ आपराधिक जिम्मेदारी साबित करने के पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं, इसलिए इन्हें इस घटना के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता.+

ये हैं जमानत की शर्तें

1 - आरोपी दो लाख रुपये का निजी मुचलका और उतनी ही राशि का जमानतदार पेश करेंगे.2 - पोखरना और प्रसाद 30 अप्रैल से 7 मई तक, जबकि पराशर 2 और 3 मई को पुलिस स्टेशन में हाजिरी लगाएंगे.

3 - 3 मई या उससे पहले पासपोर्ट जांच अधिकारी के पास जमा करना होगा और बुलाने पर उपस्थित होना होगा.4 - मामले के सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करेंगे और सरकारी गवाहों पर दबाव नहीं डालेंगे.

5 - अदालत की अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ेंगे और जांच में सहयोग करेंगे.

फैसले में अदालत की सख्त टिप्पणियां

1 - कंपनी में पहले भी ऐसी घटना हो चुकी थी, जिसमें दो मजदूर घायल हुए थे, फिर भी अधिकारियों ने लापरवाही बरती.2 - मजदूरों को पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं दिया गया, जिससे उनके जीवन को खतरे में डाला गया.

3 - दो सुरक्षा अधिकारियों की नियुक्ति जरूरी थी, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाए जाने का रिकॉर्ड पेश नहीं किया गया.

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