नागपुर: ध्वनि प्रदूषण रोकने रैप सिंगर बने ईएनटी सर्जन, ‘हॉर्न नॉट ओके प्लीज’ रैप सांग बनाया
By आनंद शर्मा | Updated: April 27, 2026 21:41 IST2026-04-27T21:41:05+5:302026-04-27T21:41:38+5:30
इस बात को ध्यान में रखते हुए ही शहर के वरिष्ठ कान नाक गला विशेषज्ञ डॉ. नरेश अग्रवाल ने एक बार फिर अपने अभिनव उपक्रम के जरिए जनजागृति करने का बीड़ा उठाया है.

नागपुर: ध्वनि प्रदूषण रोकने रैप सिंगर बने ईएनटी सर्जन, ‘हॉर्न नॉट ओके प्लीज’ रैप सांग बनाया
नागपुर : शहर के विस्तार और विकास के साथ ही यहां प्रदूषण भी तेजी से बढ़ रहा है. इसमें भी वाहनों की संख्या लगातार बढ़ने से सड़कों पर ध्वनि प्रदूषण का स्तर भी बढ़ने लगा है. इसका असर स्वास्थ्य पर भी होने की आशंका बनी हुई है. इस बात को ध्यान में रखते हुए ही शहर के वरिष्ठ कान नाक गला विशेषज्ञ डॉ. नरेश अग्रवाल ने एक बार फिर अपने अभिनव उपक्रम के जरिए जनजागृति करने का बीड़ा उठाया है.
इसके लिए ईएनटी सर्जन डॉ. नरेश अग्रवाल सीधे रैप सिंगर ही बन गए हैं. उनका मकसद ध्वनि प्रदूषण को रोकना है. इसके लिए 29 अप्रैल को अंतरराष्ट्रीय ध्वनि जागरूकता दिवस को ध्यान में रखते हुए उन्होंने ‘हॉर्न नॉट ओके प्लीज’ नामक रैप सांग तैयार किया है. ये गाना उन्होंने खुद ही लिखा है और खुद ही गाया है. इस रैप सांग के वीडियो में उन्होंने रैप सिंगर का किरदार भी निभाया है. डॉ. अग्रवाल का ये वीडियो अब यूट्यूब पर उपलब्ध कराया गया है.
डॉ. नरेश अग्रवाल ने ‘लस’ काे बताया कि शहरों में ध्वनि प्रदूषण का मुख्य कारण हॉर्न ही है. इससे मानसिक तौर पर एकाग्रता की कमी, गुस्सा, चिड़चिड़ापन, अनिद्रा व शारीरिक तौर पर सुनने में कमी, बहरापन, टिनिटस, एसिडिटी, अपचन, ब्लडप्रेशर, हार्ट, यहां तक कि नपुंसकता और बांझपन तक हो सकता है. ऐसे में ध्वनि प्रदूषण की रोकथाम बेहद जरूरी है. इसके प्रति जनजागृति के लिए ही उन्होंने ये वीडियो बनाया है.
इसमें उन्हें डॉ. अनीषा अग्रवाल, डॉ. सुभाष राऊत, विधायक प्रवीण दटके, चेतन जोशी, दिनेश अग्रवाल, शीनू अग्रवाल का सहयोग मिला है. इस वीडियो की सिनेमेटोग्राफी जतिन जोशी और चेतन जोशी ने की है. जबकि, एओआई, एचएमएआई, प्रभाकरराव सटके स्मृति सेवा संस्था का सहयोग मिला है.
इसके पूर्व, ईएनटी सर्जन डॉ. नरेश अग्रवाल ने नायलॉन मांजा पर प्रतिबंध के लिए पुष्पा फिल्म की तर्ज पर वीडियो बनाया था. इसमें वे पुष्पा की भूमिका में नजर आए थे. वहीं, अंगदान को लेकर भी वे फिल्म बना चुके हैं. कोरोनाकाल में भी उन्होंने लॉकडाउन के संबंध में एक वीडियो तैयार किया था. डॉ. अग्रवाल का कहना है कि ऐसे उपक्रम से उनके कलागुणों को मंच मिलने के साथ ही जनजागृति में भी वे अपना योगदान दे पा रहे हैं.