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बीजेपी-शिवसेना गठबंधन की अनोखी कहानी, महाराष्ट्र चुनावों में कुछ सीटों पर एकदूसरे के खिलाफ 'बागियों' का 'समर्थन!

By अभिषेक पाण्डेय | Updated: October 11, 2019 11:03 IST

BJP, Shiv Sena and rebels: आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को अपने उम्मीदवारों के खिलाफ लड़ रहे निर्दलीयों से मिल रही है चुनौती

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ठळक मुद्देबीजेपी-शिवसेना गठबंधन को महाराष्ट्र चुनावों में मिल रही बागियों से चुनौतीगठबंधन के बावजूद कुछ सीटों पर खुद ही आमने-सामने, कर रही बागियों का समर्थन

आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में भले ही बीजेपी और शिवसेना गठबंधन की नजरें सत्ता में वापसी पर हो, लेकिन दोनों ही पार्टियों के लिए बागियों से कड़ी चुनौती मिल रही है। दोनों पार्टियों के कई बागी नेता इस गठबंधन के आधिकारिक उम्मीदवारों के खिलाफ ही चुनाव मैदान में उतरकर इनकी मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। 

इनमें नासिक, कोंकण, सोलापुर, मराठवाड़ा और पुणे से बीजेपी-शिवसेना गठबंधन के उम्मीदवार शामिल हैं, जिन्हें बागियो की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

उदाहरण के लिए कोंकण के सिंधुगढ़ जिले में शिवसेना और बीजेपी अप्रत्यक्ष रूप से दावा कर रहे हैं कि सभी तीनों विधानसभा सीटों पर दोस्ताना मुकाबला होगा। लेकिन यहां बीजेपी द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे के बेटे और वर्तमान विधायनक नितेश राणे को कंकावली से टिकट देने के बाद गठबंधन यहां गड़बड़ा गया है।

कंकावली सीट पर आमने-सामने बीजेपी और शिवसेना

इसके बाद शिवसेना ने नितेश राणे के खिलाफ कंकावली से सतीश सावंत के रूप में अपना आधिकारिक उम्मीदवार उतार दिया है, जो वास्तव में बीजेपी के खिलाफ ही लड़ रहा है। पूर्व शिवसेना नेता रहे नारायण राणे और ठाकरे परिवार के बीच रिश्ते तल्ख रहे हैं।

इसके जवाब में नारायण राणे के करीबी सहयोगियों को पड़ोसी कुडल और सावंतवादी जिलों में शिवसेना उम्मीदवारों के खिलाफ निर्दलीय उम्मीदवारों के रूप में उतार दिया गया, इन निर्दलीयों का समर्थन अब बीजेपी कर रही है। 

शिवसेना का कहना है कि हमारी लड़ाई बीजेपी के खिलाफ नहीं बल्कि राणे के खिलाफ है। हमने बीजेपी को पहले ही कह दिया था कि वह राणे परिवार के किसी भी सदस्य को टिकट ना दे। हम किसी भी और उम्मीदवार के लिए काम करते।

सावंतवाड़ी में शिवसेना के खिलाफ निर्दलीय को बीजेपी का समर्थन

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक शिवसेना ने कहा, सावंतवाड़ी में राणे के एक करीबी सहयोगी का बीजेपी का समर्थन कर रही है। सेना ने यहां से दीपक केसारकर को उतारा है। वहीं कुडल में जहां शिवसेना ने अपने वर्तमान विधायक वैभव नायक को उतारा है, जिनके खिलाफ राणे के करीबी माने जाने वाले रंजीत देसाई निर्दलीय लड़ रहे हैं, जिन्हें बीजेपी का समर्थन प्राप्त है।

सिंधुगढ़ की लड़ाई को लेकर बीजेपी का कहना है कि महाराष्ट्र में हमारा गठबंधन है, लेकिन यहां हमारे बीच दोस्ताना जंग है।

मुंबई में भी बागियों से परेशान बीजेपी-शिवसेना

कोंकण के अतिरिक्त मुंबई में भी दो ऐसे बागी उम्मीदवार हैं। वर्सोवा में शिवसेना के बागी राजुल पटेल बीजेपी उम्मीदवार और वर्तमान विधायक भारती लावेकर के खिलाफ लड़ रहे हैं। वहीं अंधेरी ईस्ट में बीजेपी कॉर्पोरेटर मुरजी पटेल ने शिवसेना के रमेश लतके के खिलाफ एक निर्दलीय उम्मीदवार उतारा है।

कल्याणा वेस्ट से बीजेपी के वर्तमान विधायक नरेंद्र पवार, गठबंधन के समझौते के तहत अपनी सीट शिवसेना को दिए जाने से नाराज हैं और सेना के उम्मीदवार विश्वनाथ भोइर के खिलाफ निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लड़ रहे हैं। वहीं नासिक वेस्ट में बीजेपी की सीमी हीरे को शिवसेना के बागी विलास शिंदे का सामना करना पड़ा है, जो यहां से टिकट मिलने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन ये सीट शिवसेना को मिलने से नाराज थे।

जहां दोनों पार्टियों ने कुछ बागियों के खिलाफ कार्रवाई की है, तो वहीं कुछ सीटों पर बागियों को मौन रूप से समर्थन कर रही हैं। गुरुवार को बीजेपी ने पार्टी के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ रहे चार उम्मीदवारों को पार्टी से निकाल दिया। इनमें चरण वाघमारे, गीता जैन, बालासाहेब अव्हाले और दिलीप देशमुख शामिल हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हर पार्टी और गठबंधन के अंदरूनी बागियों को देखते हुए चुनावी जंग की रूप-रेखा को लेकर अब भी असमंसज की स्थिति है। 

बीजेपी-शिवसेना पार्टियों के बागी चुनावों में उन्हें नुकसान या विपक्षी दलों को फायदा पहुंचा सकते हैं।

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