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कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा देशद्रोह कानून पर दिये आदेश पर कहा, "अदालतों का पूरा सम्मान है लेकिन सभी 'लक्ष्मण रेखा' से बंधे हुए हैं"

By आशीष कुमार पाण्डेय | Updated: May 11, 2022 15:35 IST

सुप्रीम कोर्ट द्वारा देशद्रोह कानून पर रोक लगाये जाने संबंधी आदेश के बाद कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि 'लक्ष्मण रेखा' एक ऐसी रेखा होती है, जिसे किसी के द्वारा भी पार नहीं किया जाना चाहिए। केंद्र सरकार चाहती है कि सभी को न्यायपालिका के साथ-साथ विधायिका और कार्यपालिका को समान सम्मान देना चाहिए। 

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ठळक मुद्देसुप्रीम कोर्ट द्वारा देशद्रोह कानून पर रोक लगाये के के बाद केंद्र सरकार ने प्रतिक्रिया दी हैकानून मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि केंद्र 'अदालतों और उसकी स्वतंत्रता' का पूरा सम्मान करती है लेकिन साथ में सभी अपनी लक्ष्मण रेखा से भी बंधे हुए हैं और सभी को इसका ख्याल रखना चाहिए 

दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट द्वारा देशद्रोह कानून पर रोक लगाये जाने संबंधी आदेश के बाद केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि केंद्र 'अदालतों और उसकी स्वतंत्रता' का पूरा सम्मान करती है लेकिन सभी अपनी लक्ष्मण रेखा से बंधे हुए हैं और सभी को इसका ख्याल रखना चाहिए। 

कानून मंत्री ने बुधवार को कहा कि 'लक्ष्मण रेखा' एक ऐसी रेखा होती है. जिसे किसी के द्वारा भी पार नहीं किया जाना चाहिए। केंद्र सरकार चाहती है कि सभी को न्यायपालिका के साथ-साथ विधायिका और कार्यपालिका को समान सम्मान देना चाहिए। 

समाचार वेबसाइट 'द हिंदुस्तान टाइम्स' के मुताबिक केंद्रीय मंत्री की यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद आयी है, जिसमें देश की सर्वोच्च अदालत ने अंग्रेजों के काल से चले आ रहे देशद्रोह कानून पर रोक लगा दिया है।

कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि केंद्र सरकार तब तक देशद्रोह के नये मामलों को नहीं दर्ज करेगी, जब तक उसकी वो इस कानून की समीक्षा नहीं कर लेती है और इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि देशद्रोह के मामले में पहले से निरूद्ध किये आरोपी राहत के लिए कोर्ट में अपील कर सकते हैं।

केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, "हमने इस मामले में अपनी स्थिति बहुत स्पष्ट कर दी है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भावनाओं के विषय में कोर्ट को अवगत भी करा दिया है। हम अदालत और उसकी स्वतंत्रता का पूरा सम्मान करते हैं लेकिन एक 'लक्ष्मण रेखा' है, जिसका स्टेट के के सभी अंगों को समान रूप से सम्मान करना चाहिए।"

इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री ने कहा, "हमें इस बात को सुनिश्चित करना होगा कि हम भारतीय संविधान में दिये गये प्रावधानों के साथ-साथ मौजूदा कानून का पूरा सम्मान करें।"

मालूम हो कि कुछ दिनों पहले सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एनवी रमना ने न्यायपालिका के संबंध में केंद्र की शिथिलता पर तंज कसते हुए 'लक्ष्मण रेखा' शब्द का प्रयोग किया था।

चीफ जस्टिस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कानून मंत्री किरेन रिजिजू की मौजूदगी में कहा था, "संविधान तीनों अंगों के बीच शक्ति का विभाजन की व्याख्या करता है और तीन अंगों के सामंजस्यपूर्ण व्यवहार से लोकतंत्र मजबूत होता है। हमें अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते समय 'लक्ष्मण रेखा' का भी ध्यान रखना चाहिए।"

टॅग्स :किरेन रिजिजूसुप्रीम कोर्टएन वेंकट रमणनरेंद्र मोदीCentral Government
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