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Karnataka Hijab Row: हिजाब विवाद पर बोले असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, मुस्लिम बेटियों को लेकर कही बड़ी बात

By रुस्तम राणा | Updated: February 11, 2022 15:12 IST

असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, अभी जो कर्नाटक में हो रहा है वह ज्ञान का मसला नहीं है। ज्ञान मंदिर में धर्म का मसला है। अगर आप हिजाब पहन कर जाते हो तो टीचर को कैसे पता चलेगा कि कोई छात्र समझ रहा है या नहीं।

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ठळक मुद्देइस मुद्दे पर असम के सीएम ने कांग्रेस पर लगाया देश तोड़ने का आरोपसीेएम ने कहा, मुस्लिम बेटियों को सबसे ज्यादा जरूरत डॉक्टर, इंजीनियर बनने की है

कर्नाटक में चल रहे हिजाब विवाद का मुद्दा पूरे देश में गरमाया हुआ है। इस मुद्दे पर सियासत भी खूब हो रही है। शुक्रवार को उत्तराखंड में चुनाव के मद्देनजर प्रचार करने पहुंचे असम राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस मुद्दे पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा, मुस्लिम समुदाय को शिक्षा की जरूरत है, हिजाब की नहीं। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पर इस विवाद को बढ़ाने का आरोप लगाया।   

कांग्रेस पर लगाया देश तोड़ने का आरोप

सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने न्यूज एजेंसी एएनआई के हवाले से कहा, अभी जो कर्नाटक में हो रहा है वह ज्ञान का मसला नहीं है। ज्ञान मंदिर में धर्म का मसला है। अगर आप हिजाब पहन कर जाते हो तो टीचर को कैसे पता चलेगा कि कोई छात्र समझ रहा है या नहीं। उन्होंने कहा, तीन साल पहले ये विवाद क्यों नहीं उठा, अचानक ये मामला क्यों आया। हिजाब के मामले में कोर्ट में केस होता है। कर्नाटक हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में दोनों जगह हिजाब के समर्थन में कांग्रेस के लोग ही खड़े होते हैं, तो ये देश को तोड़ने का एक षड्यंत्र है। 

मुस्लिम बेटियों को लेकर कही ये बात

असम के मुख्यमंत्री ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, अगर मुसलमान को अभी सबसे ज्यादा जरूरत है तो शिक्षा की जरूरत है। हिजाब की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा अगर मुस्लिम बेटियों को सबसे ज्यादा जरूरत है तो डॉक्टर बनने की जरूरत है, इंजीनियर बनने की जरूरत है। उनके लिए अभी हिजाब की जरूरत नहीं है। इस विवाद को लेकर उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस ने इसे विवाद का मुद्दा बनाया है।

HC ने सोमवार तक स्कूलों में धार्मिक कपड़ों पर लगाई रोक

आपको बता दें कि कर्नाटक हाईकोर्ट ने सोमवार तक स्कूलों में धार्मिक कपड़ों पर रोक लगा दी है। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। अपनी अर्जी में याचिकाकर्ता ने देश की शीर्ष अदालत से मामले में तुरंत सुनवाई की मांग की, लेकिन कोर्ट ने तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि हम उचित समय आने पर मामले की सुनवाई करेंगे।  

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