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कल्‍याण सिंह ने साबित कर दिया था कि राजनीति समाज बनाने के लिए की जाती है : राजनाथ

By भाषा | Updated: August 31, 2021 17:04 IST

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने साबित कर दिया था कि राजनीति केवल सरकार बनाने के लिए नहीं, राजनीति समाज बनाने के लिए की जाती है।यहां पूर्व मुख्‍यमंत्री कल्‍याण सिंह को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित सभा में अपने संस्मरण सुनाते हुए रक्षा मंत्री ने कहा, ''कल्‍याण सिंह के साथ मुझे शिक्षा मंत्री के रूप में काम करने का मौका मिला। नकल रोकने के लिए मैंने बहुत कठोर प्रस्‍ताव बनाया था, इसे मैं मानता हूं। जब वह प्रस्ताव कैबिनेट में विचार के लिए पहले दिन गया तो कैबिनेट के सहयोगियों ने कहा कि इतना कठोर कानून नकल रोकने के लिए लागू कर दिया तो बहुत से लोग नाराज हो जाएंगे।'' राजनाथ ने उस समय की याद दिलाते हुए कहा, ''तब कहा गया था कि यदि एक करोड़ छात्रों (राज्य बोर्ड परीक्षा देने वालों) के परिवार में पांच सदस्य हैं तो पांच करोड़ लोग भाजपा के खिलाफ जाएंगे और दो बार मंत्रिमंडल में वह प्रस्‍ताव पारित नहीं हुआ। फिर मैं अकेले जाकर कल्‍याण सिंह से मिला और अपनी इच्छा और उद्देश्य दोनों बताया लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।'' राजनाथ सिंह ने कहा, ''तब मेरे मन में आशंका थी कि पता नहीं इसका क्‍या होगा लेकिन जब अगली कैबिनेट बैठक हुई तो उन्होंने प्रस्तावों के बंडल के बीच से नकल विरोधी प्रस्ताव निकालकर मंत्रिपरिषद के सदस्यों को दिखाते हुए कहा कि शिक्षा मंत्री का आग्रह है, इस पर कोई विचार नहीं होगा और यह प्रस्‍ताव पारित होगा। शासन चलाने के लिए जो दृढ़ता होनी चाहिए, वह उस दिन हमने देखी थी।''कल्‍याण सिंह के नेतृत्व में प्रदेश में 1991 में पहली बार बनी भाजपा सरकार ने 1992 में नकल रोकने के लिए सख्त कानून बनाया जिसके तहत परीक्षाओं में अनुचित साधनों के उपयोग को संज्ञेय अपराध माना गया। बाद में 1993 में मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के गठबंधन की सरकार बनने के बाद इस कानून को निरस्त कर दिया गया था।राजनाथ सिंह ने कहा, ''जब वह (कल्‍याण सिंह) भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष थे तो लगातार प्रवास पर उनके साथ जाने का अवसर मिलता था। तरह-तरह की बातें होती थीं, बड़े ही विनोदी स्वभाव के थे और उनके साथ कोई ऊब नहीं सकता था।’’ उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में कल्याण सिंह ने किस तरह अपने दायित्व का निर्वाह किया, यह प्रदेश की जनता को बताने की जरूरत नहीं है। उसकी पहली झलक 1977 में मिल गई थी जब वह उप्र के स्वास्थ्य मंत्री थे। रक्षा मंत्री ने कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में तमाम अनियमितताएं थीं और उनके स्वास्थ्य मंत्री बनने के बाद चर्चा होने लगी और लोग उन्हें भविष्य के मुख्यमंत्री के रूप में देखने लगे थे।कल्‍याण सिंह का गत 21 अगस्त को लखनऊ के संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्‍थान (एसजीपीजीआई) में निधन हो गया था। वह पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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