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कैलाश मानसरोवर यात्रा, जानें कब से शुरू, महत्व और मार्ग, जानें शेयडूल

By सतीश कुमार सिंह | Updated: April 26, 2025 15:38 IST

India-China relations: पिछले साल अक्टूबर में एक समझौते के तहत डेमचोक और देपसांग के टकराव वाले शेष दो बिंदुओं पर सैनिकों की वापसी पूरी कर ली थी।

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ठळक मुद्देभारत और चीन द्वारा संबंधों को बेहतर बनाने के प्रयासों के एक हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।विदेश मंत्रालय (MEA) ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि यात्रा 30 जून को शुरू होगी। भक्तों को दुनिया की सबसे आध्यात्मिक रूप से श्रेष्ठ तीर्थयात्राओं में से एक पर जाने का मौका मिलेगा।

नई दिल्लीः भारत ने शनिवार को जून से कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू करने की घोषणा की। पांच साल के अंतराल के बाद पवित्र कैलाश मानसरोवर यात्रा अब 2025 में फिर से शुरू होने वाली है, जिससे भक्तों को दुनिया की सबसे आध्यात्मिक रूप से श्रेष्ठ तीर्थयात्राओं में से एक पर जाने का मौका मिलेगा। विदेश मंत्रालय (MEA) ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि यात्रा 30 जून को शुरू होगी। तीर्थयात्रियों का पहला समूह 10 जुलाई को चीन में प्रवेश करेगा। पांच साल के अंतराल के बाद यह यात्रा होने जा रही है। यात्रा फिर से शुरू करने को भारत और चीन द्वारा संबंधों को बेहतर बनाने के प्रयासों के एक हिस्से के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि दोनों देशों ने पिछले साल अक्टूबर में एक समझौते के तहत डेमचोक और देपसांग के टकराव वाले शेष दो बिंदुओं पर सैनिकों की वापसी पूरी कर ली थी।

भारत की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, ‘‘विदेश मंत्रालय (एमईए) द्वारा आयोजित कैलाश मानसरोवर यात्रा जून से अगस्त 2025 के दौरान होने वाली है।’’ वर्ष 2020 के बाद से कैलाश मानसरोवर यात्रा नहीं हुई है। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, ‘‘इस साल, पांच जत्थे, जिनमें से प्रत्येक में 50 यात्री शामिल हैं।

10 जत्थे, जिनमें से प्रत्येक में 50 यात्री शामिल हैं, क्रमशः उत्तराखंड राज्य से लिपुलेख दर्रे को पार करते हुए और सिक्किम राज्य से नाथू ला दर्रे को पार करते हुए कैलाश मानसरोवर यात्रा करेंगे।’’ यात्रा के लिए आवेदन संबंधित वेबसाइट पर जमा किए जा सकते हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि आवेदकों में से यात्रियों का चयन उचित प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा।

कैलाश मानसरोवर यात्रा क्या है?

कैलाश मानसरोवर यात्रा एक पवित्र तीर्थयात्रा है जो हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म, जैन धर्म और बॉन सहित कई धर्मों के भक्तों को आकर्षित करती है। ऐसा माना जाता है कि यह यात्रा एक अनूठा आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करती है, जिसमें एक ट्रेक भक्तों को पवित्र कैलाश पर्वत और तिब्बत में स्थित प्राचीन मानसरोवर झील तक ले जाता है। इस यात्रा के लिए तीर्थयात्रियों को 15,000 फीट ऊपर चढ़ना पड़ता है।

यात्रा का कार्यक्रम:

दिल्ली: मेडिकल स्क्रीनिंग के बाद प्रस्थान

टनकपुर (चंपावत): एक रात रुकना

धारचूला (पिथौरागढ़): एक रात रुकना

गुंजी: ऊंचाई के अनुकूल होने के लिए रात भर रुकना

नाभीडांग: तिब्बत में प्रवेश करने से दो रात पहले

तकलाकोट (तिब्बत, चीन): तिब्बत में प्रवेश

यात्रा पूरी होने के बाद तीर्थयात्रा इस मार्ग से फिर से शुरू होगी

बूंदी: एक रात रुकना

चौकोरी: एक रात रुकना

अल्मोड़ा: रुकना और फिर दिल्ली वापस आना।

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