लाइव न्यूज़ :

LOC पर गोलाबारी, पाक गोलों की बरसात, सीजफायर का उल्लंघन, दहशत में लोग

By सुरेश एस डुग्गर | Updated: October 6, 2020 19:58 IST

दिन में लोग कामकाज में लिप्त रहते थे और रात को चैन की नींद सोते थे अब वहीं दिन में पेट भरने के लिए अनाज की तलाश होती है तो रातभर आसमान ताका जाता है। आसमान में वे उन चमकने वाले गोलों की तलाश करते हैं जो पाक सेना तोप के गोले दागने से पूर्व इसलिए छोड़ती है क्योंकि वह टारगेटांें को स्पष्ट देख लेना चाहती है।

Open in App
ठळक मुद्देबिना घोषणा के जम्मू कश्मीर की सीमा पर युद्ध की परिस्थितियां बनाए हुए है, बावजूद सीजफायर के। 814 किमी लम्बी जम्मू कश्मीर की एलओसी से सटे क्षेत्रों में रहने वाले सीमावासी अपने घरों में रह रहे हों। बोफोर्स जैसी तोपों का इस्तेमाल करते हैं तो उनके मकानों में दरारें पड़ जाती हैं जो कभी कभी खतरनाक भी साबित होती हैं।

जम्मूः एलओसी पर रहने वाली लाखों सीमावासियों की दुआएं अब बदलने लगी हैं। वे इन दुआयों में अपनों की खैर से पहले पाक गोलों की बरसात के बंद होने की दुआएं मांगते हैं और आस लगाए बैठे हैं कि सीजफायर के बावजूद जो गोलाबारी लगातार हो रही है वह बंद हो जाए।

यह भी सच है कि एलओसी से सटे इलाकों में पांच वक्त की नमाज अदा करने वालों की दुआएं भी बदल गई हैं। पहले जहां वे अपनी दुआयों में खुदा से कुछ मांगा करते थे, सुख-चैन और अपनी तरक्की मगर अब इन दुआयों में मांगा जा रहा है कि पाक गोलाबारी से राहत दे दी जाए जो बिना किसी उकसावे के तो है ही बिना घोषणा के जम्मू कश्मीर की सीमा पर युद्ध की परिस्थितियां बनाए हुए है, बावजूद सीजफायर के।

इन सीमावर्ती गांवों की स्थिति यह है कि जहां कभी दिन में लोग कामकाज में लिप्त रहते थे और रात को चैन की नींद सोते थे अब वहीं दिन में पेट भरने के लिए अनाज की तलाश होती है तो रातभर आसमान ताका जाता है। आसमान में वे उन चमकने वाले गोलों की तलाश करते हैं जो पाक सेना तोप के गोले दागने से पूर्व इसलिए छोड़ती है क्योंकि वह टारगेटांें को स्पष्ट देख लेना चाहती है।

ऐसा भी नहीं है कि 814 किमी लम्बी जम्मू कश्मीर की एलओसी से सटे क्षेत्रों में रहने वाले सीमावासी अपने घरों में रह रहे हों। वे जितना पाक गोलाबारी से घबरा कर खुले आसमान के नीचे मौत का शिकार होने को मजबूर हैं उतनी ही परेशानी उन्हें भारतीय पक्ष की जवाबी कार्रवाई से है। भारतीय पक्ष की जवाबी कार्रवाई से उन्हें परेशानी यह है कि जब वे बोफोर्स जैसी तोपों का इस्तेमाल करते हैं तो उनके मकानों में दरारें पड़ जाती हैं जो कभी कभी खतरनाक भी साबित होती हैं।

पाक तोपों का शिकार होने वालों के लिए सबसे बड़ी परेशानी यह है कि सरकार की ओर से उन्हें किसी प्रकार की सहायता नहीं पहुंचाई जा रही है उस गोलाबारी से बचने के लिए जो 1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद सबसे अधिक भयानक व खतरनाक है। वैसे प्रशासन की ओर से उन्हें राहत पहुंचाने के लम्बे-चौड़े दावे अवश्य किए जा रहे हैं मगर इन दावों की सच्चाई यह है कि खाने को अनाज नहीं बल्कि इन लोगों को पाकिस्तानी गोलियां व गोले अवश्य मिल रहे हैं।

स्थिति यह है कि ये हजारों लोग न घर के हैं और न ही घाट के। पाक तोपों के भय के कारण वे घरों में नहीं जा पाते तो मौसम उन्हें मजबूर करता है कि वे खतरा बन चुके घरों में लौट जाएं। आगे कुआं और पीछे खाई वाली स्थिति बन गई है इन लोगों के लिए जो खुदा से पाक गोलाबारी से राहत की दुआ और भीख तो मांग रहे हैं मगर वह उन्हें मिल नहीं पा रही है।

टॅग्स :जम्मू कश्मीरपाकिस्तानभारतीय सेनासीमा सुरक्षा बलराजनाथ सिंह
Open in App

संबंधित खबरें

क्रिकेट"यह तेरा काम है?": बांग्लादेश के लिटन दास के साथ मोहम्मद रिज़वान की तीखी नोकझोंक | VIDEO

विश्वईरान युद्ध के बीच रक्षा समझौते के तहत पाकिस्तान ने सऊदी में अपने 8,000 सैनिक और जेट किए तैनात

भारतजमानत नियम और जेल अपवाद, यूएपीए मामले में भी यही नियम?, सुप्रीम कोर्ट ने हंदवाड़ा निवासी सैयद इफ्तिखार अंद्राबी को दी राहत, पासपोर्ट जमा करने और हर 15 दिन में एक बार थाने जाओ?

विश्वतेहरान में 90 मिनट तक बैठक?, अमेरिका-इजराइल के साथ टकराव के बीच पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के साथ उच्च स्तरीय वार्ता

भारतसुंबली मावस उत्सव: घाटी में गूंजी पुरानी आवाजें, 37 साल बाद कश्मीरी पंडितों ने अपनी मिट्टी को चूमा

भारत अधिक खबरें

भारतईमानदारी के अभाव में शातिर बन जाती है समझदारी

भारत"सरकार हर आयोजन को सड़क पर करा रही है": सड़कों पर नमाज को लेकर सीएम योगी पर अखिलेश का पलटवार

भारतUjjain: श्री महाकाल मंदिर सभा मंडप में सफाई कर्मी महिला को कुत्ते ने काटा

भारत'चंद दिनों के बलात्कार और दुष्कर्म के चंद आंकड़े दे रहा हूँ': नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने आंकड़े जारी कर सम्राट सरकार पर बोला तीखा हमला

भारतविकास प्रक्र‍िया में जनजातीय समाज को शामिल करने प्रधानमंत्री श्री मोदी ने बनाई नीतियां: मंत्री डॉ. शाह