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Ganesh Chaturthi: पुणे के सात मंडल 2023 में कश्मीर में मनाएंगे गणेशोत्सव, जानें सबकुछ

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: September 6, 2022 17:17 IST

Ganesh Chaturthi: पुणे का गणेशोत्सव भारत के नागरिकों के लिए एक विशेष त्योहार रहा है। पुणे के सात मंडल अगले साल कश्मीर के विभिन्न जिलों में अपने बाप्पा की प्रतिकृतियां स्थापित करेंगे।

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ठळक मुद्देकश्मीरी पंडित भी बाप्पा के उत्सव में भाग लेंगे।साल 2019 में केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 हटा दिया था। सांस्कृतिक उत्सव पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादी गतिविधियों के खिलाफ, उनके विरोध में मनाया जाएगा।

पुणेः श्रीमंत भाऊसाहेब रंगारी ट्रस्ट के उत्सव प्रमुख विश्वस्त पुनीत बालन नेबताया कि अगले साल पुणे के सात गणपती मंडल आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष के अवसर पर जम्मूकश्मीर के विभिन्न जिलों में अपनी बाप्पा प्रतिकृतियों के साथ कम से कम डेढ़ दिन का गणेशोत्सव मनाएंगे।

इस अवसर पर कसबा गणपती के श्रीकांत शेटे, तांबडी जोगेश्वरी के केशव नेरुरगांवकर, तुलसीबाग मंडल के विकास पवार, नितीन पंडीत, गुरुजी तालीम मंडल के प्रवीण परदेशी, केसरीवाड़ा गणपती मंडल के अनिल सकपाल, अखिल मंडई मंडल के संजय मते, श्रीमंत भाऊसाहेब रंगारी ट्रस्ट के अध्यक्ष संजीव जावळे आदि मान्यवर मौजूद थे।

साल 2019 में केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 हटा दिया था। केंद्र सरकार ने इस क्षेत्र के विकास को प्राप्त करने के उद्देश्य से विभिन्न योजनाओं को लागू किया। जिस तरह केंद्र सरकार भौगोलिक विकास के लिए कदम उठा रही है, उसी तरह पुणे ने भी अपनी सांस्कृतिक विरासत को यहां के नागरिकों तक पहुंचाने की पहल की है।

पुणे का गणेशोत्सव हमेशा से भारत के नागरिकों के लिए एक विशेष त्योहार रहा है। पुणे के सात मंडल अगले साल कश्मीर के विभिन्न जिलों में अपने बाप्पा की प्रतिकृतियां स्थापित करेंगे। यहां के नागरिकों की मदद के लिए यह पहल की जाएगी। सांस्कृतिक उत्सव पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादी गतिविधियों के खिलाफ, उनके विरोध में मनाया जाएगा।

श्रीमंत भाऊसाहेब रंगारी गणपति ट्रस्ट के उत्सव प्रमुख पुनीत बालन ने विश्वास जताया कि इस वजह से यहां के कश्मीरी पंडित भी बप्पा के उत्सव में भाग लेंगे। पुणे के गणेशोत्सव की समृद्ध विरासत है। ऐसे समय में जब आर्टिकल 370 के निरस्त होने के बाद जम्मू कश्मीर का आर्थिक विकास अपने चरम पर है।

हम यह सुनिश्चित करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं कि महाराष्ट्र की इस 130 साल पुरानी सांस्कृतिक विरासत का अनुभव यहां के नागरिकों को मिल सके । जब हमारे देश से गणेश प्रतिमाएं अमेरिका, स्पेन आदी देशविदेशों में भेजी जाती है तो कश्मीर में क्यों नहीं ? ऐसा विचार पुनीत बालनजी ने व्यक्त किया। यहां के नागरिक अमरनाथ यात्रा, हर घर तिरंगा जैसे उपक्रमों को प्रतिसाद देते हैं, इसलिए हमें विश्वास है कि वे हम सब के बाप्पा को, गणेशोत्सव को भी एक निश्चित प्रतिसाद देंगे।

टॅग्स :गणेश चतुर्थीजम्मू कश्मीरPune
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