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दिल्ली एम्स के प्रोफेसर सुरेश चंद्र शर्मा NMC के पहले अध्यक्ष, एमसीआई की जगह लेगा एनएमसी,आकार लेना शुरू किया

By भाषा | Updated: January 2, 2020 20:31 IST

एनएमसी नया चिकित्सा शिक्षा नियामक है जो भ्रष्टाचार के आरोपों वाली भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआई) की जगह लेगा। कार्मिक मंत्रालय के आदेश में कहा गया कि मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने शर्मा की नियुक्ति को तीन साल की अवधि के लिए या उनकी आयु 70 साल की होने तक के लिए स्वीकृति दी है।

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ठळक मुद्देमहासचिव राकेश कुमार वत्स को इसी अवधि के लिए आयोग के सचिव के रूप में नियुक्त किया गया है।राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने गत आठ अगस्त को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एमएमसी) कानून 2019 को मंजूरी प्रदान कर दी थी।

दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के कान, नाक गला विभाग के प्रोफेसर सुरेश चंद्र शर्मा को गुरुवार को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) का पहला अध्यक्ष नियुक्त किया गया।

एनएमसी नया चिकित्सा शिक्षा नियामक है जो भ्रष्टाचार के आरोपों वाली भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआई) की जगह लेगा। कार्मिक मंत्रालय के आदेश में कहा गया कि मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने शर्मा की नियुक्ति को तीन साल की अवधि के लिए या उनकी आयु 70 साल की होने तक के लिए स्वीकृति दी है।

एमसीआई के संचालन मंडल के महासचिव राकेश कुमार वत्स को इसी अवधि के लिए आयोग के सचिव के रूप में नियुक्त किया गया है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने गत आठ अगस्त को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एमएमसी) कानून 2019 को मंजूरी प्रदान कर दी थी।

आयोग गुणवत्तापूर्ण और किफायती चिकित्सा शिक्षा तक पहुंच में सुधार के लिए प्रणाली उपलब्ध कराएगा और देश के सभी हिस्सों में पर्याप्त एवं उच्च गुणवत्ता से परिपूर्ण चिकत्सा पेशेवरों की उपलब्धता तथा अन्य चीजें सुनिश्चित करेगा। नया कानून चिकित्सा शिक्षा, पेशे और संस्थानों से जुड़े सभी पहलुओं के विकास और नियमन के लिए एमसीआई की जगह एनएमसी की स्थापना की बात कहता है।

राष्ट्रपति ने 2018 में एमसीआई को भंग कर दिया था और इसके कार्यों को अंजाम देने के लिए एक संचालन मंडल नियुक्त कर दिया था। एनएमसी के लिए केंद्र सरकार को कम से कम 72 आवेदन मिले थे। कानून के अनुसार आयोग में एक अध्यक्ष, 10 पदेन सदस्य और 22 अंशकालिक सदस्य होंगे।

एमसीआई के पदाधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोपों और और मेडिकल कॉलेजों को मान्यता देने से जुड़े मामलों की अपारदर्शी जांच के बीच उच्चतम न्यायालय ने मई 2016 में सरकार को नया कानून आने तक एमसीआई के सभी संवैधानिक कार्यों को देखने के लिए एक समिति की स्थापना करने का निर्देश दिया था।

अधिकारियों ने कहा कि एमसीआई पर तुरंत मान्यता देने और देशभर में मेडिकल कॉलेजों को विभिन्न प्रकार की स्वीकृति प्रदान करने में रिश्वत लेने के व्यापक आरोप लगते रहे हैं।

टॅग्स :एम्सदिल्लीमोदी सरकार
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