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कोरोना महामारी की बाढ़ में लहरें गिनने की जिम्मेदारी शिक्षकों को?

By प्रदीप द्विवेदी | Updated: June 15, 2020 15:23 IST

कहने को तो शिक्षकों को खुश करने के लिए ऐसे सरकारी निर्देश हैं कि कोरोना से जुड़े कार्यों के अलावा कोई अन्य कार्य शिक्षकों को नहीं सौंपे जाएं, लेकिन आजकल तो हर कार्य कोरोना से प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तौर पर जुड़ा है, ऐसे में शिक्षको को कहां मुक्ति मिलेगी.

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ठळक मुद्देस्कूल के बच्चों के लिए गेहूं तोलने-बांटने से लेकर कोरोना को लेकर विभिन्न रिपोर्ट भेजने तक के कई काम शिक्षकों को दिए गए हैं. ड्यूटियों को लेकर कार्य निर्धारण के खुलासे का आग्रह राजस्थान के शिक्षामंत्री से किया था, लेकिन इस संबंध में अब तक राहत नहीं मिल पाई है. कोरोना के खतरे में डालकर लोगों के बीच ड्यूटी करने वाले शिक्षकों को न तो इसके लिए अपेक्षित सम्मान मिल रहा है और न ही कोई आवश्यक सुरक्षा!

जयपुरः लंबे समय से शिक्षकों को शिक्षण कार्य के अलावा हर तरह के कार्य सौंप देने की परंपरा बन गई है, तो भला कोरोना संकट में शिक्षक कैसे बच जाते. कोरोना की बाढ़ में भी शिक्षकों को लहरें गिनने जैसे काम दे दिए गए हैं.

कहने को तो शिक्षकों को खुश करने के लिए ऐसे सरकारी निर्देश हैं कि कोरोना से जुड़े कार्यों के अलावा कोई अन्य कार्य शिक्षकों को नहीं सौंपे जाएं, लेकिन आजकल तो हर कार्य कोरोना से प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तौर पर जुड़ा है, ऐसे में शिक्षको को कहां मुक्ति मिलेगी.

एक ओर तो लोगों के आवागमन के लिए हर तरफ से आजादी दे दी गई है और दूसरी ओर शिक्षकों को प्रवासी मजदूरों पर नजर रखने का कार्य सौंपा गया है कि वे कहां से आए हैं, निर्धारित समय के लिए क्वारंटाइन हुए या नहीं, लोगों से तो नहीं मिल रहे हैं, आदि-इत्यादि. यही नहीं, स्कूल के बच्चों के लिए गेहूं तोलने-बांटने से लेकर कोरोना को लेकर विभिन्न रिपोर्ट भेजने तक के कई काम शिक्षकों को दिए गए हैं.

उल्लेखनीय है कि कुछ समय पहले उमावि के प्रधानाचार्यों के संगठन रेसा पी, राष्ट्रीय, रेसला, प्रगतिशील, सियाराम, अम्बेडकर आदि शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों ने शिक्षा विभागीय अधिकारियों व शिक्षकों को, गैर-शैक्षिक कार्यों से मुक्त करने व वैश्विक महामारी कोविद-19 के नाम पर विविध कार्यों के मद्देनजर लगाई जा रही ड्यूटियों को लेकर कार्य निर्धारण के खुलासे का आग्रह राजस्थान के शिक्षामंत्री से किया था, लेकिन इस संबंध में अब तक राहत नहीं मिल पाई है.

दिलचस्प बात यह है कि अपने को और अपने परिवार को कोरोना के खतरे में डालकर लोगों के बीच ड्यूटी करने वाले शिक्षकों को न तो इसके लिए अपेक्षित सम्मान मिल रहा है और न ही कोई आवश्यक सुरक्षा!

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