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Coronavirus: राजस्थान के गांवों तक कैसे पहुंचा कोरोना वायरस? कम्युनिटी स्प्रेड से रोकने के लिए आपात योजना की जरूरत

By प्रदीप द्विवेदी | Updated: April 7, 2020 14:49 IST

Coronavirus: लॉकडाउन के बाद हजारों लोग मुंबई, अहमदाबाद, सूरत आदि शहरों से पैदल चल कर अपने-अपने गांव पहुंचे थे. अब उनमें कोरोना प्रभावितों की पहचान करना आसान काम नहीं है.

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ठळक मुद्देलॉकडाउन के बाद स्थिति नियंत्रण में जरूर लेकिन अब भी कई मुश्किलें सामने हैंविदेश से आने वालों पर दो माह पहले ही कड़ी नजर रखी जाती तो मिल सकती है अधिक कामयाबी

विदेश से देश तक पहुंचा कोराना वायरस का असर अब शहरों के बाद गांवों में भी नजर आने लगा है. इसी के मद्देनजर राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने कहा है कि- राजस्थान में संक्रमण फैलने की तेज गति सभी के लिए एक चुनौती है. हमें सामूहिक रूप से ऐसे प्रयास करने हैं कि लोगों के जीवन पर आसन्न खतरे को जल्द से जल्द टाला जा सके. 

इसके लिए आमजन को स्वास्थ्य कर्मियों एवं प्रशासन का सहयोग करना होगा. मानवता की रक्षा के लिए धर्मगुरुओं, मौलवियों, जनप्रतिनिधियों और समुदाय के वरिष्ठ लोगों का कर्तव्य है कि वे लाउडस्पीकर, पर्चे, वीडियो संदेश आदि जारी कर आम लोगों को स्वास्थ्य कर्मियों का सहयोग करने और उन्हें स्वास्थ्य एवं यात्रा संबंधी सही जानकारी देने के लिए प्रेरित करें.

उल्लेखनीय है कि केन्द्र सरकार की लापरवाही के कारण इन दो माह में कोरोना वायरस विदेश से देश के शहरों और शहरों से गांवों तक का सफर तय करने में कामयाब रहा है. लॉकडाउन से पहले तक पूरे देश का मैदान कोरोना वायरस के लिए ओपन था. पहले महानगर इसकी गिरफ्त में आए, फिर महानगरों में काम करने वाले अनेक लोग कोरोना संक्रमित हुए और बगैर किसी जांच के अपने-अपने गांव तक पहुंच भी गए.

लॉकडाउन के बाद यह नियंत्रण में जरूर है, लेकिन इससे पूरी तरह से मुक्ति पाना केवल समय और मौसम के हाथ है. उम्मीद की जा रही है कि गर्मी बढ़ने के साथ ही ठंड का यह वायरस कमजोर पड़ जाएगा.

कुछ समय पहले डूंगरपुर के एक गांव में पिता-पुत्र कोरोना पाॅजिटिव पाए गए थे. जब यह जाना गया कि- कैसे? तो कोरोना वायरस के शहर से गांव तक पहुंचने की कहानी सामने आई!

ये पिता-पुत्र इंदौर में काम करते थे. कोरोना का प्रकोप बढ़ने की खबरों के बीच ये दोनों मोटरसाइकिल पर इंदौर से रतलाम, बांसवाड़ा होते हुए डूंगरपुर अपने गांव पहुंचे. बाद में कोरोना के लक्षण नजर आने पर उनकी उदयपुर में जांच हुई तो वे कोरोना पाॅजिटिव पाए गए. इसी तरह मुंबई में काम करने वाले दो व्यक्ति भी कुशलगढ़ क्षेत्र तक कोरोना वायरस को अपने साथ लेकर आए.

याद रहे, लॉकडाउन के बाद हजारों लोग मुंबई, अहमदाबाद, सूरत आदि शहरों से पैदल चल कर अपने-अपने गांव पहुंचे थे. अब उनमें कोरोना प्रभावितों की पहचान करना आसान काम नहीं है. केवल- इन पर नजर रखो, ही एकमात्र उपाय है.

यदि विदेश से आने वालों पर दो माह पहले ही कड़ी नजर रखी जाती, तो देश के प्रमुख शहर कोरोना वायरस की गिरफ्त में नहीं आते और इन शहरों में रोजीरोटी के लिए काम करने वाले अनेक लोग कोरोना संक्रमित नहीं होते.

जाहिर है, सरकारी लापरवाही का नुकसान देश की जनता को हो रहा है. इधर, सीएम अशोक गहलोत ने स्वास्थ्य तथा प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जयपुर के रामगंज क्षेत्र में कोरोना संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए युद्ध स्तर पर काम करें. इस क्षेत्र में संक्रमण की स्थिति नाजुक है और वायरस के सामुदायिक प्रसार (कम्युनिटी स्प्रेडिंग) को रोकने के लिए आपात योजना (मास्टर प्लानिंग) लागू करने की आवश्यकता है. 

उन्होंने यह भी कहा है कि जयपुर, जोधपुर चुरू, टोंक, झुन्झुनूं आदि जिलों में संक्रमित व्यक्तियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जिसके लिए तुरन्त सैम्पल कलेक्शन और टेस्टिंग की गति बढ़ाने की जरूरत है. मुख्यमंत्री निवास पर नियमित वीडियो कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि जयपुर में भीलवाड़ा की तर्ज पर बड़ी संख्या में संदिग्ध लोगों को आइसोलेट करना होगा. 

इसके लिए तयशुदा प्रोटोकॉल के अनुसार शहर में स्थित विभिन्न शिक्षा संस्थानों आदि की चिन्हित होस्टल सुविधाओं का उपयोग करें. उन्होंने कहा कि रामगंज में घर-घर सर्वे और पीसीआर टेस्टिंग सहित जांच की सुविधाएं बढ़ाई जाएं, ताकि मौके पर ही रेन्डम टेस्ट के लिए सैम्पल लिये जा सकें. 

टॅग्स :कोरोना वायरसराजस्थान में कोरोनासीओवीआईडी-19 इंडियाराजस्थानअशोक गहलोत
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