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देश के 60 पूर्व नौकरशाहों ने पीएम मोदी को लिखा खत, सेन्ट्रल विस्टा पर जताई चिंता, कहा-जब रोम जल रहा था तो नीरो बंसी बजा रहा था

By भाषा | Updated: May 18, 2020 17:29 IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 60 पूर्व नौकरशाह ने पत्र लिखकर कहा कि देश को इस समय सेन्ट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना को जरूरत नहीं है। हमें कोविड-19 से लड़ने की जरूरत है। आप इस परियोजना को बंद कर हेल्थ पर निवेश कर रहे। इससे पहले भी कई बार नौकरशाहों ने पीएम को पत्र लिखा है।

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ठळक मुद्देसेन्ट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना पर 20 हजार करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है।पत्र को केन्द्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री हरदीप पुरी को भी संबोधित किया गया है।

नई दिल्लीः देश के 60 पूर्व नौकरशाहों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर केन्द्र की सेन्ट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना पर चिंता व्यक्त की है और कहा कि ऐसे वक्त में जब जन स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने के लिए भारी भरकम धनराशि की जरूरत है तब यह कदम ‘‘गैरजिम्मेदारी’’भरा है।

सेन्ट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना पर 20 हजार करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। पत्र को केन्द्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री हरदीप पुरी को भी संबोधित किया गया है। पूर्व नौकरशाहों ने कहा कि संसद में इस पर कोई बहस अथवा चर्चा नहीं हुई। पत्र में कहा गया है कि कंपनी का चयन और इसकी प्रक्रियाओं ने बहुत सारे प्रश्न खड़े किए हैं जिनका उत्तर नहीं मिला है।

पत्र में कहा गया, कोविड-19 से उबरने के बाद जब सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने के लिए, लोगों को भरण-पोषण प्रदान करने और अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए एक बड़ी धनराशि की आवश्यकता होगी, तो ऐसे वक्त में 20,000 करोड़ रुपये की लागत से पूरे सेंट्रल विस्टा को नया स्वरूप देने का प्रस्ताव गैरजिम्मेदाराना प्रतीत होता है।’

पत्र में कहा गया कि ,‘‘यह ऐसा ही है जैसे- जब रोम जल रहा था तो नीरो बंसी बजा रहा था।’’ पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में सेवानिवृत्त आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारी शामिल हैं। डीडीए के पूर्व उपाध्यक्ष वी एस ऐलावाड़ी और प्रसार भारती के पूर्व सीईओ जवाहर सिरकार भी इनमें शामिल हैं।

सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना में नए संसद भवन का निर्माण, एक साझा केंद्रीय सचिवालय का निर्माण और राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक लगभग 3.5 किलोमीटर लंबे मार्ग के पुनर्निर्माण की परिकल्पना है। पूर्व सिविल सेवकों ने कहा कि पुनर्विकास की योजना पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचाएगी। उन्होंने कहा कि तहखानों के साथ बड़ी संख्या में बहुमंजिला कार्यालय भवनों का निर्माण, इस खुले क्षेत्र में भीड़भाड़ पैदा करेगा और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाएगा"।

पत्र में आगे कहा गया है कि दिल्ली पहले से ही बड़े पैमाने पर पर्यावरण प्रदूषण से ग्रस्त है। ऐसे में कुछ ऐसा करने की योजना जो प्रदूषण को कई गुना बढ़ा देगी, बिना सोचा समझा और गैरजिम्मेदाराना कृत्य है। पूर्व नौकरशाहों ने यह भी कहा कि सेंट्रल विस्टा वर्तमान में पूरे शहर के लिए एक मनोरंजक स्थान है और इस क्षेत्र में परिवार गर्मियों में रात में घूमते हैं और खुली हवा में बैठते हैं लेकिन विस्टा में बदलाव से वे इससे वंचित रह जाएंगे। 

टॅग्स :नरेंद्र मोदीवर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशनसीओवीआईडी-19 इंडियासंसदकोरोना वायरसकोरोना वायरस इंडियाकोरोना वायरस लॉकडाउन
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