लाइव न्यूज़ :

कार्यपालिका के विभिन्न अंगों के प्रदर्शन न करने के कारण अदालतों पर बोझ बढ़ा: सीजेआई एनवी रमना

By विशाल कुमार | Updated: April 30, 2022 13:21 IST

भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने आगे कहा कि अदालत के फैसले सरकार द्वारा सालों तक लागू नहीं किए जाते हैं। न्यायिक फैसलों के बावजूद जानबूझकर निष्क्रियता रहती है जो देश के लिए अच्छा नहीं है।

Open in App
ठळक मुद्देसीजेआई ने कहा कि न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या में वृद्धि और मौजूदा रिक्तियों को भरने से लंबित मामलों के समाधान में मदद मिलेगी।उन्होंने आगे कहा कि अदालत के फैसले सरकार द्वारा सालों तक लागू नहीं किए जाते हैं।विभिन्न हाईकोर्ट में करीब 60 लाख और सुप्रीम कोर्ट में 70 हजार मामले लंबित हैं।

नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने शनिवार को कहा कि कार्यपालिका के विभिन्न अंगों प्रदर्शन न करने के कारण और विधायिका के अपनी पूरी क्षमता के साथ काम नहीं करने के कारण अदालतों में केसों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।

इसके साख ही उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या में वृद्धि और मौजूदा रिक्तियों को भरने से लंबित मामलों के समाधान में मदद मिलेगी।

सीजेआई रमना ने मुख्यमंत्रियों और हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों के संयुक्त सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि संबंधित लोगों की जरूरतों और आकांक्षाओं को शामिल करते हुए गहन बहस और चर्चा के बाद कानून बनाया जाना चाहिए। अक्सर कार्यपालकों के गैर-प्रदर्शन और विधायिकाओं की निष्क्रियता के कारण मुकदमेबाजी होती है।

उन्होंने आगे कहा कि अदालत के फैसले सरकार द्वारा सालों तक लागू नहीं किए जाते हैं। न्यायिक फैसलों के बावजूद जानबूझकर निष्क्रियता रहती है जो देश के लिए अच्छा नहीं है। हालांकि नीति निर्धारण हमारा अधिकार क्षेत्र नहीं है, लेकिन अगर कोई नागरिक अपनी शिकायत लेकर हमारे पास आता है तो अदालत मना नहीं कर सकती।

उन्होंने आगे कहा कि जनहित याचिका की अवधारणा अब निजी हित याचिका में बदल गई है और कभी-कभी परियोजनाओं को रोकने या सार्वजनिक प्राधिकारियों पर दबाव बनाने के लिये इनका इस्तेमाल किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि ने शनिवार को कहा कि संविधान राज्य के तीनों अंगों के बीच शक्तियों के पृथक्करण का प्रावधान करता है और अपने कर्तव्य का पालन करते समय लक्ष्मण रेखा का ध्यान रखा जाना चाहिये।

बता दें कि, कानून और न्याय मंत्रालय ने हाल ही में लोकसभा को बताया है कि जिला और निचली अदालतों में 4 करोड़ से अधिक तो विभिन्न हाईकोर्ट में करीब 60 लाख और सुप्रीम कोर्ट में 70 हजार मामले लंबित हैं।

टॅग्स :एन वेंकट रमणCJIसुप्रीम कोर्टनरेंद्र मोदी
Open in App

संबंधित खबरें

विश्वनीदरलैंड पीएम रॉब जेटन दुनिया में सबसे ज्यादा आबादी वाले देश भारत को क्यों ज्ञान दे रहे हैं?

ज़रा हटके'मोदी जी आप टेंशन मत लो… हम सिर्फ नानी के घर जाते हैं', PM मोदी की अपील पर बच्ची का वीडियो वायरल

विश्वप्रधानमंत्री मोदी को मिला 32वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान?, नॉर्वे के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट’ से सम्मानित, वीडियो

भारतजमानत नियम और जेल अपवाद, यूएपीए मामले में भी यही नियम?, सुप्रीम कोर्ट ने हंदवाड़ा निवासी सैयद इफ्तिखार अंद्राबी को दी राहत, पासपोर्ट जमा करने और हर 15 दिन में एक बार थाने जाओ?

भारतदिल्ली बार काउंसिल चुनावः मतगणना पर रोक, प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा- न्यायालय फैसला नहीं सुनाता, तब तक मतपत्रों की गिनती स्थगित

भारत अधिक खबरें

भारतDelhi Traffic Update: दिल्ली वाले ध्यान दें! 19 मई को ट्रैफिक जाम से बचना है, तो इन रास्तों का करें इस्तेमाल

भारतभविष्य के लिए ये कैसी पौध तैयार कर रहे हैं हम ?

भारत'भारत अब नक्सल-मुक्त है': अमित शाह ने छत्तीसगढ़ में उग्रवाद के खात्मे की घोषणा की

भारतMadhya Pradesh: खेलते‑खेलते कार में बंद 4 साल की बच्ची की मौत, दो घंटे तक किसी ने नहीं देखा

भारतमुंबई और अहमदाबाद के बीच भारत की पहली बुलेट ट्रेन की पहली झलक सामने आई