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केंद्र ने दिल्ली हाईकोर्ट में समलैंगिक विवाह मामले में सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग का विरोध किया

By आशीष कुमार पाण्डेय | Updated: May 17, 2022 19:16 IST

केंद्र सरकार ने समलैंगिक विवाह के रजिस्ट्रेशन की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग की मांग का दिल्ली हाईकोर्ट में विरोध किया है। केंद्र सरकार ने हलफनामा दायर करते कहा कि समलैंगिक जोड़े ऐसा करके समाज में अनावश्यक प्रचार पाना चाहते हैं और अगर लाइव स्ट्रीमिंग की इजाजत दी जाती है तो इससे समाज में भ्रम की स्थिति पैदा होगी।

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ठळक मुद्देदिल्ली हाईकोर्ट में समलैंगिक विवाह के मामले में होने वाली कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग की मांग की गई केंद्र ने कहा ऐसी मांग केवल समलैंगिक विवाह को सनसनीखेज बनाने के लिए किया जा रहा हैहाईकोर्ट ने केंद्र के हलफनामें पर आपत्ति जताते हुए दोबारा हलफनामा दायर करने का आदेश दिया

दिल्ली: केंद्र सरकार ने समलैंगिक विवाह के रजिस्ट्रेशन की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग की मांग का दिल्ली हाईकोर्ट में विरोध किया है। केंद्र सरकार ने इस मामले में हलफनामा दायर करते कोर्ट में कहा कि समलैंगिक जोड़े ऐसा करके समाज में अनावश्यक प्रचार पाना चाहते हैं और अगर लाइव स्ट्रीमिंग की इजाजत दी जाती है तो इससे समाज में भ्रम की स्थिति पैदा होगी और यह केवल समलैंगिक विवाह को सनसनीखेज बनाने के लिए किया जा रहा है।

वहीं कोर्ट ने केंद्र के हलफनामें में प्रयोग किये गये शब्दों पर कड़ी आपत्ति जताई। दरअसल इस मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वकील नीरज किशन कौल ने कोर्ट से कहा कि केंद्र सरकार का अधिकार है कि वो लाइव-स्ट्रीमिंग को परिमश दे या न दे लेकिन सरकार की ओर से हलफनामे में जिस तरह की भाषा का प्रयोग किया है वो बेहद अपमानजनक है।

वकील नीरज किशन कौल की इस दलील को सुनने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस नवीन चावला की बेंच ने केंद्र के हलफनामे को ठुकराते हुए आदेश दिया कि केंद्र इस मामले में बेहतर जवाब दाखिल करे।

बेंच ने सरकारी वकील से कहा, "हलफनामे में की भाषा अगर आपत्तिजनक है, तो इस मामले में आप इसे न दाखिल करें। इस तरह की भाषा वाला हलफनामा केंद्रीय मंत्रालय की ओर से नहीं आ सकता है। हलफनामा दाखिल होने से पहले उसकी जांच होनी चाहिए।" 

जिसके जवाब में सरकारी वकील ने कोर्ट से कहा कि अगली तारीख पर वो इस संबंध में बेहतर हलफनामा पेश करेंगे। इसके बाद मामले की सुनवाई 20 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी गई।

मालूम हो कि अभिजीत अय्यर मित्रा ने दिल्ली हाईकोर्ट में मुंबई और कर्नाटक के तीन पेशेवरों द्वारा हिंदू विवाह अधिनियम के तहत समलैंगिक जोड़ों के विवाह के पंजीकरण की मांग करने वाली याचिका की लाइव स्ट्रीमिंग के लिए आवेदन दायर किया था। आवेदन में कहा गया था कि देश में पर्याप्त संख्या में लोग (लगभग 7-8% आबादी) इस मामले की कार्यवाही को देखने में रुचि रखते हैं।

लाइव स्ट्रीमिंग की मांग का विरोध करते हुए कानून मंत्रालय ने अपने जवाब में कहा कोर्ट कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग की अनुमति नहीं दी जा सकती क्योंकि इससे न तो मौलिक अधिकार का उल्लंघन हो रहा है और न ही यह राष्ट्रीय महत्व से संबंधित है। इसके साथ केंद्र ने याचिकाकर्ताओं पर यह भी आरोप लगाया कि वो कथित तौर पर "वैश्विक ध्यानाकर्षण" के लिए ऐसा कर रहे हैं। (समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

टॅग्स :एलजीबीटीदिल्ली हाईकोर्टCentral Government
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