लाइव न्यूज़ :

बिहार: अवमानना मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय को हाईकोर्ट ने नोटिस दिया, लोक अभियोजक की बर्खास्तगी वापस लेने के आदेश का नहीं हुआ पालन

By विशाल कुमार | Updated: March 6, 2022 11:59 IST

मोतिहारी के तत्कालीन लोक अभियोजक (पीपी) जय प्रकाश मिश्रा की सेवा पिछले साल 23 अक्टूबर को कानून विभाग द्वारा समाप्त कर दी गई थी। 21 दिसंबर को कानून विभाग ने आश्वासन दिया था कि मिश्रा की बर्खास्तगी एक सप्ताह के भीतर वापस ले ली जाएगी।

Open in App
ठळक मुद्देमिश्रा की सेवा 23 अक्टूबर को कानून विभाग द्वारा समाप्त कर दी गई थी। कानून विभाग ने अदालत को आश्वासन दिया कि बर्खास्तगी एक सप्ताह के भीतर वापस ले ली जाएगी।कानून विभाग ने कहा कि सेवा बहाल करने से संबंधित फाइल सीएम की मंजूरी के लिए लंबित है।

पटना: पटना हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) को एक कारण बताओ नोटिस जारी किया है, जिसमें मोतिहारी के तत्कालीन लोक अभियोजक (पीपी) जय प्रकाश मिश्रा की बर्खास्तगी रद्द करने से संबंधित उसके आदेश का पालन नहीं किए जाने को लेकर जवाब मांगा गया है।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, मिश्रा द्वारा दायर अवमानना याचिका की सुनवाई करते हुए गुरुवार को न्यायमूर्ति पीबी बजंथरी के आदेश पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

याचिकाकर्ता ने पिछले साल 21 दिसंबर को जारी मोतिहारी की जिला स्तरीय समिति के लोक अभियोजक-सह-अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवा बहाल करने के हाईकोर्ट के पिछले आदेश के बाद अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जिसे सरकार द्वारा निर्धारित समय के भीतर पूरा नहीं किया गया।

मिश्रा की सेवा 23 अक्टूबर को कानून विभाग द्वारा समाप्त कर दी गई थी। 21 दिसंबर को रिट याचिका की अंतिम सुनवाई के दौरान मौजूद कानून विभाग के संयुक्त सचिव उमेश कुमार शर्मा ने अदालत को आश्वासन दिया कि मिश्रा की बर्खास्तगी एक सप्ताह के भीतर वापस ले ली जाएगी।

याचिकाकर्ता के वकील चतीश चंद्र मिश्रा ने कहा कि यह एक दुर्लभ अवसर था जब अदालत के आदेश के प्रति उदासीनता के लिए सीएमओ की भूमिका पर सवाल उठाया जा रहा है और सीएम के प्रमुख सचिव को कारण बताओ जवाब देने के लिए कहा गया है। 

उन्होंने विस्तार से बताया कि कानून विभाग ने कहा है कि याचिकाकर्ता की सेवा बहाल करने से संबंधित फाइल सीएम की मंजूरी के लिए लंबित है। संयुक्त सचिव ने कहा कि कानून मंत्री ने पीपी की सेवा बहाल करने की मंजूरी जनवरी में ही सीएमओ को भेज दी थी।

इससे पहले इसी मामले में, अदालत ने कानून विभाग पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया था और अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान विभाग के संयुक्त सचिव को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया था।

टॅग्स :बिहारPatna High Courtनीतीश कुमारCMO
Open in App

संबंधित खबरें

भारत'चंद दिनों के बलात्कार और दुष्कर्म के चंद आंकड़े दे रहा हूँ': नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने आंकड़े जारी कर सम्राट सरकार पर बोला तीखा हमला

क्राइम अलर्टडंडा और रॉड से हमला कर पत्नी फूल कुमारी दास, 3 बच्चे ह्रदय दास, संध्या दास और सोन दास को मार डाला, चंदनपट्टी गांव से दिल दहला देने वाली घटना

भारतशिविर में कुल 67 शिकायत, 30 दिन में करें समाधान नहीं तो 31वें दिन निलंबित?, रेफर नीति अपनाई तो सिविल सर्जन और डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई?, सम्राट चौधरी ने दी चेतावनी

भारतबाप नीतीश कुमार-बेटे निशांत को डॉक्टर की जरूरत, स्वास्थ्य मंत्रालय दिया गया?, पूर्व सांसद और बाहुबली नेता आनंद मोहन का फूटा गुस्सा, वीडियो

भारततख्त श्री पटना साहिब गुरुद्वारे में माथा टेकने पटना पहुंचे पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केन्द्र सरकार और भाजपा पर बोला तीखा हमला

भारत अधिक खबरें

भारतPharmacy Strike Today: आज बंद रहेंगी दवा दुकानें! आज देशव्यापी हड़ताल पर रहेंगे दवा विक्रेता, मरीजों की बढ़ सकती है परेशानी

भारतWeather Today: आज बाहर निकलने से पहले देख लें वेदर अपडेट! दिल्ली में हीटवेव तो बेंगलुरु में बारिश की संभावना

भारतईमानदारी के अभाव में शातिर बन जाती है समझदारी

भारत"सरकार हर आयोजन को सड़क पर करा रही है": सड़कों पर नमाज को लेकर सीएम योगी पर अखिलेश का पलटवार

भारतUjjain: श्री महाकाल मंदिर सभा मंडप में सफाई कर्मी महिला को कुत्ते ने काटा