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दिल्ली हाई कोर्ट ने गौतम नवलखा के ट्रांजिट रिमांड पर लगाई रोक, महाराष्ट्र पुलिस ने 5 बुद्धिजीवियों को किया गिरफ्तार

By लोकमत समाचार हिंदी ब्यूरो | Updated: August 28, 2018 17:33 IST

महाराष्ट्र पुलिस ने मंगलवार सुबह देश के पाँच शहरों में कम से कम 10 बुद्धिजीवियों के घर पर छापा मारा। पुलिस के अनुसार इन सभी पर जनवरी 2018 में हुई भीमा कोरेगाँव हिंसा को उकसाने का आरोप है।

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नई दिल्ली, 28 अगस्त: दिल्ली हाई कोर्ट ने पत्रकार और सोशल एक्टिविस्ट गौतम नवलखा की ट्रांजिट रिमाण्ड पर बुधवार (29 अगस्त) तक के लिए रोक लगा दी है।

हाई कोर्ट बुधवार को नवलखा की याचिका पर सुनवाई करेगा।  नवलखा को बुधवार तक उनके घर में नजरबंद रखा जाएगा।

महाराष्ट्र पुलिस ने नवलखा के अलावा अरुण परेरिया, वरनन गोनसॉल्विस, वरवर राव और सुधा भारद्वाज को गिरफ्तार किया है।

महाराष्ट्र पुलिस ने पुणे में दर्ज भीमा कोरेगाँव हिंसा से जुड़े मामले में देश के छह शहरों में कम से कम 10 बुद्धिजीवियों के घर पर छापे मारे। 

पुणे पुलिस के पास गौतम नवलखा को 30 अगस्त तक ट्रांजिट रिमाण्ड पर रखने का आदेश था जिसके खिलाफ नवलखा ने मंगलवार को हाई कोर्ट ने अपील की थी।

पुलिस के अनुसार सभी बुद्धिजीवियों पर भीमा कोरेगाँव हिंसा से जुड़े होने के आरोप में छापे मारे गये हैं। 

महाराष्ट्र पुलिस ने स्थानीय पुलिस की मदद से दिल्ली में गौतम नवलखा, गोवा में प्रोफेसर आनंद तेलतुंबडे, रांची में मानवाधिकार कार्यकर्ता स्टेन स्वामी, मुंबई में सामाजिक कार्यकर्ता अरुण परेरा, सुजैन अब्राहम, वर्नन गोनसाल्विस,  हैदराबाद में  माओवाद समर्थक कवि वरवर राव, वरवर राव की बेटी अनला, पत्रकार कुरमानथ और फरीदाबाद में सुधा भारद्वाज के घर पर छापा मारा।

रांची में छापा

रांची के ह्यूमन राइट्स कार्यकर्ता स्टेन स्वामी ने मीडिया को बताया कि उनके घर मंगलवार सुबह करीब छह बजे पुलिस ने छापा मारा। स्टेन के घर महाराष्ट्र पुलिस ने रांची पुलिस के सहयोग से की। इस छापेमारी में पुलिस ने कंप्यूटर, लैपटॉप, सीडी, कागजात और किताबों जैसे कई सामान जब्त किए हैं।

स्टेन से महाराष्ट्र स्थित कुछ संगठनों के बारे में भी पूछताछ की गई। ये छापेमारी महाराष्ट्र में उनके खिलाफ दर्ज एक मुक़दमे के कारण की गई। जिसमें उनके इस साल 1 जनवरी को महाराष्ट्र के पुणे के नजदीक भीमा-कोरेगांव हिंसा में संलिप्त रहने के आरोप हैं।

बता दें कि स्टेन स्वामी पर झारखण्ड सरकार ने पत्थलगड़ी मामले में राजद्रोह का मामला दर्ज चुकी है। स्वामी पर आरोप है कि उन्होंने देश के खिलाफ कुछ लोगों को भड़काया है।

 

स्टेन के खिलाफ केस दर्ज हुआ था तो उन्होंने इस मामले को लेकर स्टेन ने एक चिठ्ठी भी लिखी थी, जिसमें उन्होंने सफाई दी थी कि उन्होंने आदिवासियों को उनका हक़ लेने की बात कही, न कि देश के खिलाफ भड़काया। उन्हें बस राजनीति का शिकार बनाया जा रहा है। इससे पहले साल 2012 में वे नक्सलाइट होने के मामले से भी मुक्त हुए थे।

टॅग्स :भीमा कोरेगांवमहाराष्ट्र
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