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स्वच्छता के इंदौर मॉडल से सैलानियों के लिए संवरेगी अयोध्या, आईआईएम ने उठाया बीड़ा

By भाषा | Updated: January 8, 2021 16:21 IST

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इंदौर (मध्यप्रदेश), आठ जनवरी अयोध्या में भगवान राम की जन्मभूमि पर बनने जा रहे भव्य मंदिर को ध्यान में रखते हुए इस धार्मिक नगरी को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की कवायद शुरू हो गई है। इसके लिए अयोध्या नगर निगम ने इंदौर के भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) से हाथ मिलाया है।

आईआईएम इंदौर के एक अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि राम की नगरी को संवारने के लिए प्रबंधन शिक्षा के इस प्रमुख संस्थान के निदेशक प्रोफेसर हिमांशु राय और अयोध्या नगर निगम के आयुक्त विशाल सिंह ने हाल ही में एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर दस्तखत किए हैं।

अधिकारी ने बताया कि करार के तहत स्वच्छता के इंदौर मॉडल के सर्वश्रेष्ठ उपायों को अपनाते हुए अयोध्या में अलग-अलग गतिविधियां शुरू की जाएंगी और उत्तरप्रदेश के इस शहर को धार्मिक पर्यटन के अंतरराष्ट्रीय केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसके लिए केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत अभियान के तहत सूचना, शिक्षा और संचार की योजना बनाई जाएगी।

उन्होंने बताया कि आईआईएम इंदौर, अयोध्या नगर निगम के अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशिक्षित करेगा और राम की नगरी में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उन्हें नयी क्षमता से लैस करेगा।

अयोध्या नगर निगम के आयुक्त विशाल सिंह ने फोन पर "पीटीआई-भाषा" को बताया, "हम अयोध्या को धार्मिक क्षेत्र की वैश्विक नगरी के रूप में विकसित करना चाहते हैं और आईआईएम इंदौर के साथ हुए करार से हमें इस लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।"

उन्होंने बताया कि अयोध्या में इस करार को अमली जामा पहनाने का काम 14 जनवरी को मकर संक्रांति से शुरू हो जाएगा।

गौरतलब है कि इंदौर, वर्ष 2017, 2018, 2019 और 2020 के राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षणों में देश भर में अव्वल रहा है। इंदौर नगर निगम (आईएमसी) के अधिकारियों ने बताया कि शहर का स्वच्छता मॉडल "3 आर" (रिड्यूज, रीयूज और रीसाइकिल) फॉर्मूले पर आधारित है।

उन्होंने बताया कि शहर में बड़ी कचरा पेटियां पांच साल पहले ही हटा दी गई थीं और गली-मोहल्लों में लगातार चलने वाली गाड़ियों के जरिये हर दरवाजे से कचरा जमा किया जाता है। उन्होंने बताया कि शहर में आमतौर पर हर रोज 550 टन गीला कचरा और 650 टन सूखा कचरा निकलता है जिसके अलग-अलग तरीकों से सुरक्षित निपटारे की क्षमता विकसित की गई है।

अधिकारियों ने बताया कि आईएमसी सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) की नवाचारी परियोजनाओं के जरिये कचरे से मोटी कमाई भी कर रहा है। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2019-20 में इस शहरी निकाय ने गीले और सूखे कचरे के प्रसंस्करण से करीब छह करोड़ रुपये कमाए थे।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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