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सीमा पर चीन से तनाव के बीच आज लेह का दौरा करेंगे सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे

By रामदीप मिश्रा | Updated: September 3, 2020 11:23 IST

गलवान घाटी में 15 जून को हुई झड़प के बाद से पैंगोंग झील इलाके में यथास्थिति में बदलाव करने की चीन की ताजा कोशिश क्षेत्र में पहली बड़ी घटना है। उस झड़प में 20 भारतीय सैन्य कर्मी शहीद हो गये थे। चीनी सैनिक भी हताहत हुए थे लेकिन चीन ने उसका विवरण सार्वजनिक नहीं किया।

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ठळक मुद्दे सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे गुरुवार को लेह का दौरा करने वाले हैं।वरिष्ठ फील्ड कमांडर उन्हें वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के जमीनी हालात की जानकारी देंगे।

नई दिल्लीः पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग सो झील इलाके में चीन की 'उकसाने वाली कार्रवाई' के कुछ दिनों बाद क्षेत्र में स्थिति संवेदनशील बनी रही। भारत और चीन के बीच तनाव बरकरार है। इस बीच सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे गुरुवार को लेह का दौरा करने वाले हैं, जहां वह स्थिति का जायजा लेंगे। 

मिली जानकारी के अनुसार, सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे लेह की स्थिति का जायजा लेने के लिए वहां का दौरा करेंगे। वरिष्ठ फील्ड कमांडर उन्हें वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के जमीनी हालात की जानकारी देंगे। यह जानकारी सेना के सूत्रों की ओर से दी गई है। अपने इस दो दिवसीय दौरे के दौरान सेना प्रमुख सैनिकों की ऑपरेशनल तैयारियों का भी मुआयना करेंगे। 

इधर, पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ जारी तनाव को देखते हुए दोनों पक्षों के सेना कमांडरों ने एक और दौर की वार्ता की। दोनों देश की सेना ने चुशुल में ब्रिगेड कमांडर स्तर की वार्ता की है, जिसमें मुख्य रूप से पैंगोंग झील इलाके में तनाव घटाने पर ध्यान केंद्रित किया गया। बताया गया कि सोमवार और मंगलवार को छह घंटे से अधिक समय तक इसी तरह की वार्ता हुई, लेकिन कोई 'ठोस नतीजा' नहीं निकला। 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्ताव ने मंगलवार को कहा था कि चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने सोमवार को एक बार फिर 'उकसाने वाली कार्रवाई' की, जब दोनों पक्षों के कमांडर दो दिन पहले पैंगोंग झील इलाके में यथास्थिति बदलने की चीनी कोशिशों के बाद तनाव घटाने के लिये बातचीत कर रहे थे।

सूत्रों ने बताया कि भारतीय वायुसेना ने भी पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीनी हवाई गतिविधियां बढ़ने पर अपनी निगरानी बढ़ा दी है। खबर है कि चीन ने पूर्वी लद्दाख से करीब 310 किमी दूर स्थित सामरिक रूप से अहम होटन एयरबेस पर जे-20 लंबी दूरी के लड़ाकू विमान तैनात किये हैं। वहीं, भारतीय वायुसेना ने भी पिछले तीन महीनों में अग्रिम मोर्चे के अपने कई लड़ाकू विमान पूर्वी लद्दाख एवं एलएसी पर अन्य स्थानों पर अहम सीमांत एयर बेस पर तैनात किये हैं। इनमें सुखोई 30 एमकेआई, जगुआर और मिराज 2000 लड़ाकू विमान शामिल हैं। 

गलवान घाटी में 15 जून को हुई झड़प के बाद से पैंगोंग झील इलाके में यथास्थिति में बदलाव करने की चीन की ताजा कोशिश क्षेत्र में पहली बड़ी घटना है। उस झड़प में 20 भारतीय सैन्य कर्मी शहीद हो गये थे। चीनी सैनिक भी हताहत हुए थे लेकिन चीन ने उसका विवरण सार्वजनिक नहीं किया। हालांकि, अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक उस घटना में 35 चीनी सैनिक हताहत हुए थे। पिछले ढाई महीने में भारत और चीन ने कई सैन्य एवं राजनयिक स्तर की वार्ता की हैं लेकिन पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद का समाधान करने में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। 

टॅग्स :मनोज मुकुंद नरवणेभारतीय सेना
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