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किसान आंदोलन के 100 दिन पूरे, केएमपी एक्सप्रेसवे की 5 घंटे रहेगी नाकाबंदी

By अनुराग आनंद | Updated: March 6, 2021 10:01 IST

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा है कि जब तक सरकार बात नहीं मानेगी, आंदोलन ऐसे ही चलता रहेगा। सरकार से अभी बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं है, तैयारी लंबी है।

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ठळक मुद्देकिसानों ने कहा कि डासना, दुहाई, बागपत, दादरी,ग्रेटर नोएडा पर जाम किया जाएगा।दिल्ली बॉर्डर पर किसान आंदोलन के 100 दिन पूरे होने पर सभी किसान काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराएंगे।

नयी दिल्लीदेश की राजधानी दिल्ली के बॉर्डर पर किसान आंदोलन शुरू हुए आज (शनिवार) 100 दिन पूरे हो गए हैं। शनिवार को किसान आंदोलन के सौ दिन पूरे होने पर किसानों ने केएमपी एक्सप्रेसवे को 5 घंटे नाकाबंदी करने के साथ ही काला दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया है। 

किसानों ने कहा कि डासना, दुहाई, बागपत, दादरी,ग्रेटर नोएडा पर जाम किया जाएगा। सभी किसान काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराएंगे। टोल प्लाजा भी फ्री किये जाएंगे। किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि दिल्ली की तीन सीमाओं पर डेरा डाले हुए किसानों से शनिवार को अपराह्न एक बजे से शाम पांच बजे तक केएमपी एक्सप्रेस जाम करने का आह्वान किया गया है।

पंजाब, हरियाणा एवं पश्चिम उत्तर प्रदेश व राजस्थान के हजारों किसान अन्य राज्यों के लोगों के साथ आंदोलन कर रहे हैं-

विशेष तौर पर पंजाब, हरियाणा एवं पश्चिम उत्तर प्रदेश व राजस्थान के हजारों किसान तीन नये कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग करते हुए दिल्ली की सीमाओं-- सिंघू, टिकरी और गाजीपुर पर डेरा डाले हुए हैं। राजेवाल ने मीडिया से कहा, ‘‘ वर्तमान प्रदर्शन को तेज करने के तहत हम छह मार्च को केएमपी जाम कर देंगे।’’ एसकेएम ने यह भी कहा है कि किसान आंदोलन में समर्थन दे चुके विभिन्न केंद्रीय श्रमिक संगठनों के साथ मिलकर वह संयुक्त कार्यक्रम तैयार कर रहा है। 

किसान आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए अब किसान गर्मियों की तैयारियों में जुटे हैं-

बता दें कि दिल्ली की सीमाओं पर पांच जगह चल रहे किसान आंदोलन के छह मार्च को 100 दिन पूरे हो जाएंगे। आंदोलन ठंड के मौसम में शुरू हुआ था और अब किसान गर्मियों की तैयारियों में जुटे हैं। आंदोलन स्थल के हालात देखकर लग रहा है कि अगर सरकार के साथ कोई समझौता नहीं हुआ, तो ये आंदोलन और लंबा खिंच सकता है। दिल्ली और हरियाणा के बीच सिंघु बॉर्डर पर अब बांस-बल्लियों के तंबुओं की जगह, स्टील के ढांचे और इनपर तंबू बांधे जाने की कवायद शुरू हो चुकी है। कई टेंटों में एसी और कूलर लगाने का काम भी जोरों से चल रहा है।

(एजेंसी इनपुट)

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