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कोरोना के बीच निपाह वायरस का कहर, केरल में बच्चे संपर्क में आए 11 लोगों में मिले लक्षण, जानें क्या है निपाह, लक्षण और बचाव

By उस्मान | Updated: September 7, 2021 08:32 IST

निपाह वायरस के संक्रमण से जान गंवाने वाले 12 वर्षीय लड़के के संपर्क में आने वाले 11 लोगों में लक्षण नजर आए हैं

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ठळक मुद्देनिपाह वायरस के संक्रमण से 12 वर्षीय लड़के की हुई मौत इसके संपर्क में आने वाले 11 लोगों में लक्षण नजर आए हैं केरल के कई जिलों में हाई अलर्ट जारी

केरल के स्वास्थ्य विभाग ने 251 व्यक्तियों की पहचान की है, जो निपाह वायरस के संक्रमण से जान गंवाने वाले 12 वर्षीय लड़के के संपर्क में आए थे। इनमें से 38 लोग कोझिकोड मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पृथक-वास में हैं और 11 लोगों में लक्षण नजर आए हैं। 

स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने यह बात कही। स्वास्थ्य मंत्री ने एक विज्ञप्ति में बताया कि संपर्क में आए 251 लोगों में 129 स्वास्थ्यकर्मी हैं। उन्होंने बताया, ‘‘कोझिकोड मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 38 लोग पृथक-वास हैं, जिनमें से 11 लोगों में संक्रमण के लक्षण दिखे हैं। आठ लोगों के नमूने राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान(एनआईवी), पुणे भेजे गए हैं।’’ 

संक्रमण के लक्षण वाले सभी लोगों की हालत स्थिर है। संपर्क में आए 251 लोगों में 54 अत्यंत जोखिम वाली श्रेणी में हैं और इनमें से 30 स्वास्थ्यकर्मी हैं। इनमें से बच्चे के अभिभावक समेत कुछ रिश्तेदार भी हैं। 

चिकित्सा विशेषज्ञों की एक टीम ने बच्चे के घर और आसपास के इलाके का निरीक्षण भी किया। पशुपालन विभाग की एक टीम ने भी इलाके में जांच की। मंत्री ने कहा, ‘‘बच्चे के परिवार की दो बकरियों के खून और सीरम के नमूनों की भी भोपाल के राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान में जांच करायी जाएगी।’’ 

कोझिकोड के 12 वर्षीय लड़के की रविवार को निपाह वायरस संक्रमण से मौत के बाद राज्य का स्वास्थ्य विभाग हाई अलर्ट पर है। बच्चे के घर के तीन किलोमीटर के दायरे को निरूद्ध क्षेत्र घोषित किया गया है। वहीं, इससे लगे इलाके भी कड़ी निगरानी में हैं।  

निपाह वायरस क्या है (What is Nipah Virus)

निपाह वायरस से होने वाला इन्फेक्शन जानवरों से इंसानों में फैलता है। यह वायरस जानवरों और इंसानों में गंभीर किस्म की बीमारी पैदा करता है। इस वायरस का प्रारंभिक स्रोत फल चूसने वाले चमगादड़ हैं। 

इस जानलेवा वायरस का कोई इलाज नहीं है। यह मनुष्यों और जानवरों दोनों के लिए जानलेवा बन सकता है। वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन (WHO) की रिपोर्ट के अनुसार निपा वायरस का उपहार टेरोपस जीनस नामक एक खास नसल के चमगादड़ से मिला है।

कितना खतरनाक है निपाह वायरस

निपाह वायरस अगर इंसानों में फैलता है तो जानलेवा हो सकता है। निपाह वायरस का अभी तक कोई इलाज नहीं खोजा जा सका है, इसलिए मृत्यु का जोखिम 65 से 100 प्रतिशत है।

कैसे फैलता है निपाह वायरस

निपाह वायरस सीधे संपर्क से फैलता है। साथ ही संक्रमित व्यक्ति के साथ खाना शेयर करने से भी फैल सकता है। इससे संक्रमित व्यक्ति को सांस लेने में तकलीफ होती है, खांसी आती है, थकान और दर्द महसूस होता है। इसके अलावा दिमागी बुखार जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। ज्यादा बुखार आने पर दिमाग सूज जाता है और इंसान की मौत हो जाती है।

निपाह वायरस के लक्षण, कारण और बचने के उपाय 

1) निपाह वायरस के लक्षणों में सांस लेने में परेशानी, दिमागी सूजन, बुखार, सिरदर्द, अनिद्रा, मतली, कमजोरी, विचलन और भ्रम कि स्थिति आदि शामिल हैं। एक मरीज 48 घंटे के भीतर कोमा में जा सकता है। 

2) वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के अनुसार, इस खतरनाक वायरस के लिए अभी तक कोई वैक्सीन नहीं है। इससे संक्रमित व्यक्ति के लिए केवल 'इंसेंटिव सपोर्टिव केयर (आईएससी) ही इलाज है। 

3) यह वायरस सुअरों और अन्य घरेलू जानवरों को भी संक्रमित कर सकता है। इस वायरस का प्रारंभिक स्रोत फल चूसने वाले चमगादड़ हैं।

4) डबल्यूएचओ के अनुसार, एनआईवी को पहली बार 1998 में मलेशिया में पहचाना गया था। साल 2004 में खजूर का सेवन करने के बाद कई लोग संक्रमित हो गए थे। इसका कारण यह था कि उन्होंने चमगादड़ द्वारा चूसे हुए खजूर का सेवन किया था। 

5) यह वायरस संक्रमित चमगादड़, सूअर, या इस वायरस से पीड़ित के साथ सीधे संबंध में आने से फैलता है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि जमीन पर पड़े हुए फलों का सेवन नहीं करना चाहिए। ध्यान रहे कि यह हवा के जरिए फैलने वाला वायरस नहीं है। 

6) इससे बचने के लिए आपको सूअरों, चमगादड़ और इससे पीड़ित व्यक्ति के पास जाने से बचना चाहिए। 

7) डॉक्टरों को इससे बचने के लिए संक्रमित व्यक्ति के इलाज के दौरान मास्क और ग्लव्स पहनने चाहिए। 

8) आपको जमीन पर पड़े हुए फलों को खाने से बचना चाहिए। संभव है वो फल चमगादड़ ने खाएं हों, उनका सेवन करने से आप इस वायरस की चपेट में आ सकते हैं।

9) अगर आप सूअर पालते हैं, तो आपको उनके पास जाने से बचना चाहिए और अन्य लोगों को भी उनके पास जाने से रोकना चाहिए।

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