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आ गया जीका वायरस का टीका, संभव होगा इस लाइलाज बीमारी का इलाज, जानिए भारत में कब आएगा

By भाषा | Updated: December 6, 2018 07:40 IST

Zika Virus का कोई टीका या उपचार नहीं था। वैज्ञानिकों ने जीका वायरस से लड़ाई के लिए एक टीका विकसित किया है। उन्होंने इसका सफल परीक्षण चूहों और बंदरों पर किया है।

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जीका वायरस मच्छरों के काटने से होने वाली एक वायरल बीमारी है। इसका वाहक येलो फीवर फैलाने वाले एडीज इजिप्टी मच्छर होते हैं। जीका वायरस जानलेवा नहीं होता लेकिन इसके कारण गर्भवती महिलाओं को बहुत खतरा होता है। इस वायरस की वजह से गर्भ में पल रहे बच्चे का मस्तिषक पूरी तरह विकसित नहीं हो पाता है और यह एक स्थाई समस्या बन जाती है। जीका वायरस से प्रभावित शख्स को काफी तेज बुखार आता है, जोड़ों में दर्द होता है और शरीर पर लाल धब्बे हो जाते हैं। इतना ही नहीं जीका वायरस ऐसा संक्रमण है जो मनुष्य के बच्चों में दिमागी विकार पैदा कर सकता है।

जीका वायरस का इलाजइस वायरस का कोई टीका या उपचार नहीं था। वैज्ञानिकों ने जीका वायरस से लड़ाई के लिए एक टीका विकसित किया है। उन्होंने इसका सफल परीक्षण चूहों और बंदरों पर किया है।

अमेरिका में यूनिवर्सिटी ऑफ हवाई के शोधकर्ताओं के मुताबिक बंदरों पर इस टीके का प्रभावी साबित होना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है क्योंकि इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि यह मानव के लिए भी कारगर सिद्ध होगा और क्लिनिकल तौर पर इसके और विकास में सक्षम बनाएगा।

वर्ष 2015-16 में ब्राजील में जीका संक्रमण के फैलने के बाद इससे लड़ाई के लिए वैश्विक स्तर पर प्रयास शुरू हुए थे और 30 से अधिक टीके विकसित किए गए थे।

जीका, संक्रमित मच्छर के काटने और संक्रमित व्यक्ति के साथ यौन संबंध बनाने से फैलता है। इस संक्रमण से बचाव का कोई उपाय नहीं है। सार्वजनिक इस्तेमाल के लिए अब तक किसी टीके को मंजूरी नहीं मिली है। हवाई यूनिवर्सिटी में सहायक प्रोफेसर एक्सेल लेहरर ने कहा कि यह प्रस्तावित टीका कारगर हो सकता है। 

जीका वायरस के लक्षण जीका वायरस से प्रभावित अधिकतर लोगों में जीका वायरस के लक्षण नजर नहीं आते वहीं कुछ लोगों में हल्के बुखार, त्वचा पर चकत्ते होने, आंखों में जलन, बेचैनी, सिरदर्द, बदन दर्द, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द जैसी समस्याएं नजर आती हैं। इसके ज्यादातर मामलों में फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

 

जीका वायरस से खतरायह पीड़ित के तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) पर हमला करता है। इस वजह से सांस लेने में दिक्कत या कमजोरी की शिकायत हो सकती है। गंभीर मामलों में वायरस मौत या लकवे का सबब भी बन सकता है।

जीका वायरस से बचावआपको बता दें कि जीका वायरस से बचाव के लिए अभी तक कोई वैक्सीन और इलाज नहीं मिल पाया। इसलिए जीका वायरस से बचने का आसान तरीका है कि मच्छरों से पूरी तरह बचाव किया जाए। इसके अलावा जिन जगहों पर जीका वायरल फैला हो ऐसे संक्रमण वाले इलाकों में जाने से बचना चाहिए।

टॅग्स :जीका वायरसहेल्थ टिप्समेडिकल ट्रीटमेंट
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