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Eye Vision: आखें हैं सदा के लिए, आयुर्वेद के जरिये रखिये इन्हें हमेशा सहेज कर, जानिए उपचार के तरीके

By आशीष कुमार पाण्डेय | Updated: March 9, 2024 06:39 IST

आयुर्वेद में बताए चिकित्सा पद्धति से नेत्र उपचार करने से हमें सर्जरी, लेजर आदि जैसे आधुनिक उपचारों से गुजरे बिना बेहतर परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।

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ठळक मुद्देआंखें, जिनसे हम इस दुनिया को देखते हैं, ये आखें हमें सुबह और शाम को दिखाती हैंइन्हीं आखों से हम अपनी खुशियां, अपने गम को देखते हैं, उन्हें महसूस करते हैंअगर दृष्टि संबंधी कोई समस्या हो जाए तो जीवन में अंधेरा छा जाता है

Eye Vision: आंखें, जिनसे हम इस दुनिया को देखते हैं। ये आखें हमें सुबह और शाम को दिखाती हैं। इन्हीं आखों से हम अपनी खुशियां, अपने गम को देखते हैं, महसूस करते हैं। इसलिए हमें अपनी इन आंखों के बारे में चिंतित होना जरूरत है। अगर दृष्टि संबंधी कोई समस्या हो जाए तो जीवन में अंधेरा छा जाता है।

दरअसल आज की भागती-दौड़ती जिंदगी में मोबाइल और लैपटॉप के अत्यधिक उपयोग से आंखों पर सबसे ज्यादा प्रतिकूल प्रभाव पड़चा है और आखों में कई तरह की समस्याएं पैदा हो जाती हैं। यदि हम आंखों का अच्छे से ख्याल न रखें तो उसके दुष्परिणाम बेहद घातक हो सकते हैं। जीवनशैली में परिवर्तन, खानें में पोषक तत्वों की कमी और आनुवांशिक कारणों से भी हमारी आंखें कमजोर हो जाती है। 

आयुर्वेद में बताए चिकित्सा पद्धति से नेत्र उपचार करने से हमें सर्जरी, लेजर आदि जैसे आधुनिक उपचारों से गुजरे बिना बेहतर परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। जी हां, आयुर्वेदिक की जादुई छड़ी कई तरह के नेत्र विकार को जड़ से खत्म कर सकती है।

आंखों की प्रमुख समस्याएं

मधुमेह संबंधी रेटिनोपैथीरेटिनाइटिस पिगमेंटोसाआंखों की एलर्जीपैथोलॉजिकल मायोपियासूखी आंखेंऑप्टिकल समस्या

आयुर्वेद चिकित्सा प्रणाली में आंखों के संबंधिक समस्याओं के लिए कई उपचार हैं। यहां हम उन्हीं के बारे में आपको बता रहे हैं।

नेत्र तर्पण: इस उपचार में आंखों में औषधीय घी डालना होत है। उससे आंखों को चिकनाई मिलती है, जो आखों को पोषण करता है। इससे सूखी आंखों, लाल आंखों और आंखों में हो रही जलन में राहत मिलती है।

नस्य शोधन: आयुर्वेद कहता है कि हमारी नाक का आंख से बहुत गहरा संबंध है। इस कारण से नासिका छिद्रों में औषधीय तेल की बूंदें डालने से दृष्टि में सुधार और इससे आंखों का तनाव कम होता है।

त्रिफला नेत्र शोधन: त्रिफला तीन जड़ी-बूटियों का मिश्रण आंखों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। आंखों में सूजन, जलन और लालिमा को कम करने के लिए इसे आई वॉश के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

अंजना: अंजना एक आयुर्वेदिक नेत्र मरहम है, जिसे दृष्टि में सुधार करने, नेत्रश्लेष्मलाशोथ, ब्लेफेराइटिस और सूखी आंखों जैसी आंखों की आम समस्याओं से राहत मिलती है। भारतीय घरों में आमतौर पर महिलाएं अंजना का प्रयोग आखों के सौंदर्य के लिए भी करती है।

पंचकर्म: पंचकर्म एक आयुर्वेदिक विषहरण प्रक्रिया है, जिसमें शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने की आयुर्वेदिक प्रक्रिया की जाती है। चूंकि पंचकर्म में शरीर में विषाक्त पदार्थ निकल जाते हैं, जिससे नेत्र की ज्योति को लाभ मिलता है और वह लंबे समय के लिए अक्षुण बनी रहती हैं।

आंवले का रस

आंवला हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होता है। आंवले में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट पर्याप्त मात्रा में होता है। इसके प्रतिदिन सेवन करने से आंखें की रोशनी तेज होती है और रेटिना अच्छे से काम करती है । इसलिए सुबह आंवले का रस पीना चाहिए।

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