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क्या मंकीपॉक्स भी कोरोना की तरह ले सकता है महामारी का रूप, जानिए यहां सब कुछ

By आशीष कुमार पाण्डेय | Updated: May 28, 2022 17:56 IST

कोरोना के बाद दुनिया को तेजी से चपेट में ले रही मंकीपॉक्स बीमारी के कारण बीते 100 दिनों में 20 से अधिक देशों में लगभग 200 लोग चपेट में आ गये हैं। जानिए क्या है मंकीपॉक्स बीमारी

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ठळक मुद्देमंकीपॉक्स एक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से मध्य और पश्चिम अफ्रीका क्षेत्रों में पायी जाती हैइसे मंकीपॉक्स इसलिए कहते हैं क्योंकि 1958 में जब इसकी खोज हुई थी तो यह बंदरों में पाया गया थामंकीपॉक्स बच्चों, गर्भवती महिलाओं और रोगी मनुष्यों के लिए मृत्यु का कारण बन सकता है

दिल्ली: बीते दो सालों में कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया के करोड़ों लोगों को अपनी चपेट में लिया और लाखों लोगों की सांसें इस महामारी के कारण खामोश हो गईं।

भारत सहित दुनिया के तमाम देश अभी भी कोरोना के कहर से जुझ रहे हैं और इससे मुक्त होने के लिए तेजी से प्रयास कर रहे हैं लेकिन इस बीच एक और बीमारी उभरी है, जिसे कोरोना की तरह तीव्र संक्रामक और फैसले वाला माना जा रहा है।

जी हां, हम बात कर रहे हैं मंकीपॉक्स की। ताजा जानकारी के मुताबिक यूरोपीय संघ ने अभी तक कुल 118 मंकीपॉक्स मामलों की पुष्टि की है। बताया जा रहा है कि स्पेन और पुर्तगाल में मंकीपॉक्स के क्रमशः 51 और 37 मामले मिले हैं।

वहीं यूके की स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी ने अब तक कुल 90 मामलों की पुष्टि की है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक बीते 100 दिनों में वैश्विक स्तर पर 20 से अधिक देशों में लगभग 200 मंकीपॉक्स मामलों की पुष्टि हुई है।

मंकीपॉक्स के बारे में आ रही सूचनाओं से भारत सरकार के भी कान खड़े हो गये हैं, हालाकि भारत में अब तक मंकीपॉक्स का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन उसके बाद भी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय मंकीपॉक्स को लेकर एहतियात बरत रहा है और इस मामले में एडवायजरी भी जारी कर चुका है।

स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक विदेशी यात्रियों की सबसे ज्यादा आवागमन के लिए प्रयोग हो रहे हवाई अड्डों और बंदरगाहों पर स्वास्थ्य अधिकारियों को सतर्क रहने और विदेश से आने वाले अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की शारीरिक जांच के कड़े निर्देश दिये गये हैं।

समाचार वेबसाइट 'द न्यू इंडियन एक्सप्रेस' के मुताबिक स्वास्थ्य मंत्रालय के आधिकारिक सूत्र ने कहा, "देश के सभी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों को मंकीपॉक्स बीमारी को लेकर निर्देश दिया गया है कि मंकीपॉक्स प्रभावित देशों की यात्रा करने वाले यात्रियों की यात्रा इतिहास का स्टडी करके उन्हें अलग करने और उनके नमूनों को जांच के लिए पुणे की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी की बीएसएल 4 सुविधा वाली लैब में भेजने का निर्देश दिया गया है।"

आखिर क्या है मंकीपॉक्स नाम की बीमारी?

मंकीपॉक्स एक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से मध्य और पश्चिम अफ्रीका क्षेत्रों में पायी जाती है। यह वायरस उसी परिवार से संबंधित है, जिसमें चेचक नाम बीमारी होती है। नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (एनसीडीसी) के अनुसार कभी-कभी यह बीमारी संक्रामक हो जाती है और इसका प्रवाह तेजी से होता है।

गर्मी के मौसम में फैलने वाली इस बीमारी का प्रभाव लगभग पांच दिनों से तीन सप्ताह तक रहता है और ज्यादातर मामलों में लोगों को अस्पताल में भी भर्ती होने की जरूरत नहीं होती है और बीमारी से दो से चार सप्ताह ग्रसित रहने के बाद वो ठीक भी हो जाते हैं।

बीमारी का नाम मंकीपॉक्स कैसे पड़ा?

इस बीमारी को मंकीपॉक्स इसलिए कहा जाता है क्योंकि जब साल 1958 में पहली बार इसकी खोज हुई थी तो यह बंदरों में पाया गया था, उसके बाद साल 1970 में इस बीमारी के लक्षण मनुष्यों में भी देखे गये।

मंकीपॉक्स और चेचक समान हैं क्या?

जी हां, मंकीपॉक्स चेचक की तरह ही है लेकिन चेचक की तुलना में इसकी तीव्रता कम होती है। लेकिन जो लोग चेचक से पीड़ित रहे हैं, उनमें मंकीपॉक्स से लड़ने की इम्यून क्षमता हो, ऐसा कोई जरूरी नहीं है। लेकिन जिन लोगों को चेचक का टीका लगा है, उन्हें मंकीपॉक्स के संक्रमण से सुरक्षा मिलने की संभावना हो सकती है।

मंकीपॉक्स रोगियों में मिलने वाले लक्षण

मंकीपॉक्स आमतौर पर बुखार, चकत्ते और लिम्फ नोड्स में सूजन हो सकती है और साथ ही कई तरह की अन्य परेशानी हो सकती हैं। वैसे तो मंकीपॉक्स किसी भी हो सकता है लेकिन यह अगर बच्चों, गर्भवती महिलाओं और अन्य रोग से प्रभावित मनुष्यों पर हमला करता है तो घातक रूप ले सकता है। इसके अलावा वो व्यक्ति, जो मंकीपॉक्स संक्रमित व्यक्तियों या जानवरों के संपर्क में आते हैं तो उन्हें भी यह रोग अपनी चपेट में ले सकता है।

क्या मंकीपॉक्स बन सकता है मौत का कारण?

मंकीपॉक्स कोरोना की तरह उतना घातक नहीं है और ज्यादातर मामलों में इससे प्रभावित लोग तीन या चार हफ्तों में स्वस्थ्य हो जाते हैं लेकिन बच्चों, गर्भवती महिलाओं और रोगी मनुष्यों के लिए जरूर यह मृत्यु का कारण बन सकते हैं।

कैसे फैलता है मंकीपॉक्स?

मंकीपॉक्स की उत्पत्ति जानवरों से हुई है लेकिन यह इंसानों में भी पाया जाता है। इसका वायरस फटी हुई त्वचा (भले ही दिखाई न दे), श्वसन नलियों, आंख, नाक या मुंह के जरिये स्वस्थ्य मनुष्य के शरीर में प्रवेश करता है।

यदि रोग से ग्रसित जानवर मनुष्य को चाट ले या फिर अपने नाखूनों से खरोंच मार दे तो यह मानव शरीर में प्रवेश कर सकता है, इसके अलावा वायरस से पीड़ित मनुष्य किसी स्वस्थ्य मनुष्य को भी मंकीपॉक्स से प्रभावित कर सकता है।

क्या समलैंगिक होने से फैलता है मंकीपॉक्स?

हाल के शोध में पता चला है कि मंकीपॉक्स उन पुरुषों में तेजी से फैल सकता है, जो पुरुषों से यौन संबंध बनाते हैं। इसके अलावा संक्रमित मनुष्य के कपड़ों के से या उसके साथ बिस्त साझा करने से भी मंकीपॉक्स हो सकता है।

मंकीपॉक्स का इलाज क्या है?

जिन रोगियों में मंकीपॉक्स के लक्षण दिखाई देते हैं, उन्हें ठीक करने के लिए अक्सर चेचक का टीका दिया जाता है। इसके अलावा मंकीपॉक्स से लड़ने के लिए कई एंटी-वायरल दवाएं भी विकसित की जा रही हैं।

टॅग्स :Health DepartmentCoronaHealth Ministry
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