बर्नेट होम्योपैथी द्वारा आयोजित चौथा विश्व होम्योपैथी शिखर सम्मेलन, वैश्विक पहचान की ओर मजबूत कदम

By संदीप दाहिमा | Updated: April 21, 2026 20:32 IST2026-04-21T20:32:10+5:302026-04-21T20:32:19+5:30

The 4th World Homeopathy Summit, organized by Burnett Homeopathy—A Strong Step Towards Global Recognition | बर्नेट होम्योपैथी द्वारा आयोजित चौथा विश्व होम्योपैथी शिखर सम्मेलन, वैश्विक पहचान की ओर मजबूत कदम

बर्नेट होम्योपैथी द्वारा आयोजित चौथा विश्व होम्योपैथी शिखर सम्मेलन, वैश्विक पहचान की ओर मजबूत कदम

भारत की स्वास्थ्य क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व क्षमता का एक ऐतिहासिक अध्याय उस समय सामने आया जब बर्नेट होम्योपैथी प्रा. लि. द्वारा लंदन के ऐतिहासिक वेस्टमिंस्टर महल स्थित ब्रिटिश संसद के उच्च सदन में चौथा विश्व होम्योपैथी शिखर सम्मेलन 2026 सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। इस आयोजन ने होम्योपैथी को वैश्विक संस्थागत और नीतिगत विमर्श के केंद्र में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और निर्णायक कदम प्रस्तुत किया।

भारत की किसी संस्था द्वारा विश्व के सबसे प्रभावशाली विधायी मंचों में से एक पर चिकित्सा और वैज्ञानिक संवाद का नेतृत्व करना इस बात का संकेत है कि पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को लेकर वैश्विक दृष्टिकोण में उल्लेखनीय परिवर्तन हो रहा है। यह शिखर सम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं था, बल्कि यह एक सशक्त संदेश था कि भारत की होम्योपैथिक परंपरा अब शोध, सहयोग और वैज्ञानिक विश्वसनीयता के आधार पर वैश्विक स्तर पर अपनी उपस्थिति को और मजबूत करने के लिए तैयार है।

इस वैश्विक पहल के केंद्र में बर्नेट होम्योपैथी के संस्थापक और अध्यक्ष डॉ. नितिश चंद्र दुबे रहे, जिनके दूरदर्शी नेतृत्व ने इस सम्मेलन की दिशा और उद्देश्य को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा—
“यह केवल किसी एक संस्था की उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण विश्व में होम्योपैथी के लिए एक निर्णायक क्षण है। भारत से लेकर ब्रिटिश संसद तक हम यह सिद्ध कर रहे हैं कि होम्योपैथी अब साक्ष्य, शोध और संस्थागत संवाद के माध्यम से विश्व से जुड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है। भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था समेकित होगी और उसमें होम्योपैथी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।”

इस सम्मेलन में विश्व भर से एक सौ पचास से अधिक चिकित्सकों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने भाग लिया, जिससे ज्ञान के आदान-प्रदान, शोध प्रस्तुतियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए एक सशक्त मंच उपलब्ध हुआ। चर्चाओं का मुख्य केंद्र होम्योपैथी का भविष्य, सतत स्वास्थ्य व्यवस्था के मॉडल और इसके वैज्ञानिक सत्यापन की आवश्यकता रहा। इस आयोजन का महत्व तब और अधिक बढ़ गया जब इसमें नीति-निर्माताओं और वैश्विक प्रभावशाली व्यक्तियों की भागीदारी सामने आई। ब्रिटिश सांसद शिवानी राजा और लॉर्ड रावल की उपस्थिति के साथ-साथ इस आयोजन में यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री के पूर्व सलाहकार माय्ल्स स्टेसी सहित कई विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति भी रही, जिससे कार्यक्रम की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्ता और अधिक बढ़ गई। इसके अतिरिक्त इस सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रसिद्ध क्रिकेट खिलाड़ियों की उपस्थिति ने इसे एक विशिष्ट आयाम प्रदान किया। इयोन मॉर्गन, एलिस्टर कुक, स्टुअर्ट ब्रॉड, जोनाथन ट्रॉट और डेविड गॉवर जैसे खिलाड़ियों की मौजूदगी ने यह संदेश दिया कि उच्च प्रदर्शन खेलों में स्वास्थ्य, पुनर्प्राप्ति और समग्र चिकित्सा के प्रति जागरूकता तेजी से बढ़ रही है।

ब्रिटिश संसद के अतिरिक्त यह शिखर सम्मेलन ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय जैसे विश्वप्रसिद्ध शैक्षणिक और वैज्ञानिक स्थलों तक भी विस्तारित हुआ, जहाँ आयोजित सत्रों ने शोध, अंतःविषय सहयोग और वैश्विक शैक्षणिक भागीदारी के महत्व को और सुदृढ़ किया। यह आयोजन विश्व होम्योपैथी दिवस के अवसर पर किया गया, जो होम्योपैथी के संस्थापक सैमुअल हैनिमैन की जयंती के रूप में मनाया जाता है। यूरोप में जन्मी यह चिकित्सा पद्धति समय के साथ भारत में व्यापक रूप से अपनाई गई और आज भारत इसके वैश्विक विस्तार में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

बर्नेट होम्योपैथी ने इस विकास यात्रा में लगातार शोध आधारित कार्यप्रणाली और वैश्विक सहयोग पर ध्यान केंद्रित किया है। लंदन में आयोजित यह सम्मेलन इसी यात्रा का एक महत्वपूर्ण चरण है, जो स्थानीय स्तर से निकलकर वैश्विक संस्थागत पहचान तक पहुंचने का प्रतीक है। सम्मेलन में होम्योपैथी को लेकर लंबे समय से चली आ रही आलोचनाओं और प्रश्नों पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने माना कि यद्यपि इसे कई बार प्लेसीबो प्रभाव से जोड़ा गया है, फिर भी नैदानिक अनुभवों, रोगी परिणामों और बढ़ते शोध कार्यों के आधार पर इसके गहन वैज्ञानिक अध्ययन और व्यवस्थित मूल्यांकन की आवश्यकता बनी हुई है।
यह वैश्विक उपलब्धि बर्नेट होम्योपैथी द्वारा गोवा में आयोजित पूर्व साक्ष्य-आधारित शोध सम्मेलन की सफलता पर आधारित है, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत आधार तैयार किया था और व्यापक मीडिया ध्यान आकर्षित किया था। लंदन संस्करण उस यात्रा का स्वाभाविक विस्तार है, जो अब राष्ट्रीय स्तर से आगे बढ़कर वैश्विक संस्थागत मंच तक पहुंच चुकी है।

यह सम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य सोच में परिवर्तन का संकेत है। आज जब दुनिया एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध और जीवनशैली जनित रोगों जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है, तब समेकित और पूरक चिकित्सा प्रणालियों की भूमिका को लेकर वैश्विक स्तर पर नई स्वीकार्यता विकसित हो रही है। बर्नेट होम्योपैथी ने संकेत दिया है कि यह केवल शुरुआत है। आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय सहयोगों का विस्तार, शोध संरचनाओं को सुदृढ़ करना और होम्योपैथी को मुख्यधारा स्वास्थ्य विमर्श में और अधिक प्रभावी ढंग से स्थापित करना इसका प्रमुख लक्ष्य रहेगा।

बर्नेट होम्योपैथी के बारे में

बर्नेट होम्योपैथी प्रा. लि. भारत की अग्रणी होम्योपैथिक स्वास्थ्य संस्थाओं में से एक है, जो पारंपरिक सिद्धांतों को आधुनिक वैज्ञानिक शोध के साथ जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। डॉ. नितिश चंद्र दुबे के नेतृत्व में यह संस्था शोध-आधारित होम्योपैथी, वैश्विक सहयोग और समग्र स्वास्थ्य नवाचार को आगे बढ़ा रही है।

Web Title: The 4th World Homeopathy Summit, organized by Burnett Homeopathy—A Strong Step Towards Global Recognition

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