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पत्रकार सौम्या विश्वनाथन हत्याकांड: सभी आरोपियों को हत्या का दोषी करार दिया गया, जानिए क्या था मामला

By शिवेन्द्र कुमार राय | Updated: October 18, 2023 14:58 IST

विश्वनाथन की 30 सितंबर 2008 को उस समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी जब वह सुबह करीब साढ़े तीन बजे अपनी कार में काम से घर लौट रही थीं। दिल्ली की साकेत कोर्ट ने 2008 में पत्रकार सौम्या विश्वनाथन की हत्या मामले में बुधवार को सभी आरोपियों को हत्या का दोषी करार दिया।

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ठळक मुद्देपत्रकार सौम्या विश्वनाथन की हत्या मामले में आया फैसलासभी आरोपियों को हत्या का दोषी करार दिया गयाविश्वनाथन की 30 सितंबर 2008 को हत्या कर दी गई थी

नई दिल्ली: दिल्ली की साकेत कोर्ट ने 2008 में पत्रकार सौम्या विश्वनाथन की हत्या मामले में बुधवार को सभी आरोपियों को हत्या का दोषी करार दिया। विश्वनाथन की 30 सितंबर 2008 को उस समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी जब वह सुबह करीब साढ़े तीन बजे अपनी कार में काम से घर लौट रही थीं।

फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने सभी आरोपियों रवि कपूर, अमित शुक्ला, अजीत, बलजीत, अजय सेठी और अजय कुमार की हाजिरी लगाई। फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि उसका मानना ​​है कि "इसमें कोई संदेह नहीं है कि आरोपियों ने सौम्या विश्वनाथन की हत्या उसे लूटने के इरादे से की थी।"

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रवींद्र कुमार पांडे ने बचाव और अभियोजन पक्ष की दलीलें पूरी होने के बाद 13 अक्टूबर को मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस मामले में जांच कर रही पुलिस ने दावा किया था कि सौम्या विश्वनाथन की हत्या के पीछे का मकसद डकैती था। पांच लोगों - रवि कपूर, अमित शुक्ला, बलजीत मलिक, अजय कुमार और अजय सेठी को उसकी हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और ये सभी मार्च 2009 से हिरासत में हैं।

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) लगाया था। पुलिस ने कहा कि आईटी कार्यकारी जिगिशा घोष की हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियार की बरामदगी से विश्वनाथन की हत्या के मामले का खुलासा हुआ। इस मामले में आरोपी बलजीत मलिक द्वारा 2019 में त्वरित सुनवाई के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई थी।  दिल्ली उच्च न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट से रिपोर्ट मांगी कि आरोप पत्र दायर होने के साढ़े नौ साल बाद भी मुकदमा समाप्त क्यों नहीं हुआ।

ट्रायल कोर्ट ने तब उच्च न्यायालय को सूचित किया कि देरी मुख्य रूप से अभियोजन पक्ष के गवाहों की गैर-मौजूदगी और विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति में लगने वाले समय के कारण हुई। ट्रायल कोर्ट ने अगस्त 2016 में जिगिशा घोष हत्या मामले में रवि कपूर और अमित शुक्ला को मौत की सजा दी थी और बलजीत मलिक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। हालांकि, जनवरी 2018 में, उच्च न्यायालय ने कपूर और शुक्ला की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया था और मलिक की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा।

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